Shayari Hi Shayari-Images Download,Dard Ishq,Love,Zindagi, Yaadein, Funny,New Year Sms love hindi shayari images download,happy new year shayari images download hindi 2018 ,Ghazal 2018.

Lates Rahim Ji Ke Dohe In Hindi

  • रहिमन देख बड़ेन को लघु न दीजिये डार।

    • जहाँ काम आवे सुई कहा करै तलवार।।

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ :

    • रहीम कहते हैं कि अगर कोई बड़ी वस्तु मिल जाए तो छोटी को नहीं छोड़ना चाहिए क्यूंकि जो काम एक छोटी सुई कर सकती हैं उसे बड़ी तलवार नहीं कर सकती | अर्थात जो आपके पास हैं उसकी कद्र करे उससे अच्छा मिलने पर जो हैं उसे ना भूले |

    • ******************************

    • जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग।

    • चंदन विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग।।

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ :

    • रहीम कहते हैं जो व्यक्ति योग्य एवम अच्छे चरित्र का होता हैं उस पर कुसंगति भी प्रभाव नहीं डाल सकती जैसे जहरीला नाग अगर चन्दन के वृक्ष पर लिपट जाए तब भी उसे जहरीला नहीं बना सकता |

    • ******************************

    • खीरा सिर से काटिये मलियत नमक बनाय।

    • रहिमन करूए मुखन को चहियत इहै सजाय।।

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ :

    • रहीम कहते हैं जिस तरह खीरे को काटकर उसमे नमक लगा कर उसके कड़वेपन को दूर किया जाता हैं उसी प्रकार कड़वे व्यक्ति वचन बोलने वाले को भी यही सजा मिलनी चाहिए |

    • ******************************

    • रहिमन धागा प्रेम का मत तोरउ चटकाय।

    • टूटे से फिर से ना मिलै, मिलै गांठि परि जाय।।

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ : 

    • रहीम कहते हैं प्रेम का धागा अर्थात रिश्ता कभी तोड़ना नहीं चाहिए | अगर एक बार यह प्रेम का धागा टूटता हैं तो कभी नहीं जुड़ता और अगर जुड़ भी जाए तो उसमे गांठ पड़ जाती हैं | कहने का मतलब यह हैं कि रिश्तों में दरार आ जाये तो खटास रह ही जाती हैं |

    • ******************************

    • रूठे सुजन मनाइये जो रूठे सौ बार।

    • रहिमन फिर फिर पोइये टूटे मुक्ताहार।।

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ:

    • रहीम कहते हैं अगर आपका कोई खास सखा अथवा रिश्तेदार आपसे नाराज हो गया हैं तो उसे मनाना चाहिए अगर वो सो बार रूठे तो सो बार मनाना चाहिए क्यूंकि अगर कोई मोती की माला टूट जाती हैं तो सभी मोतियों को एकत्र कर उसे वापस धागे में पिरोया जाता हैं |

    • ******************************

    • रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुहँ स्याह

    • नहीं छलन को परतिया, नहीं कारन को ब्याह

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ:

    • रहीम कहते हैं थोड़े दिन के लिए कौन अपना मूंह काला करता हैं क्यूंकि पर नारि को ना धोखा दिया जा सकता हैं और ना ही विवाह किया जा सकता हैं |

    • ******************************

    • गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि।

    • कूपहु ते कहूँ होत है, मन काहू को बाढी ।

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ :

    • रहीम कहते हैं जिस तरह गहरे कुंए से भी बाल्टी डालकर पानी निकाला जा सकता हैं उसी तरह अच्छे कर्मों द्वारा किसी भी व्यक्ति के दिल में अपने लिए प्यार भी उत्पन्न किया जा सकता हैं क्यूंकि मनुष्य का ह्रदय कुएँ से गहरा नहीं होता |

    • ******************************

    • जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह।

    • धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह।

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ:

    • रहीम कहते हैं जिस तरह धरती माँ ठण्ड, गर्मी और वर्षा को सहन करती हैं उसी प्रकार मनुष्य शरीर को भी पड़ने वाली भिन्न- भिन्न परिस्थितियों को सहन करना चाहिए |

    • ******************************

    • वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।

    • बांटन वारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग।|

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ:

    • रहीम कहते हैं जिस प्रकार मेहँदी लगाने वालों को भी उसका रंग लग जाता हैं उसी प्रकार पर नर सेवा करने वाले भी धन्य हैं उन पर नर सेवा का रंग चढ़ जाता हैं |

    • ******************************

    • रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय।

    • नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय।|

    • रहीम के दोहे हिंदी अर्थ:

    • रहीम कहते हैं कि शत प्रतिशत मन लगा कर किये गए काम को देखे उनमें कैसी सफलता मिलती हैं | अगर अच्छी नियत और मेहनत से कोई भी काम किया जाए तो सफलता मिलती ही हैं क्यूंकि सही एवम उचित परिश्रम से इंसान ही नहीं भगवान को भी जीता जा सकता हैं |






    • एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
    • रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥

    • देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन।
    • लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन॥

    • अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम।
    • सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम॥

    • गरज आपनी आप सों रहिमन कहीं न जाया।
    • जैसे कुल की कुल वधू पर घर जात लजाया॥

    • छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात।
    • कह ‘रहीम’ हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

    • तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
    • कहि रहीम परकाज हित, संपति सँचहि सुजान॥

    • खीरा सिर ते काटिए, मलियत लोन लगाय।
    • रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय॥

    • जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
    • चन्दन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥

    • जे गरीब सों हित करै, धनि रहीम वे लोग।
    • कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥

    • जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घटि जांहि।
    • गिरिधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नांहि॥

    • खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।
    • रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥

    • टूटे सुजन मनाइए, जो टूटे सौ बार।
    • रहिमन फिरि फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार॥

    • बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
    • रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय॥

    • आब गई, आदर गया, नैनन गया सनेहि।
    • ये तीनों तब ही गये, जबहि कहा कछु देहि॥

    • रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
    • जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवारि॥

    • माली आवत देख के, कलियन करे पुकारि।
    • फूले फूले चुनि लिये, कालि हमारी बारि॥

    • रहिमन वे नर मर गये, जे कछु माँगन जाहि।
    • उनते पहिले वे मुये, जिन मुख निकसत नाहि॥

    • रहिमन विपदा ही भली, जो थोरे दिन होय।
    • हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥

    • बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
    • पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

    • रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर।
    • जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर॥

    No comments:

    Post a Comment