Qateel Shifai Hindi Shayari 2016



  1. #मैं घर से तेरी तमन्ना पहन के जब निकलूँ,
  2. बरहना शहर में कोई नज़र ना आए मुझे।
  3. ===================================
  4. वफ़ा के शीश महल में सजा लिया मैनें;
  5. वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें;

  6. #ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई;
  7. #ग़मों कि ओट में ख़ुद को छुपा लिया मैनें;

  8. कभी न ख़त्म किया मैं ने रोशनी का मुहाज़;
  9. #अगर चिराग़ बुझा, दिल जला लिया मैनें;

  10. कमाल ये है कि जो दुश्मन पे चलाना था;
  11. वो तीर अपने कलेजे पे खा लिया मैनें;

  12. "क़तील" जिसकी अदावत में एक प्यार भी था;
  13. उस आदमी को गले से लगा लिया मैनें।
  14. ===================================
  15. अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,
  16. मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको;

  17. #मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने,
  18. #ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको;

  19. ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन,
  20. #कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको;

  21. #बादाह फिर बादाह है मैं ज़हर भी पी जाऊँ 'क़तील',
  22. शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।
  23. ===================================
  24. पहले तो अपने दिल की...

  25. #पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइये;
  26. #फिर जो निगाह-ए-यार कहे मान जाइये;

  27. पहले मिज़ाज-ए-राहगुज़र जान जाइये;
  28. फिर गर्द-ए-राह जो भी कहे मान जाइये;

  29. कुछ कह रही है आपके सीने की धड़कने;
  30. मेरी सुनें तो दिल का कहा मान जाइये;

  31. इक धूप सी जमी है निगाहों के आस पास;
  32. ये आप हैं तो आप पे क़ुर्बान जाइये;

  33. शायद हुज़ूर से कोई निस्बत हमें भी हो;
  34. आँखों में झाँक कर हमें पहचान जाइये।
  35. ===================================
  36. अपने अपने किये पे हैं हम दोनों इतने शर्मिंदा;
  37. दिल हम से कतराता है और हम दिल से कतराते हैं।
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  39. बेचैन बहारों में क्या-क्या है जान की ख़ुश्बू आती है;
  40. जो फूल महकता है उससे तूफ़ान की ख़ुश्बू आती है;

  41. कल रात दिखा के ख़्वाब-ए-तरब जो सेज को सूना छोड़ गया;
  42. हर सिलवट से फिर आज उसी मेहमान की ख़ुश्बू आती है;

  43. तल्कीन-ए-इबादत की है मुझे यूँ तेरी मुक़द्दस आँखों ने;
  44. #मंदिर के दरीचों से जैसे लोबान की ख़ुश्बू आती है;

  45. #कुछ और भी साँसें लेने पर मजबूर-सा मैं हो जाता हूँ;
  46. #जब इतने बड़े जंगल में किसी इंसान की ख़ुश्बू आती है;

  47. डरता हूँ कहीं इस आलम में जीने से न मुनकिर हो जाऊँ;
  48. अहबाब की बातों से मुझको एहसान की ख़ुश्बू आती है



  49. #दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं;
  50. #लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते हैं।
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  52. उसे मैं ढाँप लेना चाहता हूँ अपनी पलकों में;
  53. इलाही उस के आने तक मेरी आँखों में दम रखना।
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  55. वफ़ा के शीश महल में सजा लिया मैनें;
  56. वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें;

  57. #ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई;
  58. ग़मों कि ओट में ख़ुद को छुपा लिया मैनें;

  59. #कभी न ख़त्म किया मैं ने रोशनी का मुहाज़;
  60. अगर चिराग़ बुझा, दिल जला लिया मैनें;

  61. कमाल ये है कि जो दुश्मन पे चलाना था;
  62. वो तीर अपने कलेजे पे खा लिया मैनें;

  63. "क़तील" जिसकी अदावत में एक प्यार भी था;
  64. उस आदमी को गले से लगा लिया मैनें।
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  66. गुज़रे दिनों की याद बरसती घटा लगे;
  67. गुज़रूँ जो उस गली से तो ठंडी हवा लगे;

  68. मेहमान बन के आये किसी रोज़ अगर वो शख़्स;
  69. उस रोज़ बिन सजाये मेरा घर सजा लगे;

  70. #मैं इस लिये मनाता नहीं वस्ल की ख़ुशी;
  71. मेरे रक़ीब की न मुझे बददुआ लगे;

  72. #वो क़हत दोस्ती का पड़ा है कि इन दिनों;
  73. जो मुस्कुरा के बात करे आश्ना लगे;

  74. तर्क-ए-वफ़ा के बाद ये उस की अदा 'क़तील';
  75. मुझको सताये कोई तो उस को बुरा लगे।



  76. तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं;
  77. किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं।
  78. ===================================
  79. आए तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान,
  80. भूले तो यूँ कि गोया कभी आश्ना न थे।
  81. ===================================
  82. दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है;
  83. लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।
  84. ===================================
  85. तेरी सूरत जो दिलनशीं की है;
  86. आशना शक्ल हर हसीं की है;

  87. हुस्न से दिल लगा के हस्ती की;
  88. हर घड़ी हमने आतशीं की है;

  89. सुबह-ए-गुल हो की शाम-ए-मैख़ाना;
  90. मदह उस रू-ए-नाज़नीं की है;

  91. शैख़ से बे-हिरास मिलते हैं;
  92. हमने तौबा अभी नहीं की है;

  93. ज़िक्र-ए-दोज़ख़, बयान-ए-हूर-ओ-कुसूर;
  94. बात गोया यहीं कहीं की है;

  95. फ़ैज़ औज-ए-ख़याल से हमने;
  96. आसमां सिन्ध की ज़मीं की है।
  97. ===================================
  98. दिल से हर मामला कर के चले थे साफ़ हम,
  99. कहने में उनके सामने बात बदल गयी।
  100. ===================================
  101. ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम;
  102. विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं।
  103. ===================================
  104. बहुत मिला न मिला ज़िन्दगी से ग़म क्या है;
  105. मता-ए-दर्द बहम है तो बेश-ओ-कम क्या है;

  106. हम एक उम्र से वाक़िफ़ हैं अब न समझाओ; 
  107. #के लुत्फ़ क्या है मेरे मेहरबाँ सितम क्या है;

  108. करे न जग में अलाव तो शेर किस मक़सद;
  109. #करे न शहर में जल-थल तो चश्म-ए-नम क्या है;

  110. अजल के हाथ कोई आ रहा है परवाना;
  111. #न जाने आज की फ़ेहरिस्त में रक़म क्या है;

  112. सजाओ बज़्म ग़ज़ल गाओ जाम ताज़ा करो;
  113. बहुत सही ग़म-ए-गेती शराब कम क्या है;

  114. #लिहाज़ में कोई कुछ दूर साथ चलता है;
  115. वरना दहर में अब ख़िज़्र का भरम क्या है।
  116. ===================================
  117. तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं;
  118. किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं।
  119. ===================================
  120. कब ठहरेगा दर्द-ए-दिल, कब रात बसर होगी;
  121. सुनते थे वो आयेंगे, सुनते थे सहर होगी;

  122. कब जान लहू होगी, कब अश्क गुहार होगा;
  123. किस दिन तेरी शनवाई, ऐ दीदा-ए-तर होगी;

  124. कब महकेगी फसले-गुल, कब बहकेगा मयखाना;
  125. कब सुबह-ए-सुखन होगी, कब शाम-ए-नज़र होगी;

  126. वाइज़ है न जाहिद है, नासेह है न क़ातिल है;
  127. अब शहर में यारों की, किस तरह बसर होगी;

  128. कब तक अभी रह देखें, ऐ कांटे-जनाना;
  129. कब अश्र मुअय्यन है, तुझको तो ख़बर होगी।
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  131. दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं;
  132. जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते हैं।



  133. #ख़ूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं,
  134. साफ़ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं।
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  136. #इस नहीं का कोई इलाज नहीं,
  137. रोज़ कहते हैं आप आज नहीं।
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  139. ये तो नहीं कि तुम सा जहान में हसीन नहीं,
  140. #इस दिल का क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं।
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  142. #न जाओ हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देखते जाओ;
  143. कि जी न चाहे तो नाचार देखते जाओ;

  144. बहार-ए-उमर् में बाग़-ए-जहाँ की सैर करो;
  145. खिला हुआ है ये गुलज़ार देखते जाओ;

  146. उठाओ आँख, न शरमाओ ,ये तो महिफ़ल है;
  147. ग़ज़ब से जानिब-ए-अग़यार देखते जाओ;

  148. हुआ है क्या अभी हंगामा अभी कुछ होगा;
  149. फ़ुगां में हश्र के आसार देखते जाओ;

  150. #तुम्हारी आँख मेरे दिल से बेसबब-बेवजह;
  151. हुई है लड़ने को तय्यार देखते जाओ;

  152. #न जाओ बंद किए आँख रहरवान-ए-अदम;
  153. इधर-उधर भी ख़बरदार देखते जाओ;

  154. #कोई न कोई हर इक शेर में है बात ज़रूर;
  155. जनाबे-दाग़ के अशआर देखते जाओ।
  156. ===================================
  157. दिल को क्या हो गया...

  158. दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने;
  159. क्यों है ऐसा उदास क्या जाने;

  160. #कह दिया मैं ने हाल-ए-दिल अपना;
  161. इस को तुम जानो या ख़ुदा जाने;

  162. जानते जानते ही जानेगा;
  163. मुझ में क्या है वो अभी क्या जाने;

  164. तुम न पाओगे सादा दिल मुझसा;
  165. जो तग़ाफ़ुल को भी हया जाने।
  166. ===================================
  167. अजब अपना हाल होता...

  168. अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता;
  169. #कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता;

  170. न मज़ा है दुश्मनी में न है लुत्फ़ दोस्ती में;
  171. #कोई ग़ैर ग़ैर होता कोई यार यार होता;

  172. ये मज़ा था दिल्लगी का कि बराबर आग लगती;
  173. न# तुम्हें क़रार होता न हमें क़रार होता;

  174. तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते;
  175. अगर अपनी जिन्दगी का हमें ऐतबार होता।
  176. ===================================
  177. पूछिये मयकशों से लुत्फ़-ए-शराब;
  178. #ये मज़ा पाक-बाज़ क्या जाने।
  179. ===================================
  180. मुझे याद करने से ये मुद्दा था;
  181. निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते।
  182. ===================================
  183. तेरी महफ़िल में यह कसरत कभी थी;
  184. हमारे रंग की सोहबत कभी थी;

  185. इस आज़ादी में वहशत कभी थी;
  186. #मुझे अपने से भी नफ़रत कभी थी;

  187. #हमारा दिल, हमारा दिल कभी था;
  188. तेरी सूरत, तेरी सूरत कभी थी;

  189. #हुआ इन्सान की आँखों से साबित;
  190. #अयाँ कब नूर में जुल्मत कभी थी;

  191. #दिल-ए-वीराँ में बाक़ी हैं ये आसार;
  192. यहाँ ग़म था, यहाँ हसरत कभी थी;

  193. तुम इतराए कि बस मरने लगा 'दाग़';
  194. बनावट थी जो वह हालत कभी थी।
  195. ===================================
  196. ये तो कहिए इस ख़ता की क्या सज़ा;
  197. #मैं जो कह दूँ आप पर मरता हूँ मैं।

  198. ===================================


  199. अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
  200. #लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे।
  201. ===================================
  202. न आते हमें इसमें तकरार क्या थी,
  203. #मगर वादा करते हुए आर क्या थी;

  204. तुम्हारे पयामी ने ख़ुद राज़ खोला,
  205. ख़ता इसमें बन्दे की सरकार क्या थी;

  206. भरी बज़्म में अपने आशिक़ को ताड़ा,
  207. तेरी आँख मस्ती में होशियार क्या थी;

  208. तअम्मुल तो था उनको आने में क़ासिद, 
  209. मगर ये बता तर्ज़े-इन्कार क्या थी;

  210. #खिंचे ख़ुद-ब-ख़ुद जानिबे-तूर मूसा,
  211. कशिश तेरी ऐ शौक़े-दीदाए क्या थी;

  212. #कहीं ज़िक्र रहता है इक़बाल तेरा,
  213. #फ़ुसूँ था कोई तेरी गुफ़्तार क्या थी।
  214. ===================================
  215. #नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;
  216. #मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
  217. ===================================
  218. अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
  219. लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे।
  220. ===================================
  221. #कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में;
  222. कि हज़ारों सज्दे तड़प रहे हैं मिरी जबीन-ए-नियाज़ में।
  223. ===================================
  224. #तेरी दुआ से कज़ा तो बदल नहीं सकती;
  225. मगर है इस से यह मुमकिन कि तू बदल जाये; तेरी दुआ है कि हो तेरी आरज़ू पूरी;
  226. मेरी दुआ है तेरी आरज़ू बदल जाये।

  227. शब्दार्थ:
  228. कज़ा - भाग्य
  229. ===================================
  230. #न आते हमें इसमें तकरार क्या थी;
  231. #मगर वादा करते हुए आर क्या थी;

  232. तुम्हारे पयामी ने ख़ुद राज़ खोला;
  233. ख़ता इसमें बन्दे की सरकार क्या थी;

  234. भरी बज़्म में अपने आशिक़ को ताड़ा;
  235. तेरी आँख मस्ती में होशियार क्या थी;

  236. #तअम्मुल तो था उनको आने में क़ासिद; 
  237. मगर ये बता तर्ज़े-इन्कार क्या थी;

  238. #खिंचे ख़ुद-ब-ख़ुद जानिबे-तूर मूसा;
  239. कशिश तेरी ऐ शौक़े-दीदाए क्या थी;

  240. कहीं ज़िक्र रहता है 'इक़बाल' तेरा;
  241. फ़ुसूँ था कोई तेरी गुफ़्तार क्या थी।
  242. ===================================
  243. कोई समझाए ये...

  244. कोई समझाए ये क्या रंग है मैख़ाने का;
  245. आँख साकी की उठे नाम हो पैमाने का;

  246. गर्मी-ए-शमा का अफ़साना सुनाने वालों;
  247. रक्स देखा नहीं तुमने अभी परवाने का;

  248. #चश्म-ए-साकी मुझे हर गम पे याद आती है;
  249. #रास्ता भूल न जाऊँ कहीं मैख़ाने का;

  250. #अब तो हर शाम गुज़रती है उसी कूचे में;
  251. #ये नतीजा हुआ ना से तेरे समझाने का;

  252. मंज़िल-ए-ग़म से गुज़रना तो है आसाँ 'इक़बाल';
  253. इश्क है नाम ख़ुद अपने से गुज़र जाने का

  254. ===================================


  255. आता है याद मुझको...

  256. #आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना;
  257. #वो बाग़ की बहारें, वो सब का चह-चहाना;

  258. #आज़ादियाँ कहाँ वो, अब अपने घोसले की;
  259. #अपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना;

  260. #लगती हो चोट दिल पर, आता है याद जिस दम;
  261. #शबनम के आँसुओं पर कलियों का मुस्कुराना;

  262. #वो प्यारी-प्यारी सूरत, वो कामिनी-सी मूरत;
  263. #आबाद जिस के दम से था मेरा आशियाना।
  264. ===================================
  265. #अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी;
  266. #तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन

  267. ===================================

  268. #निगाहों का मर्कज़ बना जा रहा हूँ;
  269. #मोहब्बत के हाथों लुटा जा रहा हूँ;

  270. #मैं क़तरा हूँ लेकिन ब-आग़ोशे-दरिया;
  271. #अज़ल से अबद तक बहा जा रहा हूँ;

  272. #वही हुस्न जिसके हैं ये सब मज़ाहिर;
  273. #उसी हुस्न से हल हुआ जा रहा हूँ;

  274. #न जाने कहाँ से न जाने किधर को;
  275. #बस इक अपनी धुन में उड़ा जा रहा हूँ;

  276. #न सूरत न मआनी न पैदा, न पिन्हाँ
  277. #ये किस हुस्न में गुम हुआ जा रहा हूँ।
  278. ===================================
  279. पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब,
  280. #कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं।
  281. ===================================
  282. कुछ इस अदा से आज वो पहलू-नशीं रहे,
  283. ##जब तक हमारे पास रहे हम नहीं रहे।
  284. ===================================
  285. #हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका;
  286. #मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया।
  287. ===================================
  288. #मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर;
  289. #फिर भी तेरा शबाब तेरा ही शबाब है।
  290. ===================================
  291. तबीयत इन दिनों बेगा़ना-ए-ग़म होती जाती है;
  292. ##मेरे हिस्से की गोया हर ख़ुशी कम होती जाती है;

  293. #क़यामत क्या ये अय हुस्न-ए-दो आलम होती जाती है;
  294. #कि महफ़िल तो वही है, दिलकशी कम होती जाती है;

  295. वही मैख़ाना-ओ-सहबा वही साग़र वही शीशा;
  296. #मगर आवाज़-ए-नौशानोश मद्धम होती जाती है;

  297. #वही है शाहिद-ओ-साक़ी मगर दिल बुझता जाता है;
  298. #वही है शमः लेकिन रोशनी कम होती जाती है;

  299. #वही है ज़िन्दगी अपनी 'जिगर' ये हाल है अपना;
  300. #कि जैसे ज़िन्दगी से ज़िन्दगी कम होती जाती है।
  301. ===================================
  302. #लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया;
  303. #जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया;
  304. #पहले कहाँ ये नाज़ थे, ये इश्वा-ओ-अदा;
  305. #दिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया।
  306. ===================================
  307. #अब तो ये भी नहीं रहा एहसास दर्द होता है या नहीं होता;
  308. #इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा आदमी काम का नहीं होता।
  309. ===================================
  310. #आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है;
  311. #जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है।
  312. ===================================
  313. दिल गया...

  314. दिल गया रौनक-ए-हयात गई;
  315. ग़म गया सारी कायनात गई; 

  316. दिल धड़कते ही फिर गई वो नज़र;
  317. लब तक आई न थी कि बात गई; 

  318. #उनके बहलाए भी न बहला दिल;
  319. गएगां सइये-इल्तफ़ात गई; 

  320. हाय सरशरायां जवानी की;
  321. आँख झपकी ही थी के रात गई; 

  322. नहीं मिलता मिज़ाज-ए-दिल हमसे;
  323. #ग़ालिबन दूर तक ये बात गई; 

  324. #क़ैद-ए-हस्ती से कब निजात 'जिगर';
  325. #मौत आई अगर हयात गई।

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