Action Quotes in Hindi Status


  • कर्म करने मे ही अधिका!र है, फल मे नही।
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  • कर्म सरल है, वि!चार कठिन।
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  • यह पहले से निर्मित कोई चीज! नहीं है..ये आप ही के कर्मों से आती है.
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  • सामाजिक कार्य के लिए कि!ये जाने वाले प्रयास यदि अपने स्वार्थ के लिए हों, तो वे कार्य एक समय बाद मर जायेंगे.
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  • उत्कृष्ट कार्य वह ही है जिसमे एक साधारण काम को एक असामान्य तरीके से किया गया हो.
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  • अगर आप अदृश्य चीजे देख सकते हो तो आप अदृश्य चीजे कर भी सकते हो।
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  • कोई सकारात्मक कार्य अगर सका!रात्मक सोच के साथ किया जाय तो रिजल्ट हमेशा सफल होता है।
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  • कर्म ही मेरा धर्म है.कर्म !ही मेरी पूजा है.
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  • कर्म की जड़ें विचारों में होती हैं।
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  • हम अपने आप से जैसी आशाएं करतें हैं हम हमेशा अपने कार्यों द्वारा उसे ही पूरा करने की कोशिश करतें हैं।
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  • किसी भी व्यवसाय के मालिक और मेनेजर की असली कीमत उसकी कार्य संपादन की दक्षता होती है।
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  • यदि आप इस बात की चिंता न करें कि आपके काम का श्रेय किसे मिलने वाला है तो आप आश्चर्यजनक कार्य कर सकते हैं।
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  • सबसे आसान काम है दोष ढूँढना और सबसे मुश्किल काम है करना इसलिए लोग आसान काम करते हैं।
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  • जब कोई कार्य प्रेमभाव के साथ! किया जाता है, तो उसमें तत्काल सफलता मिलती है।
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  • अजूबा यह नहीं कि हमने! किसी कार्य को कर दिखाया है, बल्कि यह है कि हमें उस कार्य को करके प्रसन्नता हुई है।
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  • संसार में अक्सर इंसान के सौ भले कार्यो को उसके एक बुरे कार्य के लिए भुला दिया जाता है।
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  • मनुष्य कर्म करने में स्वतन्त्र है; परन्तु इसके परिणामों में चुनाव की कोई सुविधा नहीं है।
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  • दोष निकलना सुगम है, उसे अच्छा करना कठिन |
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  • हताश न होना सफलता का मूल है और, यही परम सुख है, उत्‍साह मनुष्‍य को कर्मों के लिये प्रेरित करता है और उत्‍साह ही कर्म को सफल बनाता है.
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  • दीपक बोलता नहीं है उसका प्रकाश परिचय देता है। ठीक उसी प्रकार, आप अपने बारे में कुछ न बोले, अच्छे कर्म करते रहे वही आपका परिचय देंगे।


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  • कुछ न कुछ कर बैठने को ही कर्तव्य नहीं कहा जा सकता | कोई समय ऐसा भी होता है, जब कुछ न करना ही सबसे बड़ा कर्तव्य माना जाता! है |
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  • मानव के कर्म ही उसके वि!चारों की सर्वश्रेष्ट व्याख्या हैं |
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  • कर्म सरल है, विचार कठिन।
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  • कर्म करने मे ही अधिकार है, फल मे नही।
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  • कीर्ति वीरोचित कार्यो की सुगन्ध है।
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  • जीवन में सबसे ज्यादा आनंद उसी काम को करने में है जिसके बारे में लोग कहते हैं कि तुम नहीं कर सकते हो।
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  • जो अपने योग्य कर्म में जी जान से लगा रहता है,वही संसार में प्रशंसा का पात्र होता है।
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  • अपने काम में सुन्दरता तलाशो!| उससे सुंदर और कुछ हों ही नहीं सकता।
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  • योग्यता से बिताए हुए जीवन को,हमें! वर्षों से नहीं बल्कि कर्मों के पैमाने से तौलना चाहिए।
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  • अच्छे कार्य करने के लि!ए कभी शुभ मुहूर्त मत पूछो।
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  • पहले कहना और बाद में करना, इसकी अपेक्षा पहले करना और फिर कहना अधिक श्रेयस्कर है।
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  • काम की अधिकता नहीं, अनियमितता आदमी को मार डालती है।
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  • सच्चा काम अहंकार और स्वार्थ को छोड़े बिना नहीं होता।
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  • किसी कार्य को खूबसूरती से करने के लिए मनुष्य को उसे स्वयं करना चाहिए।
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  • आप आज जो करेंगे वह मह!त्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें आप अपने जीवन का एक दिन लगा रहे हैं।
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  • कर्म के बिना दूरदर्शिता एक !दिवास्वप्न है। दूरदर्शिता के बिना कर्म दुःस्वप्न है।
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  • मनुष्य के कर्म ही उसके विचारो की सबसे अच्छी व्याख्या है।
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  • जीवन में किए हुए कर्म को परिवर्तित करने की पूर्ण असम्भाव्यता से अधिक दुःखमय और कुछ नहीं है।
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  • कर्म ही पूजा है और कर्तव्य- पालन भक्ति है।

  • कर्म सदैव सुख न ला सके परन्तु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता।
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  • कर्म की परिसमाप्ति ज्ञान में और कर्म का मूल भक्ति अथवा सम्पूर्ण आत्म-समर्पण में है।
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  • जहाँ देह है वहाँ कर्म तो है ही, उससे कोई मुक्त नहीं है। तथापि शरीर को प्रभुमंदिर बनाकर उसके द्वारा मुक्ति प्राप्त करनी चाहिए।
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  • अभाग्य से हमारा धन, नीचता से हमारा यश, मुसीबत से हमारा जोश, रोग से हमारा स्वास्थ्य, मृत्यु से हमारे मित्र हमसे छीने जा सकते है, किन्तु हमारे कर्म मृत्यु के बाद भी हमारा पीछा करेंगे।
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  • जैसे फूल और फल किसी की प्रेरणा के !!बिना ही अपने समय पर वृक्षों में लग जाते है, उसी प्रकार पहले के किये हुए कर्म भी अपने फल-भोग !के समय का उल्लंघन नहीं करते।
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  • खेल में हम सदा ईमानदारी का पल्ला! पकड़कर चलते है, पर अफ़सोस है कि कर्म में हम इस ओर ध्यान तक नहीं देते।
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  • जैसे तेल समाप्त हो जाने से दीपक बुझ जाता है, उसी प्रकार कर्म के क्षीण हो जाने पर दैव नष्ट हो जाता है।
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  • जो निष्काम कर्म की राह पर चलता है, उसे उसकी परवाह कब रहती है कि किसने उसका अहित साधन किया है।
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  • कर्मशील व्यक्ति के लिए हवाएँ मधु बहाती है, नदियों में मधु बहता है और ओषधियाँ मधुमय हो जाती है।
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  • कर्म ही मनुष्य के जीवन को पवित्र और अहिंसक बनाता है।
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  • जो निष्काम कर्म की राह पर चलता है, उसे उसकी परवाह कब रहती है कि किसने उसका अहित साधन किया है।
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  • कर्म ही मनुष्य के जीवन को पवित्र !और अहिंसक बनाता है।
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  • कर्मशील व्यक्ति के लिए हवाएँ!मधु बहाती है, नदियों में मधु बहता है और ओषधियाँ मधुमय हो जाती है।
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  • काम को आरम्भ करो और अगर काम शुरू कर दिया है, तो उसे पूरा करके ही छोड़ो।
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  • कर्मशील लोग शायद ही कभी उदास रहते हो। कर्मशीलता और उदासी दोनों साथ-साथ नहीं रहती है।
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  • कर्म वह आइना है, जो हमारा स्वरूप हमे दिखा देता है। अतः हमे कर्म का अहसानमंद होना चाहिए।
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  • इस धरती पर कर्म करते हुए सौ साल तक जीने की इच्छा रखो, क्योंकि कर्म करने वाला ही जीने का अधिकारी है। जो कर्मनिष्ठा छोड़कर भोगवृत्ति रखता है, वह मृत्यु का अधिकारी बनता है।
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  • कर्मठ इहलोक-परलोक का ध्यान कर कर्म नहीं! करता, वह तो बस क्रियारत रहता है।
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  • जो व्यक्ति छोटे-छोटे कर्मो को !भी ईमानदारी से करता है, वही बड़े कर्मो को भी ईमानदारी से कर सकता है।
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  • कर्मयोगी अपने लिए कुछ! करता ही नहीं। अपने लिए कुछ भी नहीं चाहता और अपना कुछ मानता भी नहीं। इसलिए उसमे कामनाओं का नाश सुगमता पूर्वक हो जाता है।
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  • तुम जो भी कर्म प्रेम और सेवा की भावना से करते हो, वह तुम्हे परमात्मा की ओर ले जाता है। जिस कर्म में घृणा छिपी होती है, वह प!रमात्मा से दूर ले जाता है।
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  • कर्म करना बहुत अच्छा है, पर वह विचारो से आता है, इसलिए अपने मस्तिष्क को उच्च विचारो एवं उच्चतम आदर्शो से भर लो, उन्हें रात-दिन अपने सामने रखो, उन्हीं में से महान कर्मो का जन्म होगा।
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  • इस संसार में कोई मनुष्य स्वभावतः किसी के लिए उदार, प्रिय या दुष्ट नहीं होता। अपने कर्म ही मनुष्य को संसार में गौरव अथवा पतन की ओर ले जाते है।
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  • कर्म हीं धर्म है, क्योंकि कर्म!हीन व्यक्ति को तो भगवान !भी कुछ नहीं देते हैं, चाहे वह उनकी कितनी हीं पूजा क्यों न कर ले.
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  • कर्म, ज्ञान और भक्ति- ये तीनों जहाँ मिलते हैं वहीं सर्वश्रेष्ठ पुरुषार्थ जन्म लेता है।
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  • अपने जीवन में हम जो कुछ कर पाते हैं ,वह कोई बड़ी बा!त नहीं ,जिसके लिए हम मगरुरी ले सकें ! क्योंकि जो कुछ हम करते हैं ,उसमे !हमारा क्या भाग है असल में कराने वाला तो खुदा है !
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  • जो काम कल करना है ,उसकी बातों में ही आज का काम बिगड़ जाएगा ! और आज के काम के बिना कल का काम नहीं होगा ! आज का काम कीजिये ,तो कल का काम अपने आप हो जाएगा !
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  • किसी भी कौम का विकास उस कौम की महिलाओं के विकास से मापा जाता हैं..
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  • एक व्यक्ति की अच्छी प्रतिष्ठा का निर्माण कई अच्छे कर्मों से होती है, और केवल एक बुरे कर्म से इसे खो देता है.
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  • इंसान तभी कुछ करता है जब वो !अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है , जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे.
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  • कार्य ही सफलता की बुनियाद है .
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  • इस तरह से कार्य करें !जैसे कि आप पहले से ही खुश हैं तथा इसके परिणामस्वरुप आप खुशी प्राप्त कर लेंगे.
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  • आप केवल कर्म करते जाइए ,उसके परिणामों पर ध्यान मत दीजिये..
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  • प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है.
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  • प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है, या, दो वस्तुओं के बीच परस्पर क्रियाएं हमेशा बराबर होती है, और इसकी दिशा बल की ओर होता है.
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  • काम कराने के लिये किया गया


  • सभ्यता की कहानी , सार रूप में , इंजिनीयरिंग की कहानी है – वह लम्बा और विकट संघर्ष जो प्रकृति की शक्तियो को मनुष्य के भले के लिये काम कराने के लिये किया गया ।
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  • जो अच्छा काम आप आज करेंगे, इसका फल आने वाली पीड़ियों को मिलेगा।
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  • तेज दिमाग वाला आदमी ही सबसे ज्यादा अच्छे काम और सबसे ज्यादा बुरे काम की योग्यता रखता है।
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  • एक औंस किया गया कार्य एक टन बात करने के बराबर है।
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  • काम से आपकी पहचान मिलती है


  • काम से आपकी पहचान मिलती है, आपसे काम की पहचान नहीं होती।


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  • सही काम करने के लिए समय हर व!क्त ही ठीक होता है।
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  • किसी काम को करने !से अगर आपको ख़ुशी का एहसास होता है तो आपका काम ठीक है। लेकिन किसी काम को करने में दर्द मिलता है तो आप निश्चित ही कुछ गलत कर रहे है।
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  • पैसा कमाने के लिए कई विकल्प हो सकते है, लेकिन जन्नत में जाने के लिए सिर्फ एक- अच्छे कर्म करना।
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  • जो व्यक्ति जैसा काम करता है, उसी से उनके विचारो का पता चलता है। क्योंकि जैसा आप सोचेंगे, वैसा ही काम करेंगे।
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  • प्रगति मृग-मरीचिका नहीं है। यह वास्तव में होती है, लेकिन इसका प्रक्रिया धीमी और निराश करने वाली होती है।
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  • Shikayat Karke Samishyaon Se Bacha Nahi Jaa Sakta Kintu Jimmedari Utha Kar Samishyaon Ko Kam Jarur Kiya Jaa Sakta Hai.
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  • Shreshtha Karyakarta Wah Hai Jiska Karya To Dikhe Par Karta Na Dikhe…!
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  • Kaam Aisa Karo Ki N!aam Ho Jaye Ya Phir…. Naam Aisa Karo Ki Sunte He Kaam Ho Jaye….!!
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  • कर्मो से ही पहचान होती हैं इंसानो की दुनिया में, अ!च्छे कपड़े तो बेजान पुतलों को भी पहनाये जाते है दुकानों में!
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  • ऐसे कार्य करें !जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है.
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  • उस काम का चयन कीजिये जिसे आ!प पसंद करते हों, फिर आप पूरी ज़िन्दगी एक दिन भी काम नहीं करंगे.
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  • एक औंस कार्य एक टन बात के बराबर है.
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  • मछली बढ़िया चारे से ढकी हुई लोहे की कांटी को लोभ में पड़कर निगल जाती है, उससे होने वाले परिणाम पर विचार नहीं करती।
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  • किसी प्रयोजन से किये गए कर्मों में पहले प्रयोजन को समझ लेना चाहिए। खूब सोच-विचार कर काम करना चाहिए, जल्दबाजी से किसी काम का आरम्भ नहीं करना चाहिए।
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  • जो अच्छे कर्म! करता है और बुरे कर्मों से दूर रहता है , साथ ही जो ईश्वर में भरोसा रखता है और श्रद्धालु है , उसके ये सद्गुण पंडित होने के! लक्षण हैं।
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  • पराक्रमशीलता, !राष्ट्रवादिता, पारदर्शिता, दूरदर्शिता, आध्यात्मिक, मानवता एवं विनयशीलता मेरी कार्यशैली के आदर्श हैं।
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  • निष्काम कर्म, कर्म का अभाव नहीं, कर्तृत्व के अहंकार का अभाव होता है।
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  • कर्म ही मेरा धर्म है। कर्म ही मेरि पूजा है।
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  • कर्म करना बहुत अच्छा है, पर वह विचारों से आता है…इसलिए अपने मस्तिष्क को उच्च विचारों और उच्चतम आदर्शों से भर लो, उन्हें रात-दिन अपने सामने रखो; उन्हीं में से महान कार्यों का जन्म होगा।
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  • कर्मों की ध्वनि सबसे ऊँची होती है।


  • जैसा बोएंगे वैसा ही पाएंगे।
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  • कुछ करने में पूर्वाग्रह है – चलिए अभी कुछ हो!ते हुए देखते हैं . आप उस बड़ी योजना को छोटे -छोटे चरणों में बाँट सकते हैं और पहला क!दम तुरंत ही उठा! सकते हैं .
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  • प्रभावी कार्रवाई हमेशा अन्यायपूर्ण होती है.
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  • सबसे छोटा कार्य सबसे महान इरादे से हमेशा बेहतर होता है .
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  • हमें सबसे अधिक महत्त्व का काम करने का प्रयास करना चाहिए।
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  • चाहे आप जितने पवित्र शब्द पढ़ लें या बोल लें, वो आपका क्या भला करेंगे जब तक आप उन्हें उपयोग में नहीं लाते?

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  • अगर तुम्हे नी!द नहीं आ रही , तो उठो और !कुछ करो , बजाये लेटे रहने और चिंता करने के. नीद की कमी नहीं, चिंता तुम्हे नुकसान पहुंचाती है
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  • आपके पास क्या !है,या आप क्या हैं,या आप क!हाँ हैं,या आप क्या कर रहे हैं, इन बातों से आप खुश या मायूस नहीं होते. आप किस बारे में सोचते हैं उससे होते हैं.
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  • लोग क्या सोचेंगे इस बात की चिंता करने की बजाये क्यों ना कुछ ऐसा करने में समय लगाएं जिसे प्राप्त करने पर लोग आपकी प्रशंशा करें.
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  • जब तक मैं स्वयं में आश्वस्त हूँ की किया गया काम सही काम है तब तक मुझे संतुष्टि रहती है.
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  • लक्ष्य की तरफ निर्देशित किया जाना चाहिए


  • कार्य के प्रभावी होने के लिए उसे स्पष्ठ लक्ष्य की तरफ निर्देशित किया जाना चाहिए.
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  • ज़िन्दगी तो अपने द!म पर ही जी जाती हे … दूसरो के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं .”

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  • बिना जोखिम कुछ नहीं मिलता. और जोखिम व!ही उठाते हैं जो साहसी होते हैं .

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  • क्रोध कभी बिना तर्क के नहीं होता , लेकिन क!भी -कभार ही एक अच्छे तर्क के साथ

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  • हम अपने शाशकों को नहीं बदल स!कते पर जिस तरह वो हम पे शाशन करते हैं उसे बदल सकते हैं.

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  • सहिष्णुता के अभ्या!स में, आपका शत्रु ही आपका सबसे अच्छा शिक्षक होता है.



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