bestgazal


  • मैं ना हिंदू ,ना सिक्ख ,ना मुसलमान हूँ
  • कोई मजहब नही मेरा फ़क़त इन्सान हूँ।

  • मुझे क्यूँ बांटते हो क़ौमों में ज़ुबानों में
  • मै सिर से पावँ तलक सिर्फ हिंदुस्तान हूँ।
  •  
  • वक़्त के इशारों से दुनिया चला करती है
  • तू भी मेहमान है मैं भी मेहमान हूँ।

  • तेरी नज़र में राह का एक दरख्त सही
  • न जाने कितने परिंदों का पर मकान हूँ ।

  • ज़म्हुरिअत है या बदनिज़ामी की नज़ीर 
  • ज़र्रा भी चीख़ कर कहता है आसमान हूँ ।

  • बग़ैर शहादत के आज़ादी कहाँ मिलती है 
  • आज भी मुल्क़ कराहता है लहूलुहान हूँ ।
  •  
  • वतन पे ईमान ला पहले बाद दावा करना 
  • कोई हिन्दू हूँ मैं सिख हूँ,या मुसलमान हूँ।
  •  
  • खुदाया सब्र का मेरे न और इम्तिहान लो 
  • अमन की लहरों में सिमटा हुआ उफान हूँ ।
  •  
  • जला मंदिर में तो आरती हो गया "दीपक"
  • रोशन हो मज्जिद में कहता है मैं अजान हूँ।






  • ख़ुद को सूरज कहने से कोई सूरज नहीं होता
  • जब तलक रौशनी न दे कोई सूरज नहीं होता

  • बड़े होके कहाँ जुगनू भला आफ़ताब बनते हैं 
  • रख कर तेवर गरम ज़र्रा कोई सूरज नहीं होता

  • गर्दिशों में चिराग़ टूटे सहारा देते मुफलिस को 
  • घनेरी रातों में नभ में कोई सूरज नहीं होता

  • सोचने में है क्या खुद को कोई चाहे ख़ुदा समझे 
  • नाम सूरज का रख लेने से कोई सूरज नहीं होता

  • उसूल है आसमां का इज़्ज़तें दो हर सितारे को 
  • तौहीन करके अँधेरों की कोई सूरज नहीं होता

  • बुराई की वज़ह से " दीपक" अच्छाई पूजती है 
  • गर ज़ुल्मत नहीं होती तो कोई सूरज नहीं होता







  • मसले रसोई के सड़कों पर क्यूँ लाते हो 
  • क्या फ़र्क पड़ता है आप क्या खाते हो।
  •  
  • सुर्खियाँ बनने की आदत हो गई है आपको 
  • बात इसलिए बेतुकी बेबात कह जाते हो।
  •  
  • गाय खाओ, सूअर खाओ मर्ज़ी है आपकी 
  • घर में खाओ सड़कों पे दंगे क्यूँ करवाते हो।
  •  
  • गोश्त खाना पाप नही पर नहीं सबाब भी 
  • ये हमें बतलाओ आप क्यूँ हमें बतलाते हो।
  •  
  • ज़ाहिलों की क़ब्र पर घास तक उगती नही 
  • फिर क्यूँ बेज़ा बोल कर ज़ाहिल कहलाते हो ।
  •  
  • कल हमामो-बारगाह के किस्से लेके आओगे 
  • संग किसके सोते हो संग किसे नहलाते हो ।
  •  
  • वक़्त गर कटता नहीं है तो मदरसों में जाइये 
  • बच्चों में तालीम बाँटिये क्यूँ भेजा खाते हो।
  •  
  • फिर कहोगे आप पर क्यूँ मुल्क़ सारा हँस रहा 
  • क्यूँ अपनी पोशाक पर ख़ुद रायता फैलाते हो।
  •  
  • एक ज़ुबाँ ही आदमी को अर्श तक ले जाती है 
  • और अर्श से फ़र्श पे एक लम्हे में आ जाते हो।
  •  
  • हम आपके हमदर्द है "दीपक" जलाते इसलिए 
  • पर आप हैं कि कह रहे क्यूँ रोशनी दिखलाते हो।







  • दिल की गीली ज़मीं पर ख्वाबों का बिस्तरा
  • खवाबों को मिल रहा जहाँ सिरे से एक सिरा
  •  

  • कोसो की दूरियां ख़तम हो गई लम्हात में
  • आँखों को मूँद अपनी किया तसव्वुर जो तेरा
  •  
  •  
  • महकता रहा तमाम दिन देख के ख्वाब एक
  • साये संग लिपटा आपके रात साया था मेरा
  •  

  • देखी गई है उस में ही में इंसानियत की लौ 
  • जो खुद बुझा दिया चिराग कह के सिरफिरा
  •  
  •  
  • चलने दो ज़रा हवा सब हो जायेंगे बेनकाब
  • पत्ते ज़र्द उड़ जायेंगे दरख्त रह जाएगा हरा
  •  
  •  
  • हमे आदत ये आपकी अच्छी नहीं लगती
  • गलती भी खुद की और फिर आंसू दिए गिरा
  •  

  • कोई भी नहीं जहाँ में समझा है तुझे "दीपक"
  • तन्हाई में दो बात तू चल ख़ुद से कर ज़रा








  • जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है
  • न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है
  •  
  • झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार देते हैं
  • सच कहते हैं तो बगा़वत कि बू आती है
  •  
  •  फ़र्क कुछ भी नहीं अमीरी और ग़रीबी में
  • अमीरी रोती है ग़रीबी मुस्कुराती है
  •  
  • अम्मा ! मुझे चाँद नही बस एक रोटी चाहिऐ
  • बिटिया ग़रीब की रह - रहकर बुदबुदाती है
  •  
  • 'दीपक' सो गई फुटपाथ पर थककर मेहनत
  • इधर नींद कि खा़तिर हवेली छ्टपटाती है






  • घर से निकलो तो ज़माने से छुपा कर निकलो ,
  • आहट हो ना ज़रा भी पावँ दबा कर निकलो.
  •  
  • लौट आयें ये खुदा फिर से वापस घर में
  • कही चलने से पहले अब ये दुआ कर निकलो .
  •  
  • राहें मकतल बनी हैं , तू बेकफ़न न रह जाए
  • इसलिए हाथ पे पता घर का लिखा कर निकलो .
  •  
  • अपने ही खून के हाथों में हैं खंज़र इसलिए
  • रोएगा कौन तुझ पे ,खुद को रूला कर निकलो .
  •  
  •  
  • ये दौर खून का हैं हवाओं में बह रहे नश्तर
  • घर के हर शख्स को सीने से लगा कर निकलो








  • Ab Siyasatdano ko nahi siyasat karni chahiye .
  • bas zismkhori ki saza faqat faansi honi chahiye.
  •  
  • Insaan jab banke darinda haiwaniyat pe aata utar,
  • sar- e- rah aese wahshiyon ki gardan katni chahiye.
  •  
  • Akhbaar ki surkhiyan bas banke rah jaate haadse,
  • akhbarnawiso anzam tak muhim poori honi chahiye.
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  • Zindagi aur maut ke darmiyan hawas ne chhodh diya.
  • aaj roshni bujhne se pahle ye kalikh mitni chahiye.
  •  
  • “Deepak“ shama jalaane se nahi insaaf mil sakega yahan,
  • In zismkhor muzrimo ki chita sar-e-aam jalni chahiye .








  • ख़ुद को सूरज कहने से कोई सूरज नहीं होता
  • जब तलक रौशनी न दे कोई सूरज नहीं होता
  •  
  • बड़े होकर भला जुगनू कहाँ आफ़ताब बनते हैं
  • गरम तेवर ज़र्रा रख के कोई सूरज नहीं होता
  •  
  • गर्दिशों में चिराग़ टूटे सहारा देते मुफलिस को
  • अंधियारी रातों में नभ में कोई सूरज नहीं होता
  •  
  • सोचने में है क्या खुद को कोई चाहे ख़ुदा समझे
  • नाम सूरज का रख लेने से कोई सूरज नहीं होता
  •  
  • उसूल है आसमां का इज्ज़तें दो हर सितारे को
  • अंधरों की तौहीन करके कोई सूरज नहीं होता
  •  
  • " दीपक" क्यूं बात इतनी सी नहीं जग समझता है
  • अगर होती नहीं यहाँ ज़ुल्मतें कोई सूरज नहीं होता






  • सामने कुछ पीछे कुछ और कहा करते हैं
  • इस शहर में बहुरूपिये रहा करते हैं ।
  •  
  • किसी तरह बस अपना भला हो जाए
  • इसी वजह लोग औरों का बुरा करते हैं ।
  •  
  • जिनके बस में नहीं होता बुलंदियाँ छुना
  • वो फिकरे औरों की फ़तह पर कसा करते हैं ।
  •  
  • ठोकर मत मार इन्हें ये अंधेरों में याद आयेंगे
  • सूरज छिप जाता है तो चिराग़ जला करते हैं ।
  •  
  • रौशनी जितना दबाओगे और बाहर आएगी
  • कहीं हाथों के घेरों से समंदर रुका करते हैं ।
  •  
  • खातिर अपनों के मत छीन ग़ैर बच्चों की खुशी
  • हर बच्चे के भीतर भगवान् बसा करतें हैं ।
  •  
  • एक अज़ब सा रिवाज़ है इस शहर में "दीपक"
  • लोग नशे से दवा , दवाओं से नशा करते हैं ।
  •  







  • Aankh risti hai to man ki jalan mit jati hai
  • Dukho'n ke shul nikal jaate thakan mit jati hai
  •  
  • Jane kaisa gazab ka jadu hai uske haathon me
  • Mujhe chu leti hai bitiya to thakan mit jati hai
  •  
  • Bahin ki aabru par kurbaaniya dastan ho gai
  • Hawas mein bhai ki ab to bahin mit jati hai
  •  
  • Majburiyo'n mein lakiren bhi ban jati jhurriyan
  • Khushiya aati hain to chehre ki shikan mit jati hai
  •  
  • Hawaye'n der talak chiragon ko zinda rakhti hain
  • Taaq par varna bahut jaldi agan mit jaati hai
  •  
  • Khatayen khud ki hon ya ho reeti - riwazon ki
  • Par saja mein kyon har baar dulhan mit jaati hai
  •  
  • Farishton ko is baat ka ahsaas nahi "DEEPAK"
  • Jyada aajmaishon se murid ki lagan mit jati hai
  •  






  • मेरी साँसों में यही दहशत समायी रहती है
  • मज़हब से कौमें बँटी तो वतन का क्या होगा ।


  • यूँ ही खिंचती रही दीवार ग़र दरम्यान दिल के
  • तो सोचो हश्र क्या कल घर के आँगन का होगा ।


  • जिस जगह की बुनियाद बशर की लाश पे ठहरे
  • वो कुछ भी हो लेकिन ख़ुदा का घर नहीं होगा ।


  • मज़हब के नाम पर कौ़में बनाने वालों सुन लो तुम
  • काम कोई दूसरा इससे ज़हाँ में बदतर नहीं होगा ।


  • मज़हब के नाम पर दंगे, सियासत के हुक्म पे फितन
  • यूँ ही चलते रहे तो सोचो , ज़रा अमन का क्या होगा ।


  • अहले -वतन इन शोलों के हाथों दामन न अपना दो
  • दामन - रेशमी है देख लो"दीपक "दामन का क्या होगा








  • याद चुभने लगी,
  • आँख रिसने लगी
  •  
  • उजड़ा एक आशिया ,
  • वो जब सजने लगी
  •  
  • जो माँ ने चूमा ज़रा
  • बिटिया हंसने लगी
  •  
  • मौत से जोड़ धागे
  • ज़िन्दगी बसने लगी
  •  
  • भूख सह न सकी
  • मछली फंसने लगी
  •  
  • खुद ही करके तबाह ,
  • दुनिया हंसने लगी ,
  •  
  • घिसते घिसते बासन
  • अम्मा घिंसने लगी
  •  
  • फल जब पक गया
  • डाली झुकने लगी
  •  
  • क़त्ल करते हो क्यों
  • परछाई डसने लगी
  •  
  • "दीपक" को मत बुझा
  • खुद बाती बुझने लगी







  • वो लोगों के दिल में रहता है
  • इसीलिए मुश्किल में रहता है .

  • जो मेरा नाम तलक नहीं लेता
  • वो मेरे मुस्तकबिल में रहता है .

  • उसको लहरों का खौफ़ ज्यादा है
  • जो बहुत दूर साहिल पे रहता है .


  • जहाँ पे रास्तें खुद हो गये मंज़िलें
  • ख़ुदा ऐसी ही मन्ज़िल में रहता है .


  • भाई दुश्मन की तरह मिलता हमसे
  • दुश्मन भाई सा मिल के रहता है।


  • "दीपक" वो सबको रौशनी देता है
  • चिराग़ वही महफ़िल में रहता है




  • उमर के साथ साथ किरदार बदलता रहा 
  • शख्सियत औरत ही रही ,प्यार बदलता रहा .

  • बेटी,बहिन,बीबी, कभी माँ , ना जाने क्या -क्या
  • चेहरा औरत का दहर हर बार बदलता रहा .

  • हालात ख्वादिनों के न सदी कोई बदल पाई 
  • बस सदियाँ गुज़रती रहीं ,संसार बदलता रहा .

  • प्यार ,चाहत ,इश्क ,राहत ,माशूक और हयात
  • मायने एक ही रहे ,मर्द बस बात बदलता रहा .

  • किसी का बार कोई इंसान नहीं उठा सकता यहाँ
  • पर कोंख में जिस्म पलकर आकार बदलता रहा .
  • सियासत ,बज़ारत,तिज़ारत या फिर कभी हुकूमत
  • औरत बिकती रही चुपचाप यह बाज़ार बदलता रहा .

  • कब तलक बातों से दिल बहलाओगे "दीपक ”तुम भी 
  • करार कोई दे ना सका बस करार बदलता रहा





  • सुनसान रात ,खामोश दिन , उजड़ी शामें 
  • उसकी आवाज़ सुनने को बे -करार हयात 
  • एक बेचैनी डसती रहती हैं लम्हा- लम्हा 
  • मौत आ जाए खुदा तो मिल जाए निजात .

  • आंख पथरीली होकर भी रोटी जाती हैं 
  • हर धड़कन के संग-संग चीखता है जिया 
  • लबों की खुश्की,हलक की रेगिस्तानी प्यास 
  • बढती जाती हैं पल-पल और झटपटाता हिया .

  • ताकता रहता हूँ खलाओ मे तुझमे खोकर 
  • बैठा रहता हूँ दीवानावार याद मे तेरी 
  • हवाओं मे सुनाई देती हैं आवाजें सबकी 
  • पर सुनाई देती नहीं मुझे सदायें तेरी .

  • कल तलक मैं तेरा अपना था तुम थी मेरी 
  • आज एक लम्हे मे हम हो गए अजनबी जैसे 
  • खवाब नज़रों में झिलमिलाते थे जो कल तक 
  • छिटक गए यूं आसमान में सितारें जैसे

  • मुझमे इतनी कमी थी क्यूँ कि मेरे साथ रहीं 
  • कियों साल-दर-साल गुजारे दीवाने के साथ 
  • मेरी चाहत में अब खुदगर्जी दिखाई देती हैं 
  • ज़िन्दगी के कई मुकाम गुज़र जाने के बाद .
  • मैं इसमें भी खुश हूँ क्यूँकि तुम खुश हो 
  • तुम शादाब रहो यही आरजू थी मेरी जान 
  • और जब भी कभी छा जाएँ आँधियारे बादल
  • याद कर लेना मुझे बेशक सोच एक अनजान

  • तुमने जो भी दिया उसका तहे दिल से शुक्रिया 
  • तेरी चाहत का ,मोहब्बत का बहुत-बहुत शुक्रिया 
  • अपने दामन मे साजोने का मुझे बेहद शुक्रिया 
  • अदना आदमी को बख्शी जो तुने इज्ज़त शुक्रिया .

  • चलो एक बात तो इस बात से पुख्ता हो गई 
  • किसी के बगैर कोई भी नहीं मरता हैं जहाँ मे
  • रिश्ते खुदगर्जी की आवाज़ सुना करते हैं यहाँ 
  • गैर हो जाते ही तल्खियां आ जाती हैं जुबां मे .






  • माफ़ कर दो आज देर हो गई आने में
  • वक़्त लग जाता है अपनों को समझाने में।

  • किरण के संग संग ज़माना उठ जाता है
  • .देखना पड़ता है मौका छुप के आने में ।

  • रूठ के ख़ुद को नहीं ,मुझको सजा देते हो
  • क्या मज़ा आता है यूं मुझको तड़पाने में ।

  • एक लम्हे में कोई भी बात बिगड़ जाती है
  • उम्र कट जाती है उलझन कोई सुलझाने में ।

  • तेरी ख़ुशबू से मेरे जिस्म "ओ"जान नशे में हैं
  • "दीपक" जाए भला फिर क्यों किसी मयखाने में ।






  • आँख बंद करके भला तमघन कैसे छट पायेंगे
  • उठने के लिये जगना होगा , वरना जग से उठ जायेंगे 
  • सिर्फ बातों से, कलम से और बे - सिला तर्कों - बहस से
  • बात तो हो जायेगी पर हासिल न कुछ कर पायेंगे 
  • नुक्ताचीनी , मगज़मारी , माथापच्ची , बहसबाज़ी
  • जिस दिन करना छोड़ देंगे नये रास्ते खुल जायेंगे 
  • ऐसी कोई मुश्किल नहीं , जिसका बशर पे तोड़ न हो
  • जब तोडना ही चाहेंगे तो कैसे मन जुड़ पायेंगे 
  • "दीपक" कैसे कह दिया सच अब तेरा हाफिज़ खुदा
  • तू अँगुलियों की बात न कर हाथ तक उठ जायेंगे








  • मेरी सांसों में यही दहशत समाई रहती है
  • मज़हब से कौमें बँटी तो वतन का क्या होगा।
  • यूँ ही खिंचती रही दीवार ग़र दरम्यान दिल के
  • तो सोचो हश्र क्या कल घर के आँगन का होगा।
  • जिस जगह की बुनियाद बशर की लाश पर ठहरे
  • वो कुछ भी हो लेकिन ख़ुदा का घर नहीं होगा।
  • मज़हब के नाम पर कौ़में बनाने वालों सुन लो तुम
  • काम कोई दूसरा इससे ज़हाँ में बदतर नहीं होगा।
  • मज़हब के नाम पर दंगे, सियासत के हुक्म पे फितन
  • यूँ ही चलते रहे तो सोचो, ज़रा अमन का क्या होगा।
  • अहले-वतन शोलों के हाथों दामन न अपना दो
  • दामन रेशमी है "दीपक" फिर दामन का क्या होगा।






  • बात वस इतनी सी थी कि मुझे छोड़ गये,

  • मुझे छोड़ा और मेरा ये शहर ही छोड़ गये |

  • शीशे के घरों में रहता था शीशा तो नहीं था मैं,

  • पत्थर से तोड़ा घर और पत्थर ही छोड़ गये |

  • दरिया किनारे बस्ती थी पानी को तरसता था,

  • सैलाब बढ़ा घर तक और लहर ही छोड़ गये |

  • डूबी बस्ती-घर-छप्पर उस संग तैरता था,

  • आये जो- राहत देने और कहर ही छोड़ गये |

  • आस्थाएं- कहाँ गयीं जिन्हें पूजता था “गौतम”,

  • जिन्दगी देके पीने को और जहर ही छोड़ गये |

  • हाथों की लकीरों को फकीर बलवान बताता था,

  • खुद फकीर मेरे पीर भी और भंवर ही छोड़ गये





  • मालिक ये कुफ्र मुझसे कैसा हो गया
  • नाम ले के तेरा किसी और में खो गया

  • झुका था तो सजदे में मैं तेरे ही फ़क़त
  • अंदाज़ जाने क्यूं आशिकाना हो गया

  • वुजू तक ही तो था आब और मेरा साथ
  • एक याद का बादल मुझे सरापा धो गया

  • नासेह को तो डूब के ही सुन रहा था मैं
  • कोई दामन याद आया और मैं सो गया

  • बाम पे तो मैं बस तलाश रहा था चाँद
  • दिखा कोई और वहम ईद का हो गया

  • यूं बेशुमार दर्द मेरी दास्ताँ में छिपा था
  • जब बुत को सुनाया तो वो भी रो गया





  • चश्मे-नम, लब की हाय ओ कलम का दर्द
  • कितने मेहबूब मरहले ग़ज़ल ने पाए हैं

  • फ़रिश्ते बाँट रहे थे जिधर तमाम खुशियाँ
  • वहाँ से हम तेरी जुस्तजू मांग लाए हैं

  • यकीनन किसी गरीब की बेटी जवां हुई है
  • बेवक्त काले बादल ऐसे ही नहीं छाए हैं

  • लोरी सुना सुलाता हूँ उन्हें बच्चों की तरह
  • तुझसे मिले ज़ख्म कुछ यूं अपनाए हैं

  • पिला के पानी ओ सुना के रोटी की दास्ताँ
  • भूखे बच्चों को सुलाती मजबूर माएँ हैं

  • खुद फ़रिश्ते लेते हैं उनके कदमों का बोसा
  • तेरे कूचे से हो कर दार को जो जाए हैं




  • इन्साफ जो मिल जाय तो दावत की बात कर
  • मुंसिफ के सामने न रियायत की बात कर
  •  

  • तूने किया है जो भी हमें कुछ गिला नहीं
  • ऐ यार अब तो दिल से मुहब्बत की बात कर

  •  
  •  
  • गर खैर चाहता है तो बच्चों को भी पढ़ा
  • आलिम के सामने न जहालत की बात कर

  •  
  •  
  • अपने ही छोड़ देते तो गैरों से क्या गिला
  • सब हैं यहाँ ज़हीन सलामत की बात कर

  •  
  •  
  • 'अम्बर' भी आज प्यार की धरती पे आ बसा
  • जुल्मो सितम को भूल के जन्नत की बात कर







  • साथ कोई न होगा न तन जायगा,
  • मन अकेला चला छोड़ धन जायगा.
  •  
  • मन हमारे तुम्हारे मनन कर रहे,
  • साथ क्या ढाई गज का कफ़न जाएगा.
  •  
  • सुर समर्पित सुकोमल सृजन को करो,
  • प्रीति का पर्व मन में ही मन जायगा.
  •  
  • लोग मिलते बिछड़ते रहेंगें सदा,
  • आप होगें युवा बालपन जायगा.
  •  
  • आस में अधखुले जो अधर हैं तेरे,
  • प्यास उनकी बुझा कर ये घन जायगा.
  •  
  • चार दिन चाँदनी बन के जो तुम रहो,
  • चौथ का चाँद पूनम का बन जायगा.
  •  
  • मेघ 'अम्बर' मुदित मन बरसने लगे,
  • एक तन-मन बने खिल सुमन जायगा.






  • आज फिर रंगों हमें अनंग की तरह,
  • मन अधीर हो रहा विहंग की तरह |
  •  
  • रंग की फुहार आज रंग डालती,
  • बालपन में छा गयी उमंग की तरह |
  •  
  • नैन तक झुके है नेह स्वप्न देखकर,
  • काश वो हों सामने तरंग की तरह |
  •  
  • केमिकल से रंग आज खेलना नहीं,
  • साथ छोड़ दो सदा कुसंग की तरह |
  •  
  • प्यार से हमें यहाँ लगा लिया गले,
  • गा रहा है आज मन मलंग की तरह |
  •  
  • मुस्कुराहटें सभी हैं प्रीति से खिलीं
  • साज बज रहे सभी मृदंग की तरह |
  •  
  • दन्त पंक्ति खिल उठी ज्यों श्वेत हो लड़ी,
  • मेघ मध्य दामिनी प्रसंग की तरह |
  •  
  • रंग से चुरा लिए हैं रंग आज ही,
  • बिन पिए ही चढ़ गये है भंग की तरह |
  •  
  • रंग की रंगीली नेह डोर थाम के,
  • उड़ चला है आज मन पतंग की तरह |
  •  
  • रंग भंग आज वो जो देख लें हमे,
  • जिन्दगी हो मित्र एक जंग की तरह |
  •  
  • शोहदे भी रंग डाल गाल मल रहे,
  • क्यों समाज हो गया अपंग की तरह ?
  •  
  • हो गणेश ऋद्धि सिद्धि बुद्धि की कृपा,
  • शुभ सुगंध विश्व में कुरंग की तरह |
  •  
  • 'अम्बरीष' साजना का साथ ही मिले,
  • अब नहीं दिखे कोई भुजंग की तरह 








  • चाँद पूनम का हूँ शुभ सवेरा हूँ मैं,
  • ख़्वाब बसते जहाँ वह बसेरा हूँ मैं.
  •  
  • गम के बादल छँटें नूर बरसे यहाँ,
  • वक्त बेहतर बने एक फेरा हूँ मैं.
  •  
  • करके सज़दा उसे रंग भरूं प्यार के,
  • काम रब का ही है बस चितेरा हूँ मैं.
  •  
  • चाँदनी तुम बनो तो ये चमके जहां,
  • नीर नीरद का हूँ घन घनेरा हूँ मैं.
  •  
  • प्यार करते ही रहना जमीं बन प्रिये,
  • मुझको 'अम्बर' कहो सिर्फ तेरा हूँ मैं.





  • आँखों में आँख डाल रहे जो गुमान की,
  • यारों है उनको फिक्र जमीं आसमान की.
  • जिंदादिली का राज कलेजे में है छिपा,
  • खुद पे है ऐतबार खुशी है जहान की.
  • आयी जो मस्त याद चली झूमती हवा,
  • नज़रें मिली तो तीर चले बात आन की.
  • घायल हुए जो ताज दिखा संगमरमरी,
  • आई है यार आज घड़ी इम्तहान की.
  • आखिर वही हुआ जो लगी इश्क की झड़ी,
  • कुरबां वतन पे आज हुई जां जवान की.





  • आज फिर रंगों हमें अनंग की तरह,
  • मन अधीर हो रहा विहंग की तरह |
  • रंग की फुहार आज रंग डालती,
  • बालपन में छा गयी उमंग की तरह |
  • नैन तक झुके है नेह स्वप्न देखकर,
  • काश वो हों सामने तरंग की तरह |
  • केमिकल से रंग आज खेलना नहीं,
  • साथ छोड़ दो सदा कुसंग की तरह |
  • प्यार से हमें यहाँ लगा लिया गले,
  • गा रहा है आज मन मलंग की तरह |
  • मुस्कुराहटें सभी हैं प्रीति से खिलीं
  • साज बज रहे सभी मृदंग की तरह |
  • दन्त पंक्ति खिल उठी ज्यों श्वेत हो लड़ी,
  • मेघ मध्य दामिनी प्रसंग की तरह |
  • रंग से चुरा लिए हैं रंग आज ही,
  • बिन पिए ही चढ़ गये है भंग की तरह |
  • रंग की रंगीली नेह डोर थाम के,
  • उड़ चला है आज मन पतंग की तरह |
  • अपने-अपने साजना का साथ ही मिले,
  • अब नहीं दिखे कोई भुजंग की तरह |







  • बिना सोंचे बिना जाने जो मनमाना कराया है
  • जरा अंजाम तो देखो हमें रुसवा कराया है.
  • कटारी पीठ पीछे है जुबां मीठी शहद घोले,
  • दगा दे वक्त पर सबको सही धंधा कराया है.
  • नजर है ढूंढती उनको जो छिपते थे निगाहों से,
  • मिला बेबाक जब साकी तो छुटकारा कराया है.
  • तुम्हारी दोस्ती से तो है अपनी दुश्मनी अच्छी,
  • इन्हीं नादानियों से हारकर सौदा कराया है.
  • हजारों दर्द सहकर भी जुबां खामोश थी लेकिन ,
  • ज़रा सी जिद ने इस आँगन का बंटवारा कराया है.




  • दोस्ती की आज कसमें खा रहा संसार है
  • मुफलिसी में साथ दे जो वो ही अपना यार है.
  • दुश्मनी फिर भी भली ना दोस्ती नादान की,
  • जान पायेगा नहीं वो कब बना हथियार है.
  • तंगदिल से दोस्ती यारों कभी होती नहीं,
  • दोस्ती में दिल खुला हो प्रीति की दरकार है.
  • रूप अपना किसने देखा किसने जाना दोस्तों,
  • दोस्ती कर आईने से आइना तैयार है.
  • हम समझते थे वहां हैं यार यारों के हमीं,
  • अब यहां पर जान पाये वाकई क्या प्यार है.





  • है रंगों की दुनिया रंगीली-रंगीली,
  • गुलाबी रुपहली हरी और नीली|

  • शरम से गुलाबी गुलालों का रंग भी,
  • है मौसम सुहाना करो ना ठिठोली|
  • न जाओ पिया छोड़कर आज हमको
  • लरजते हैं आँसू हुई मंद बोली |

  • सजी सामने प्रीति रंगों की दुनिया,
  • दिलों में बसी है ये रंगीन होली,

  • दुखिया का रंग भी बने आज सुखिया,
  • बुलायें हमें ये दुकानें सजीली|

  • जी चाहता है उठा लें सभी रंग,
  • मँहगा बड़ा है हुई जेब ढीली |

  • सुना है प्रिये हो गए रंग घातक,
  • मिलें हैं रसायन भिगोना न चोली |

  • वनों में बिहँसते खिले लाल टेसू ,
  • उन्हीं से रंगें हम अपनी भी टोली |

  • सुनहरा बदन आज हल्दी लगा लो ,
  • मिलन सार्थक जब हथेली हो पीली|






  • देश के कण कण से औ’ जन जन से मुझको प्यार है
  • देह न्यौछावर हैं इस पर आत्मा बलिहार है,
  • शुक्रिया प्रभु आज तेरा जन्म पाया है यहाँ
  • प्रीति के बंधन यहाँ पर कर्म का अधिकार है
  • आओ दे दें हाथ में हर एक बच्चे के कलम
  • मुश्किलों में साथ देती हर कलम तलवार है,
  • दुश्मनी को दूर रखना दोस्ती दिल में रहे
  • दूरियां दिल की मिटाने आ गया किरदार है,
  • खूबसूरत ये धरा है आओ सींचें प्यार से
  • इन्द्रधनुषी रंग इसके बाग वन श्रृंगार है,
  • जाति मज़हब भूलकर हम सबको अपना मान लें
  • धर्म अब इंसानियत हो प्रीति की दरकार है,
  • आओ नेताओं से पूछें आत्मा उनकी कहाँ
  • बेचने को क्या बचा है कौन सा व्यापार है,
  • देश बाँटा प्रांत बाँटे बाँट डाले घर सभी
  • बाँटकर अब राज ना कर दोमुखी सरकार है,
  • हाथ में अब शिव धनुष है लाल आँखें हो गईं,
  • दूर कर आतंक जग से कह रही टंकार है.
  • आओ चुन लें राह ऐसी देश सेवा में रहें
  • ये तिरंगा ही कफ़न हो स्वप्न यह साकार है,
  • मान अब घटने न पाये शान बढ़ती ही रहे
  • देख आया पास अब गणतंत्र का त्यौहार है,





  • काम जो भी हो निराला कीजिये,
  • ज्ञान से जग में उजाला कीजिये.

  • कोई भी गमला न खाली अब रहे,
  • नित नए पौधों को डाला कीजिये.

  • चाहते है खाद पानी रोशनी,
  • प्यार से हमको संभाला कीजिये.

  • जिस तरह बच्चे हैं पाले आपने,
  • उस तरह पौधों को पाला कीजिये.

  • दोस्त हैं हम ही तुम्हारे काम के,
  • दुश्मनी का अब दिवाला कीजिये.







  • काया यह दीपक बने मिले प्रीति का तेल.
  • अपनेपन की ज्योति से आपस में हो मेल..

  • चाहत बाती-तेल की जले ज्योति भरपूर.
  • एक संग मिलकर अमर अंधकार हो दूर..

  • जलती बाती प्रेम की करें हवाएं खेल.
  • आँचल से रक्षा करें भरें नेह का तेल..

  • बहुतेरे मज़हब मिले चले बहुत से धर्म.
  • सबमें दीपक ज्योति ही सत्य यही है मर्म..

  • ज्योति बिना दीपक विफ़ल यह शरीर बिन प्राण.

  • बिन प्रकाश मिथ्या जगत नहीं विश्व कल्याण..

  • सारे मिलकर संग रहें सबमें उपजे प्यार.

  • आलोकित जग को करे दीवाली त्यौहार..






  • दर्द आँखों से बहाने निकले
  • गम उसे अपने सुनाने निकले।

  • रंज़ में हम से हुआ है ये भी
  • आशियां अपना जलाने निकले।

  • गर्दिशें भूल गये थे फिर भी
  • रोज रोने के बहाने निकले।

  • मुँह पर ओढ नकाब नये वो
  • जो जलाया था, बुझाने निकले।

  • यूँ न खूबी न दिलेरी हम मे
  • फिर भी क्यों शर्त लगाने निकले।

  • प्‍यार क्‍या है नहीं जाना लेकिन
  • सारी दुनिया को बताने निकले।

  • तुमने रिश्‍ता न निभाया कोई
  • याद फिर किस को दिलाने निकले।

  • झूम कर यूँ कभी उमडे बादल
  • ज्‍यूँ धरा कोई सजाने निकले।

  • कौन है दुख न जिसे कोई हो
  • आप फिर किसको सुनाने निकले।

  • पाप की गँध लिये दिल मे हम
  • क्‍यूँ त्रिवेणी पे नहाने निकले।





  • न तो रिश्ते न दोस्त ही कोई मेरा मिला मुझ को
  • अगर्चे कुछ मिला तो दर्द बस तेरा मिला मुझ को

  • रहे तालिब सदा तेरे दीदारे नूर के जानम
  • न तू आया न कोई भी पता तेरा मिला मुझ को

  • वफा को ही मिले धोखा,बता ऐसी रवायत क्यों
  • मै हैराँ हूँ उजाले मे भी अंधेरा मिला मुझ को

  • सदा जीते रहे मर मर के भी यारो ख्यालों मे
  • मिलाये तोहफा जो गम तेरा मिला मुझ को

  • हजारों रोनकें होती रहें होते रहें उत्सव
  • उजडता सा सदा मेरा यहाँ डेरा मिला मुझ को

  • करे कोई गिला तो क्या बताओ तो सही निर्मल
  • मुहब्बत मे बना बन कर खुदा मेरा मिला मुझ को।

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