Character Quotes in Hindi Status


  • अपवित्र विचारों से एक व्यक्ति को चरित्रहीन बनाया जा सकता है, तो शुद्ध सात्विक एवं पवित्र विचारों से उसे संस्कारवान भी बनाया जा सकता है।
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  • जिम में मिले शारीरिक बाधा और जीवन में मिली शारीरिक बाधाएं जिससे आप लड़ते हो से ही आपके मजबूत चरित्र का निर्माण होता है.
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  • हमेशा चरित्र आदमी को बनाता है. न कि परिस्थितियां.
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  • चरित्र का निर्माण तब नहीं होता जब बच्चा पैदा होता है,बल्कि यह तो बच्चा पैदा होने के सौ साल पहले से शुरू हो जाता है।
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  • महान और उदात्त चरित्र बनाने का एक ही उपाय है कि तुम एक महान और उदात्त आदर्श के अनुरूप जीवन बीताओ।
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  • अपने आत्मविश्वास और चरित्र के बल पर एक साधन रहित व्यक्ति भी महान सफलता प्राप्त कर सकता है..
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  • जब आप अपने मित्रों का चयन करते हैं तो चरित्र के स्थान पर व्यक्तित्व को न चुनें।
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  • एक व्यक्ति संत है या चोर, इस बात का पता उसके बोलते ही चल जाता है क्योंकि अंदर का छुपा चरित्र मुहँ के रस्ते बाहर निकल आता है।
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  • पुष्‍प की सुगंध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती, लेकिन मानव के सद्गुण की महक सब ओर फैल जाती है।
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  • चरित्र और किस्मत एक ही सिक्के की दो साइड की तरह है।
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  • जैसा हम चाहेंगे, वैसा ही हमारा चरित्र बनता चला जाएगा।
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  • हम दुनिया में मौजूद हर चीज सीखने नहीं आये है। लेकिन उन चीजो जानकारी होना जरूरी है जिनसे हमारे चरित्र और व्यवहार का निर्माण होगा।
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  • किसी आदमी का असली चरित्र तब सामने आता है जब वो नशे में होता है।
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  • चरित्र का विकास आसानी से नहीं किया जा सकता. केवल परिक्षण और पीड़ा के अनुभव से आत्मा को मजबूत, महत्त्वाकांक्षा को प्रेरित, और सफलता को हासिल किया जा सकता है.
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  • Pratibha Ka Vikash Shant Vatavarn Main Hota Hai.. Aur Charitra Ka Vikash Manav Jeevan Ke Tej Prvaah Main..!!
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  • रोज़ दर्पण में अपना चेहरा देखते वक़्त अपने चरित्र को भी देखने का प्रयत्न करें।
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  • अपने व्यक्तित्व को सुसंस्कारित एवं चरित्र को परिष्कृत बनाने वाले साधक को गायत्री महाशक्ति मातृवत् संरक्षण प्रदान करती है।

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  • अपवित्र विचारों से एक व्यक्ति को चरित्रहीन बनाया जा सकता है, तो शुध्द सात्विक एवं पवित्र विचारों से उसे संस्कारवान भी बनाया जा सकता है।
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  • विचारवान व संस्कारवान ही अमीर व महान है तथा विचारहीन ही कंगाल व दरिद्र है।
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  • वह आदमी चंडाल है जो एक दूर से अचानक आये हुए थके मांदे अतिथि को आदर सत्कार दिए बिना रात्रि का भोजन खुद खाता है.
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  • चरित्र एक पेड़ की तरह है और इज़्ज़त एक परछाई की तरह है. हम परछाई के बारे में सोचते हैं; जबकि पेड़ असली विषय है
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  • किसी आदमी का असली चरित्र तब सामने आता है जब वो नशे में होता है .
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  • ज्ञान आपको शक्ति देगा ,लेकिन चरित्र सम्मान देगा।
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  • चरित्र का विकास आसानी से नहीं किया जा सकता. केवल परिक्षण और पीड़ा के अनुभव से आत्मा को मजबूत, महत्त्वाकांक्षा को प्रेरित, और सफलता को हासिल किया जा सकता है.
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  • कष्ट सह कर ही सबसे मजबूत लोग निर्मित होते हैं ; सबसे महान चरित्रों पर घाव के निशान होते हैं।
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  • देश इंसानों की तरह होते हैं, उनका विकास मानवीय चरित्र से होता है.
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  • चरित्र का निर्माण तब नहीं शुरू होता जब बच्चा पैदा होता है; ये बच्चे के पैदा होने के सौ साल पहले से शुरू हो जाता है.
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  • सबसे गर्मजोशी वाले प्यार का सबसे ठंडा अंत होता है।
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  • व्यक्तित्व सुनने या देखने से नहीं बनता, मेहनत और काम करने से बनता है।
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  • चेहरा ह्रदय का प्रतिबिम्ब है |
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  • एक अच्छे चरित्र का निर्माण हज़ारों बार ठोकर खाने के बाद ही होता है।
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  • दुर्बल चरित्र का व्यक्ति उस सरकंडे जैसा है जो हवा के हर झौंके पर झुक जाता है।
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  • कठिनाइयों को जीतने, वासनाओ का दमन करने और दुखों को सहन करने से चरित्र उच्च सुदृढ़ और निर्मल होता है।
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  • स्वास की क्रिया के सामन हमारे चरित्र में एक ऐसी सहज क्षमता होनी चाहिए जिसके बल पर जो कुछ प्राप्य है वह अनायास ग्रहण कर लें और जो त्याज्य है वह बिना क्षोभ के त्याग सकें।
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  • चरित्र के बिना ज्ञान बुराई की ताकत बन जाता है, जैसे कि दुनिया के कितने ही ‘चालाक चोरों’ और ‘भले मानुष बदमाशों’ के उदाहरण से स्पष्ट है।
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  • यश उसके बाहर


  • समाज के प्रचलित विधि विधानों के उल्लंघन केवल चरित्र~बल पर ही सहन किया जा सकता है। शरतचंद्र चरित्र मनुष्य के अन्दर रहता है, यश उसके बाहर।
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  • व्यवहार वह दर्पण है, जिसमें प्रत्ये़क का प्रतिबिम्ब देखा जा सकता है |
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  • अच्छा स्वभाव, सोंदर्य के अभाव को पूरा कर देता है |
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  • रसंयम औ श्रम मानव के! दो सर्वोत्तम चिकित्सक हैं |
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  • चरित्र की शुद्धि ही सा!रे ज्ञान का ध्येय होनी चाहिए |
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  • वृक्ष, सरोवर, सज्जन और मेघ-ये चारों परमार्थ हेतु देह धारण करते हैं |
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  • आत्म निर्भरता सद् व्यवहार की आधारशिला है |
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  • बहता पानी और रमता जोगी ही शुद्ध रहते हैं |
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  • जो मानव अपने अवगुण और दूसरों के !गुण देखता है, वही महान व्यक्ति बन सकता है |
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  • अपकीर्ति अमर है, जब कोई उसे मृ!तक समझता है, तब भी वह जीवित रहती है
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  • अपने चारित्रिक सुधार का आ!र्किटेक्ट खुद को बनना होगा |
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  • चरित्रवान व्यक्ति अपने पद और शक्ति का अनुचित लाभ नहीं उठाते |
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  • अपकीर्ति दण्ड में नहीं, अपितु अपराध में है |
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  • जैसे आचरण की तुम दूसरों से !अपेक्षा रखते हो, वैसा ही आचरण तुम दूसरों के प्रति करो |
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  • सुन्दर आचरण, सुन्दर दे!ह से अच्छा है |
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  • आचरण अच्छा हो तो मन !में अच्छे विचार ही आते हैं।
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  • बुद्धि के साथ सरलता, न!म्रता तथा विनय के योग से ही सच्चा चरित्र बनता है|
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  • किसी व्यक्ति के चरित्र को उसके द्वारा प्रयुक्त विशेषणों से जाना जा सकता है |
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  • चरित्र एक वृक्ष है, मान एक छाया। हम हमेशा छाया की सोचते हैं, लेकिन असलियत तो वृक्ष ही है।


  • हमारी दुनिया को सबसे ज़्यादा एक नए नैति!क ढांचे की दरकार है |
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  • अच्छी आदतों से शक्ति की बचत होती है, अव!गुण से बर्बादी |
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  • तुम बर्फ के समान विशुद्ध रहो और हिम के! समान स्थिर तो भी लोक निन्दा से नहीं बच पाओगे |
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  • बुद्धिमान व्यक्तियों की प्रशंसा की! जाती है, धनवान व्यक्तियों से ईर्ष्या की जाती है, बलशाली व्यक्तियों से डरा जाता है लेकिन विश्वास केवल चरित्रवान व्यक्तियों पर ही किया जाता है |
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  • विचार से कर्म की उत्पत्ति हो!ती है, कर्म से आदत की उत्पत्ति होती है, आदत से चरित्र की उत्पत्ति होती है और चरित्र से आपके प्रारब्ध की उत्पत्ति होती है.
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  • चरित्र का पता जो आप के लिए कुछ नहीं कर सकते उनके प्रति आपके व्यवहार से चलता है।

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