gazals hindi font best new


  • जब भी मैं बोलता हूँ 
  • हर शब्द तौलता हूँ .

  • ये बात और है कि-
  • भीतर से खौलता हूँ .
  •  
  • बोलो तुम्हें यकीं हैं -
  • क्या झूठ बोलता हूँ ?
  •  
  • सस्ते में क्यों बिकूँ मैं -
  • पर प्रीत मोल का हूँ !!

  • जब भी खौलता मैं हूँ 
  • शप्तक में बोलता हूँ




  • मेरे उससे बहुत से वायदे हैं ...
  • मेरे जीने के खुद कुछ कायदे हैं .
  •  
  •  
  • न वज़ू करता न इबादत ही -
  • उसकी यारी से बड़े फायदे हैं .
  •  
  •  
  • आज हूँ कल मैं चला जाउंगा –
  • ज़िन्दगी के भी तो कुछ कायदे हैं .
  •  
  •  
  • रोज़ लिखता हूँ हाले दिल अपना
  • ग़म से मुझको तो फायदे हैं .
  •  
  •  
  • पीर पीता है मुकुल हंसते हंसते -
  • तुम समझते हो मुझको फायदे हैं
  •  




  • ज्योति मन की दे जगा माँ शारदे
  • ग्यान प्रकाश से सजा माँ शारदे
  • ♚♚♚♚♚♚♚♚♚♚♚
  • पाप द्वेष की आँधी को मिटा दे
  • प्रेम का दीप दे जला माँ शारदे
  • ♚♚♚♚♚♚♚♚♚♚♚
  • आए सरस्वती माँ सबके द्वार पे
  • सूनी कोख को दे भरा माँ शारदे
  • ♚♚♚♚♚♚♚♚♚♚♚
  • धारण करे पीत परिधान सभी जन
  • प्यार के बौरों को उगा माँ शारदे
  • ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
  • फूल सरसों के खिले हर द्वारे
  • रास्ता कोई दो दिखा माँ शारदे
  • ☀☀☀☀☀☀☀☀☀☀
  • आज मुझ को दे एक वरदान माँ
  • राह से न कभी दे डिगा माँ शारदे
  • ♿♿♿♿♿♿♿♿♿♿
  • ताप मन का मेरा हो जाए दूर माँ
  • कोई ऐसी मुझे दे हवा माँ शारदे
  • ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
  • तू सुरों की देवी वीणापाणिनी माँ
  • वाद्य को सुरों से दे भरा माँ शारदे
  • ♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻
  • आ गयी दिलों में कटुता सभी के
  • दूर हो ,ओषधि दे दिला माँ शारदे
  • ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
  • पालते है अँधेरे हम अपने ही लिए
  • दूर हो जाए सूरज दे बुला माँ शारदे
  • ♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻
  • पकड़ ना चले उँगली एक दूसरे की
  • सभी मे विश्वास दे जगा माँ शारदे
  • ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
  • बात को हर सच्चा सच्चा मैं लिखूँ
  • लेखनी कोई मुझे दे मँगा माँ �शारदे




  • आज खेलती है कूदती है गजल
  • इसलिए बिंदास दिखती है गजल
  •  
  • तन्हाई में भी दूर चली जाती गजल
  • याद उनकी फिर से जगाती है गजल
  •  
  • हो गयी है रात अब सोने भी दो
  • आज बेहिसाब क्यूं थकी हुई है गजल
  •  
  • गीत प्यार का गुनगुनाने लगी गजल
  • गैर को अपना बनाने लगी है गजल
  •  
  • बेबफा से हुई हमदर्दी अनजाने में
  • इसलिये तो सँवरने लगी है गजल
  •  
  • हो खफा , जाओ न रूठ के वहाँ
  • जिस्म से जिस्म को मिलाती है गजल
  •  
  • फासले जो बीच में दीवार के
  • दूर उनको गिरा ढहाती है गजल
  •  
  • रूठ ना जाओ , चले आओ वापस
  • फिर तुझे प्यार से बुलाती है गजल
  •  
  • है मुहब्बत गजल को जान बूझ के
  • इसलिए तो गले से लगाती है गजल
  •  
  • आँख से आँसू गिर रहे बन बारिशें
  • लगता है जोर से रोयी है गजल
  •  
  • जिन्दगी हो जाए बोझ से बेदर्द जब
  • एक अनोखा ढंग सिखलाती है गजल
  •  
  • लाल पीली हो रही है क्यों गजल
  • खेल के खेल किसी से आई है गजल
  •  
  • मौत के बाद भी बाकी रह जाती यादें
  • इसलिए दरिया मे आग लगाती है गजल




  • मेरी दुनियाँ जिसने लूटी होगी
  • बाप की संतान अभागी होगी
  •  
  • प्रेम जोड़ता सब सरहदें
  • बात सुलह की आई होगी
  •  
  • भूल गया हूँ अपने को मैं
  • कोई सीख उसने दी होगी
  •  
  • पानी सी पीर हो गई तेरी
  • कोई दवा तूने पी ही होगी
  •  
  • जख्म हुए दिल में क्यूं इतने
  • कोई बात तो तुझे लगी होगी
  •  
  • बात कैसे बनी उनकी हँस के
  • कोई तो मजबूरी रही होगी
  •  
  • प्रेम जोड़ता सब सरहदें
  • बात सुलह की आई होगी
  •  
  • मेरा अन्तस रूठा है आज
  • शब्दों में कुछ रही कमी होगी




  • मैं आह, तुम श्वास मेरा बन जाओ
  • जीवन के सुन्दरतम राग में प्यार तुम मेरा बन जाओ
  •  
  • मैं सौन्दर्य , तुम आयना मेरा कह लाओ
  • भावों की गहराई में उतर मन की थाह तुम नाप आओ
  •  
  • मैं प्यास, तुम सावन मेरा बन बह जाओ
  • अपने छोटेछोटे पंखों से आकाश में तुम उड पाओ
  •  
  • मैं अंगराई, तुम आलिंगन मेरा इतराओ
  • चुन चुन कर अन्तस के सुकोमल फूलों को तोड लाओ




  • रूह एक दिन बदन से निकल जायेगी
  • बस यूँ ही तकदीर सभल जायेगी
  •  
  • किरण आसमा बन लपट जलं जायेगी
  • नीचे वालों की क्यूं याद कल जायेगी
  •  
  • नदियाँ बह चट्टान में बदल जायेगी
  • हिमालय की गोद फिर छल जायेगी
  •  
  • जेहन मे छुपी चाह यूँ ही टल जायेगी
  • जब तेरी पोल फिर से खुल जायेगी
  •  
  • खामोशियाँ कुछ कह उछल जायेगी
  • हिचकियाँ जब तलक मचल जायेगी
  •  
  • एक दिन खुदा की खुदाई चल जायेगी
  • जब वह तुझे फिर से मिल जायेगी
  •  
  • यूँ आस फिर मिलन की मधु पल जायेगी
  • जब हवा जमाने की फिर बहल जायेगी


  • हार है दर्द है और न जाने कितने अभी इम्तिहान बाकी है,
  • पर कायदा है की लड़ो तब तक जब तक तुममें जान बाकी है!

  •  
  • बहुत बार मन में आया तेरी नसीहतों पर कर लूँ यकीं पर,
  • थोड़ा ठहरो अभी अपने सपनों पर मुझे कुछ गुमान बाकी है!

  •  
  • जितना टूटता हूँ उतना खुद को जानता हूँ,
  • न जाने मेरी मुझसे कितनी पहचान बाकी है!

  •  
  • पूरे जंगल में आग है और हवा भी जोरों पर है,
  • पर चमत्कार है की मेरा अब तक मचान बाकी है!

  • अपने अपने बाड़े में घिरे भूख से बेचैन लड़ते झगड़ते,
  • ये सब जानवरों के लक्षण हैं कैसे कहूँ कि इंसान बाकी है!

  •  
  • आदमियत के नकाब में हर ओर आदमखोर ही मिलते हैं,
  • तुम फिर से मिलो कि ओठों पर एक अधूरी मुस्कान बाकी है!

  •  
  • हर रोज सुबह उठ पड़ता हूँ ये सोचकर कि कुछ हो न हो,
  • पर अब तलक किसी की दुआओं में मेरा नाम बाकी है!




  • कुछ भी न रहा ।
  • दिल ने ये कहा।।
  •  
  • जब चोट लगी
  • इस दिल ने सहा।।
  •  
  • हम पूछा किये
  • न बतायी खता।।
  •  
  • कब की थी खता
  • न हमे है पता।।
  •  
  • जाने क्यों ही गयी
  • वो हमसे ख़फ़ा।।





  • अपना दुखड़ा किसे सुनायें।
  • आँसू पी पी कर रह जाएँ।।
  •  
  • ग़म की चादर ओढ़े हैं हम
  • फिर बोलो कैसे मुस्कायें ।।
  •  
  • संदेहों ने हमको घेरा
  • फिर मन को कैसे समझायें।।
  •  
  • गैरों ने तो अपनाया है
  • अपनों से ही धोखा खायें।।
  •  
  • मिले राह में साथी कितने
  • किस किस से हम साथ निभायें।।
  •  
  • जीवन में उलझाव बहुत हैं
  • इन सबको कैसे सुलझायें।।
  •  
  • दर्द के मारे यहां वहां हैं
  • आओ इनको गले लगाये ।।
  •  
  • अन्तर्द्वन्दों से लिपटे हैं
  • कैसे मन को धीर बंधाएं।




  • वफ़ा के जो गीत वो भुलाने लगे हैं।
  • अपने किये की सज़ा हम पाने लगे हैं।।
  •  
  • बदनसीबी का ख़िताब हमको हासिल
  • बुरे हम हुए गैर उनको भाने लगे है।।
  •  
  • बर्बादियों के शोलों में दिल जलाते रहे
  • साथी को साथ लेकर ग़म मिटाने लगे हैं।।
  •  
  • कभी पकड़ा था निशात का दामन
  • वही दामन वो हमसे छुड़ाने लगे हैं।।
  •  
  • तनहाई में अपनी दास्ताँ सुनाते रहे
  • हम ख़ामोशी के गीत गाने लगे हैं।।




  • कुछ तो कहने का असर हो।
  • ज़िन्दगी कैसे बसर हो।।
  •  
  • मुश्किलों का दौर है जब
  • किस तरह जारी सफर हो।।
  •  
  • बहुत है करने की खातिर
  • ग़र तुम्हे इसकी खबर हो ।।
  •  
  • मिलेगी मन्ज़िल यकीनन
  • हौसलामन्दी अगर हो।।
  •  
  • जीत वो कैसे सकेगा
  • हारने का जिसको डर हो।




  • कैसे सुनाऊं मैं अपनी कहानी।
  • ग़मो से भरी है मेरी जिन्दगानी।।
  •  
  • चाहत सदा कैद है इस जहाँ में
  • करते यहां ज़ुल्म हैं मेज़बानी।।
  •  
  • किसे फ़िक्र है घर जले हैं तो कैसे
  • करेगा भला कौन अब मेहरबानी।।
  •  
  • काटा किये हैं दरख़्तों को सारे
  • जड़ों में कोई डाल दो इनकी पानी।।
  •  
  • ठहरता नही वक्त खातिर किसी के
  • मगर छोड़ जाता है अपनी निशानी।।
  •  
  • यहाँ सब्र का बाँध टूटेगा इक दिन
  • जो करते रहोगे यूँ ही छेड़खानी



  • मापनी - 122 122 122 122
  • काफ़िया - ए रदीफ़ - जा रही है
  •  
  •  
  • ख़ुशी की वो डोली चढे जा रही है ।
  • गमों की तिजोरी दिये जा रही है ।।
  •  
  • निगाहें उठाकर निहारे है घर को
  • दुआएँ हजारों दिये जा रही है ।।
  •  
  • रहीं छूट अब सारी बचपन की सखियाँ
  • वही चन्द यादेँ लिये जा रही है ।।
  •  
  • हिना से रचे हाथ की मुट्ठियों में
  • ले तकदीर अपनी जिये जा रही है ।।
  •  
  • रुलाई कहीं फूट जाये न मुख से
  • सभी अपने आँसू पिये जा रही है ।।
  •  
  • न जाने हैं कैसी सजन की वो गलियाँ
  • मधुर कल्पनायें किये जा रही है ।।
  •  
  • न जाने लिखी किस कलम से है किस्मत
  • लबों को ये अपने सिए जा रही है ।।




  • नम आँखों में जो हरदम मुस्काया है ।
  • नहीं वहम है वो मेरा हमसाया है ।। 1
  •  
  • कहने को हम भी हँस मुस्का लेते हैं
  • पर इस दिल पर अब भी ग़म का साया है ।। 2
  •  
  • जब भी मिरी मुंडेर कबूतर है उतरा
  • लगता साजन का सन्देशा आया है ।। 3
  •  
  • सहमी सहमी आयी हैं फिर बरसातें
  • आँखों ने जी भर आँसू बरसाया है ।। 4
  •  
  • साथी साक़ी पैमाने की बात न कर
  • नशा इश्क़ का अब तक मुझपर छाया है ।। 5
  •  
  • डगमग होते पांव संभल ही जायेंगे
  • किसने कब किस को घर तक पहुँचाया है ।। 6
  •  
  • करें इबादत मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे
  • रब ने लेकिन किसको कभी बुलाया है ।। 7
  •  
  • मरने पर सब हैं समाधियाँ बनवाते
  • जीते जो उनको सबने ठुकराया है ।। 8
  •  
  • मुझे नहीं चिन्ता आँधी तूफानों की
  • मेरे सर माँ के आँचल की छाया है 




  • दिल से उम्मीद का दामन जो छूट जायेगा।
  • बसा है ख्वाब जो आँखों में टूट जायेगा ।।
  •  
  • एक शीशे का पियाला है ज़िन्दगी नाज़ुक
  • नही सम्हाल के रक्खा तो फूट जायेगा।।
  •  
  • जज़्ब ए चैन उँगलियों ने थाम रक्खा है
  • सम्हालना नहीं हाथों से छूट जायेगा।।
  •  
  • दिलों के प्यार की ढाली शराब शीशे में
  • लबों की हल्की सी जुम्बिश से टूट जायेगा।।
  •  
  • न यों बेकार की बातों में वक़्त ज़ाया हो
  • हयात इश्क़ का पैकर है रूठ जायेगा





  • ख़ामोशी में अपनी सूरत बेगानी सी लगती है।
  • ऐसे में हर आहट जैसे अनजानी सी लगती है।।
  •  
  • गुमसुम हवा चांदनी रातें लगतीं खोई खोई सी
  • अंधियारी भी देखो कैसी दीवानी सी लगती है।।
  •  
  • बेगाने नगमे भँवरों के और बहारों की महफ़िल
  • झरती हर पत्ती गुलाब की लासानी सी लगती है।
  •  
  • गुलशन फूल तितलियाँ खुशबू ख्वाबों के मानिन्द मगर
  • दिल को चुभन ख़ार की जनि पहचानी सी लगती है।।

  • लम्हे खुशियों के थोड़े से जैसे हो जाड़े की धूप
  • फिर भी ग़म की सिसकी दिल की नादानी सी लगती है।




  • ख़ल्क़ में शैतान ज़िंदा हो गया।
  • ज़िन्दगी का हक़ चुनिंदा हो गया।।
  •  
  • फंस गया सैयाद के जो जाल में
  • आदमी बेबस परिन्दा हो गया।।
  •  
  • दोस्ती के मायने कुछ भी नहीँ
  • दुश्मनी यारों का धंधा हो गया।।
  •  
  • होलियाँ हैं खून में डूबी हुई
  • आदमी ऐसा दरिन्दा हो गया।।
  •  
  • बेकसी फाकाकशी और मुफलिसी
  • जब मिली अल्लाह का बन्दा हो गया।।
  •  
  • गन्दगी ऐसी भरी माहौल में
  • हर किसी का ख़ून गन्दा हो गया




  • ये मुलाक़ातें बड़ी अच्छी लगीं।
  • आपकी बातेँ बड़ी अच्छी लगीं।।
  •  
  • दर्द की तारीकियों में गुम रहे
  • फिर भी बारातें बड़ी अच्छी लगीं।।
  •  
  • धूप में तप कर हुए बेचैन तो
  • चाँदनी रातें बड़ी अच्छी लगीं।।
  •  
  • रेगज़ारों में फंसी थी ज़िन्दगी
  • भीगती रातें बड़ी अच्छी लगीं।।
  •  
  • था तशद्दुद का नशा जिनको उन्हें
  • ख़ूनी बरसातें बड़ी अच्छी लगीं।।
  •  
  • काफ़िले हमने सजाये और तुम्हे
  • कुफ़्र की बातें बड़ी अच्छी लगीं






  • हम को उन से है तो उन को भी मुहब्बत होगी।
  • चले आयेंगे कभी जब उन्हें फ़ुरसत होगी।।
  •  
  • ये अँधेरा ये बियांवा यहीं अब रहना है
  • खण्डहरों ने जो डराया तो मुसीबत होगी ।।
  •  
  • न भूलने उसे देंगे न भुलायेंगे कभी
  • भूल जाये हमें उस की न ये जुर्रत होगी।।
  •  
  • जुगनुओं से न कोई रास्ता रौशन होगा
  • रौशनी के लिये शम्मा की ज़रूरत होगी।।
  •  
  • ख़ुदा को देख न पाये मगर है माँ देखी
  • उसी के पांव के नीचे कहीं जन्नत होगी




  • रख़्त बांधो कि सफ़र कट जाये ।
  • ध्यान रखना न ध्यान बंट जाये।।
  •  
  • राख में आग भी होगी ज़रुर
  • शम्मा बालो अँधेरा छँट जाये।।
  •  
  • ख़्वाब इतने न देखने लगना
  • ज़िन्दगी ख्वाब में सिमट जाये।।
  •  
  • आँगनों में उठा के दीवारें
  • चाहते हो कि खाई पट जाये।।
  •  
  • क़समें खा कर यकीं दिलाना क्यूँ
  • जुबां कैसी कि जो पलट जाये






  • लोग दिल से गरीब होते हैं ।
  • वरना सब खुशनसीब होते हैं ।।
  •  
  • पत्थरों को ख़ुदा समझते हैं
  • लोग कितने अज़ीब होते हैं ।।
  •  
  • सोचते हैं चलो रोज़े रख लें
  • यूँ भी फ़ाक़े नसीब होते हैं।।
  •  
  • मस्जिदों में अज़ान देते हैं
  • क्या वो रब के क़रीब होते हैं।।
  •  
  • जिनकी माएं नही ज़माने में
  • वे बड़े बदनसीब होते हैं ।





  • हमसफ़र ने साथ छोड़ा किस तरह ।
  • दिल तड़प रोया निगोड़ा किस तरह।।
  •  
  • हम उन्हें गुंचे गुलों के दे रहे
  • हाथ पर उसने मरोड़ा किस तरह।।
  •  
  • किस तरह थी ज़िन्दगी शरमा रही
  • मौत ने दामन निचोड़ा किस तरह।।
  •  
  • क़समें खाता था वफ़ा की वो मगर
  • दिल हमारा आज तोड़ा किस तरह।।
  •  
  • ख़्वाब आँखों ने सजाये रात भर
  • सुख बना लेकिन भगोड़ा किस तरह।।
  •  
  • ली हमेशा हम से जीने की सलाह
  • ग़ैर से रिश्ता है जोड़ा किस तरह।।
  •  
  • बह रहीं लहरें रवानी में मगर
  • रुख़ नदी का तुमने मोड़ा किस तरह।




  • खोये खोये हैं नज़ारे किसी दुश्मन की तरह।
  • सज के आई हैं बहारें किसी दुश्मन की तरह।।
  •  
  • रात खामोश है तनहा से नज़ारे गुमसुम
  • आसमा पर हैं सितारे किसी दुश्मन की तरह।।
  •  
  • खो गये रंग सभी रात की सियाही में
  • फिर भी चुभते हैं नज़ारे किसी दुश्मन की तरह।
  •  
  • डूब जाये न कहीं ग़म के समन्दर में ये दिल
  • दूर हैं हमसे किनारे किसी दुश्मन की तरह।।
  •  
  • आज दरिया हयात की हुई गमनाक बहुत
  • खो गये खुशियों के धारे किसी दुश्मन की तरह....





  • अनमोल हैं ये अश्क़ इन्हें आब दीजिये।
  • जागी हुई आँखों को कोई ख्वाब दीजिये।।
  •  
  • जो साथ न दे पाये कहीं पीछे रह गये
  • कुछ उनकी मुश्किलों का भी जवाब दीजिये।।
  •  
  • अब अनसुनी न हो किसी मज़लूम की चीखें
  • कुछ बाँटिये मसर्र्तें सवाब लीजिये ।।
  •  
  • मेहनतकशों की देह का महका है पसीना
  • खुशबू का ऐसी लुत्फ़ भी जनाब लीजिये।।
  •  
  • ग़म पी के जी रहे जो ज़माने के दौर में
  • उनके लिए किया है क्या हिसाब दीजिये ।।
  •  
  • किसने है क्या किया ये ख़ुदा देख रहा है
  • रब को न बेचने का इन्तख़ाब कीजिये 



  • ये खेल है गर अच्छा, ये खेल दुबारा हो 
  • तुम जुल्म करो उतना,तकलीफ गवारा हो
  •  
  • मै डूब न जाऊं दरिया, समझ में ये रखना 
  • मझधार निपट लौटूं , तो पास किनारा हो
  •  
  • हर कोई है उलझा सा, दिन रात सियासत में 
  • मतदान किया जिसने, गलती से दुलारा हो
  •  
  • मै हूँ चश्मदीद मगर, क्या ख़ाक गवाही दूँ 
  • इन्साफ के दर ने, तव्वज्जो से पुकारा हो
  •  
  • आसान बहुत जीवन के, राह चलो देखो 
  • मन अगर मदारी सा, हाथो में चिकारा हो
  •  
  • क्यं ढोल सा पीटा है, मनहूस रिवाजों की 
  • कह दो कि हिमायत से, अपनों ने निहारा हो





  • चलो वहां,चले जहाँ, जमीन-आसमा न हो 
  • कदम कदम में हक मिले ,भले कि रहनुमा न हो
  •  
  • दिखाइ दे रहा हमे, अजीब हालतें यहाँ
  • सियासती जमीन दांव,पाँव जानता न हो
  •  
  • लुटे-लुटे से वो रहे ,निगाह की फरेब में 
  • दिलो कि जान से, कोई पुकारता न हो
  •  
  • हमारे पास ख़्वाब है , धुंध की खासियत लिए 
  • समय का आईना कभी, जिसे संवारता न हो
  •  
  • जरा हमे मिले सही ,हिम्मत की बुलंदियां 
  • मिला गरज को ख़ाक में ,हमे पछाड़ता न हो
  •  
  • कटे वनों से डर किसे ,न दहशत अब फैलती 
  • 'सुशील'शेर कागजी ,इधर दहाड़ता न हो




  • जिन्दगी को आदमी, आम की, नजर देखो
  • रख कभी सीने , वजन कोई , पत्थर देखो
  •  
  • डूबने लग जाए, स्वयं ही वजूद कभी 
  • लहर उठती,रह किनारे, समुंदर देखो
  •  
  • आग नफरत की लगाकर, जो छिपा करते 
  • उतरता 'खूनी' वहां कब , खंजर देखो

  • जो हमे बेख़ौफ़ मिलते, हर-कहीं हरदम 
  • चेहरे क्यों हैं मलीन, आँखे भी अन्दर देखो
  •  
  • एक तमाशा सा, हुआ तेरे शह्र में कल भी 
  • आज की, ताजी फिजा क्या है ,खबर देखो





  • मुझसे मेरे दोस्त, तू परछाई न मांग
  • कितनी अजीब मेरी,तनहाई न मांग

  • लिखता दर्द गम के ,अहसास को भूलने
  • थोडी सी बच गई है ,रोशनाई न मांग
  •  
  • बद मुट्ठी रखा हूँ ,मै छुपा के जन्नतें 
  • ये हसरते न छीन , वो खुदाई न मांग
  •  
  • गुनाह की मुकर्रर ,दिल को सजा वो मिले
  • न फिजूल वकालते,औ रिहाई न मांग
  •  
  • जज्ब किये बैठा हूँ ,लोगों के गिले-शिकवे
  • हर बात कह थका ,तो सफाई न मांग





  • समझ सोच के सही तुम फैसला करना 
  • पूजा मस्जिद में या मंदिर सज्दा करना
  •  
  • भरी बारिश , नहीं मुमकिन , खुले रहना 
  • गर्म दोपहर याद लपट बचा करना

  • इसी तजुर्बे , निभा लेते दुनियादारी,
  • सुन के आहट किस कदम से चला करना

  • ,
  • उम्मीद के हर परिंदे को, हिदायत हो 
  • जहाँ आकाश हाथ लगे ,उड़ा करना
  •  
  • जो दिल उतरे, किताबें मजहबी उनको 
  • तहे दिल से, गुनना , सुनना –पढ़ा करना

  • किसी को चेहरा दिखता नकाब छुपा 
  • कभी खुद से, कहाँ चाहा , छिपा करना





  • जिसे होना जहाँ चाहिए, वहां पर नहीं मिलता
  • तेरी आँखों में पहले सा, समुन्दर नहीं मिलता
  •  
  • जंगल तब्दील हो गए हैं , शहर के बियाबान में 
  • सपेरों को नुमाइश हेतु , अजगर नहीं मिलता
  •  
  • जुदा हो के ,हमी से दूर होता गया साया 
  • वो अँधेरे कभी बेझिझक आ कर नहीं मिलाता


  • बंद आखों किया जाए किसी पे यकीन बता 
  • मेरे मायूस दिल को वो , चारागर नहीं मिलता

  • बना के ‘बुत’ , हिफाजत से रखा बहुत मगरूर दिल 
  • तभी संगदिल को ढूढे से , पत्थर नहीं मिलता




  • कभी खुद को खुद से ,रूबरू हो कर देखो 
  • मिट्टी बारिश की ,खुश्बू हो कर देखो
  •  
  •  
  • रिश्ते टूटे - बिखरे ,दिखते हैं आसपास 
  • जोड़ने की नीयत हो ,शुरू हो कर देखो
  •  
  •  
  • बंद कमरा, तल्खी ,घुटता हुआ सा दम 
  • खुली हवा में सर्द आरजू हो कर देखो
  •  
  •  
  • जो चल जाए गहरे ,वो आसान तिलस्म 
  • जो छा जाए सही ,जादू हो कर देखो
  •  
  •  
  • कहाँ से कहाँ दुनिया ,देखते- देखते चली 
  • किसी कोने में खड़े हो, बाजू हो कर देखो




  • तेरी उचाई देख के, कांपने लगे हम
  • अपना कद फिर से, नापने लगे हम
  •  
  • हम थे बेबस यही, हमको रहा मलाल 
  • आइने को बेवजह, ढांपने लगे हम
  •  
  • बाजार है तो बिकेगा ,ईमान हो या वजूद
  • सहूलियत की खबर ,छापने लगे हम
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  • दे कोई किसी को,मंजिल का क्यूँ पता
  • थोडा सा अलाव वही , तापने लगे हम
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  • वो अच्छे दिनों की ,माला सा जपा करता
  • आसन्न खतरों को ,भांपने लगे हम




  • अँधेरे में दुआ करू ,ऐ खुदा परछाई दे
  • बेख्याली में निकले ,जो नाम सुनाई दे
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  • करवट न बदलू,कोई ख़्वाब न देखूं
  • नीद से उठते तेरी ,याद जुम्हाई दे
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  • कसमो का कसीदा हो,कहीं वादों का हो ताना
  • ख्याले बुनता रहूँ ,बस यूँ तन्हाई दे
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  • उजड़े गुलशन में ,सब्ज-शजर देखूं
  • हो तब्दील किस्मत,जन्नत खुदाई दे
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  • रिश्तों की अदालत ,बेजान हलफनामे
  • या मुझे ज़िंदा रख ,या मेरी रिहाई दे




  • हर निगाह चमक, हरेक होठ, हंसी ले के आओ 
  • हो सके , कम्जर्फों के लिए, जिन्दगी ले के आओ
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  • इस अँधेरे में, दो कदम, न तुम चल पाओ , न हम 
  • धुधली सही, समझौते की, रौशनी लेके आओ
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  • कुछ अपनी हम चला सके, कुछ दूर तुम्ही चला लो 
  • सोच है, कागजी कश्ती है, नदी ले के आओ
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  • चाह के पढ़ नहीं पाते, खुदगर्जों का चेहरा 
  • पेश्तर नतीजे आयें ,रोशनी ले के आओ
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  • सिमट गए सभी के, अपने- अपने दायरे नसीब 
  • पारस की जाओ ढूढ कहीं, 'कनी' ले के आओ
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  • खुदा तेरे मयखाने, कब से प्यासा है रिंद 
  • किसी बोतल कुछ बची हो, 'वो' , बची ले के आओ




  • खून के घूट पीते !नहीं जहर का, जायका जानते 
  • भटकते क्यूँ भला शहर में, जो मेरा पता जानते

  • लोग हाथो उठाए फिरते हैं, मुझे रात दिन जान लो 
  • न 'फतवे' को दिल उतारते, महज वे मशवरा जानते

  • फूल की महक होती, बगीचे खुशगवार होते यहाँ 
  • कीट-पतंग के बन रहनुमा , तितलियां पालना जानते
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  • कौन ये रात दिन फूकता है, बिगुल आशनाई का अभी 
  • चोट जो खाए होते इधर ,तो सही रास्ता जानते

  • ता-कयामत तेरा इंतिजार, हम को भी वजन सा लगे 
  • हम 'सुशील' हर वो 'पाप' धोते, चुनाचे खता जानते






  • साया हट गया है, फिर नया बरगद तलाशिये
  • अब मेरी जमीन, सरकती यहाँ, सरहद तलाशिये
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  • कडुवे घूट, पीने का माहिर , सुकरात चल दिया
  • आदम पी रहा है, खून इधर, शहद तलाशिये
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  • है कारीगरी का महज ये नमूना सा जान लो
  • ये मन्दिर ढके या मस्जिद ढके गुम्बद तलाशिये
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  • उनके पाँव, न उठाये, उठेंगे अब जमीन से
  • कलयुग में , सियासी अमन के, अंगद तलाशिये
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  • लिए परचम जिहादी घूमता चारों तरफ यहाँ
  • आजादी के क्या माने वहां , मकसद तलाशिये






  • होठ सीकर चुप्पियों में जीता रहा आदमी
  • दर्द आंसू , जहर खून पीता रहा आदमी
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  • तुम ज़रा दाग पर दामन बदलने की सोचते
  • दाग-वाली, कमीजो को सीता रहा आदमी
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  • जल उठे जंगलो में उम्मीदों के परिंदे कहाँ
  • सावन दहाड़ता खूब चीता रहा आदमी
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  • काट ले बेसबब , बेमतलब उनको, बारहा
  • महज उदघाटनों का ये, फीता रहा आदमी
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  • साफ नीयत, पढ़ो तो, किताबे कभी ,संयम की
  • हर सफा के तह कुरान- गीता रहा आदमी





  • शहर में घूम के देखा ,मुस्कान न पाए हम
  • पत्थर दिखी हवेली ,एक मकान न पाए हम
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  • मिली, नाजुक बदन लड़की , शिकन में चेहरा 
  • क्या उसने कहा रुक के, पहचान न पाए हम
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  • क़तर के रखने वाले, उन्मुक्त परिंदों के पर
  • क्या तुझको रहा हासिल, उड़ान न पाए हम



  • ये अँधेरे चुभे दिल पर, या मुस्कान ~तेरी
  • कहाँ से तीर था छूटा, कमान न पाए हम
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  • हमारी पूछ- परख रही , न जाने क्या कमी 
  • रुठ के, वापस हो लौटे ,मेहमान न पाए हम

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