gazals खत लिखना तुम


  • बार बार आती हैं यादें खत लिखना तुम
  • भूल न पायें मीठी बातें खत लिखना तुम
  • कागज कंगन विंदिया और बाहों के घेरे
  • कैसे काटें लंबी रातें खत लिखना तुम
  • अब भी करती षैतानी क्या नटखट बेटी
  • विट्टू मांगे नई किताबें खत लिखना तुम
  • अब की बार बदलवा दूंगा चष्मा बाबूजी का
  • मत करना नम अपनी आंखे खत लिखना तुम
  • जां बाकी है डटे रहेंगे करगिल की चोटी पर ‘ब्रज’
  • जब सरहद से दुष्मन भागें खत लिखना तुम




  • कितने बदल गये यहॉ हालात देखिये
  • अब दोस्तों को दुष्मनों के साथ देखिये
  • कैंसे बनेंगे रिष्ते यहॉ प्यार के जनाब
  • लुटती है रोज प्यार की बारात देखिये
  • इल्जाम आ न जाये कही रहनुमाई पर
  • विगड़े अगर जो मुल्क के हालात देखिये
  • वीरान जिंदगी में मेरी कौन आ गया
  • दिल पर हुई है नूर की बरसात देखिये
  • एैसा नजर फरेब है महबूब-ए- ‘ब्रज’
  • ख्वाबों में हो गयी मुलाकात देखिये



  • आदमी के मुँह लगा,आदमी का जायका।
  • हो गया कड़वा बहुत,ज़िन्दगी का जायका।।
  •  
  • दौड़ वैभव के लिए,इस कदर हावी हुई।
  • भूल बैठा आदमी,सादगी का जायका।।
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  • अंधकारों से घिरा,आदमी यूँ आज का।
  • उम्र भर मिलता नहीं,रोशनी का जायका।।
  •  
  • गंदगी से भर चली,हर तरफ आबो-हवा।
  • फिर भला कैसे मिले,ताजगी का जायका।।
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  • मन हमारा हो न हो,है ये मजबूरी मगर।
  • जिस जगह भी जाइए,गंदगी का जायका।।
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  • नफ़रतों के दौर में,हर क़दम पे दुश्मनी।
  • खुशनसीबी से मिले,दोस्ती का जायका।।
  •  
  • 'सिद्ध' की सुन के ग़ज़ल,लोग यूँ कहते मिले।
  • है बहुत कड़वा लगा,शायरी का जायका



  • खल करता जलपान मिलेगा।
  • बंगला आलीशान मिलेगा ।।
  •  
  • प्रीत करो तो उठे बवेला ।
  • नफ़रत कर सम्मान मिलेगा।।
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  • माथे पर चंदन मल ले रे ।
  • उठा कटोरा दान मिलेगा।।
  •  
  • मेहनतकश दुत्कारा जाता।
  • मालिक भौंहें तान मिलेगा।।
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  • नहीं मिलेगा जो मंदिर में ।
  • खेत और खलिहान मिलेगा।।
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  • नहीं समय रहते चेता तो ।
  • गली-गली शैतान मिलेगा।।
  •  
  • क्या सूरज क्या चाँद-सितारे।
  • मन में जो ले ठान मिलेगा।।
  •  
  • असली भोर तभी होगी जब।
  • रम्मू से रमजान मिलेगा ।।
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  • जहाँ-जहाँ मानवता होगी ।
  • वहाँ 'सिद्ध' का गान मिलेगा


  • निर्धन दिन भर दर-दर भटका,रोया निर्धन सारी रात।
  • धन वालों का खोटा सिक्का,खनका खन-खन सारी रात।।
  •  
  • दरवाजे पर दस्तक देता रहा रात भर बारम्बार।
  • हमें निगलने शैताँ बैठा,अपने आँगन सारी रात।।
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  • उसकी रात रही रंगीली,सने ख़ून से जिसके हाथ।
  • घायल का यह हाल रहा है,रोया तन-मन सारी रात।।
  •  
  • बेटी बिदा हुई निर्धन की,जब लेकर कोरा आशीष।
  • सास-ननद के दिन भर ताने,रूठा साजन सारी रात।।
  •  
  • मदिरा पान किया साजन ने,उसे नहीं फिर कुछ भी होश।
  • प्रेम-पिपासा लेकर बैठी,जागी दुल्हन सारी रात।।
  •  
  • जब मिल बैठे चोर-सिपाही,हुआ देश का ऐसा हाल।
  • कटता रहा 'सिद्ध' बेखटके,चंदन का वन सारी रात


  • ज़ख़्म बेशुमार जो हुए।
  • नोकदार खार जो हुए।।
  •  
  • कैसे ना कराहते सनम।
  • सितम बार-बार जो हुए।।
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  • झूठ-मूठ रूठ ही गए।
  • उनके तलबगार जो हुए।।
  •  
  • किस लिए पहचानते हमें।
  • आज वो सरकार जो हुए।।
  •  
  • साजे-सुकूँ मिल गए उन्हें।
  • शख़्स गुनहगार जो हुए।।
  •  
  • फ़िक्रे-अमन उनकी ज़ुबाँ से।
  • देखिए ख़ूँ-ख्वार जो हुए।।
  •  
  • उनकी दगाबाज़ियाँ चलीं।
  • 'सिद्ध' समझदार जो हुए।।
  •  



  • जज़्बा-ए-इश्क़ ना मंदा रहेगा यूँ।
  • हर वक़्त फ़क़त आपका बंदा रहेगा यूँ।।
  •  
  • मोहब्बत जो उसने की तो फ़ासले से की।
  • कहता जुनूने-जुस्तजू ज़िन्दा रहेगा यूँ।।
  •  
  • हाथ में उसके रहेगी ज़िन्दगी की डोर।
  • अपने गले में मौत का फंदा रहेगा यूँ।।
  •  
  • चाहत की नज़र से तुझे देखा न जाएगा।
  • गर तू उसके सामने गंदा रहेगा यूँ।।
  •  
  • क्यों न उसकी दीद से,दिल की ईद हो।
  • 'सिद्ध' उसका चेहरा,चंदा रहेगा यूँ।


  • डूबिए कि वेदना का है ये सागर ऐ सनम ।
  • आज तुमको लग रहा किस बात का डर ऐ सनम।।
  •  
  • वह सरल था देखिए उस की सरलता का असर।
  • आदमी है हो गया वो आज बेघर ऐ सनम।।
  •  
  • जिसकी खातिर हर क़दम खेला किए हम जान पर।
  • वो दिखाता है हमें ललकार ख़ंजर ऐ सनम।।
  •  
  • दरम्याँ मतलब परस्ती का हुआ है अंकुरण ।
  • पड़ गए संवेदना के मंद से स्वर ऐ सनम ।।
  •  
  • माना परदे में अभी काली हक़ीक़त है छुपी।
  • क्या करोगे सामने वो आ गई गर ऐ सनम।।
  •  
  • जा रहा हूँ दूर तुझसे मैं हमेशा के लिए।
  • रुक ठहर कि देख लूँ मैं तुझको जी भर ऐ सनम।।
  •  
  • उसने पूछा क्यों नहीं लिखते ग़ज़ल श्रृंगार की।
  • मैं ये बोला-पहले मुझसे प्यार तो कर ऐ सनम।।
  •  
  • 'सिद्घ' जो भी गुल हैं वो सब सेज पर हैं खास की।
  • और अपनी कट रही है खार ही पर ऐ सनम।



  • वह सुकून-ए-ज़िन्दगी को मुस्कुरा कर ले गया।
  • हक़ हुकूमत का हमें सपने दिखा कर ले गया।।
  •  
  • जुनून-ए-नफ़रत हर तरफ़ था इस कदर छाया।
  • ज़ोर का तूफ़ान आया,छत उड़ा कर ले गया ।।
  •  
  • कोठरी काजल की थी,हर शख्स जिसमें दाग़ दार।
  • वह बड़ा फनकार था,ख़ुद को बचा कर ले गया।।
  •  
  • हैं कई जो आँख का काजल चुराते हैं यहाँ ।
  • वह हमारी आँख के सपने चुरा कर ले गया।।
  •  
  • वह समझता है कि मैंने कुछ नहीं देखा यहाँ।
  • कौन आया साथ अपने क्या छुपा कर ले गया।।
  •  
  • 'सिद्ध' को मालूम है,उस शख़्स का क्या नाम है।
  • बीच महफ़िल से हमारा दिल उठा कर ले गया



  • देखिएगा सींग उनके सर लगे।
  • ये ज़माना वेदना का घर लगे।।
  •  
  • भाल पर उनके लगे चंदन यहाँ।
  • और अपने भाल पर पत्थर लगे।।
  •  
  • अब ज़मीं पर पैर पड़ते ही नहीं।
  • देह पर उनकी यकायक पर लगे।।
  •  
  • आदमी बिलकुल निहत्था है खड़ा।
  • हाथ में शैतान के खंजर लगे।।
  •  
  • कह रहा बेदाग़ वह ख़ुद को मगर।
  • दामन उसका ख़ून से है तर लगे।।
  •  
  • अब लुटेरों की यहाँ पर मौज़ है।
  • शेष सबकी ज़िन्दगी जर्ज़र लगे।।
  •  
  • तोड़ना है अब भरम उसका हमें।
  • गर बुरा उसको लगे जी भर लगे।।
  •  
  • ज़िन्दगी का हक़ नहीं उसको ज़रा।
  • मौत का है 'सिद्ध' जिसको डर लगे


  • लुत्फ़-ए-मोहब्बत छोड़कर,नफ़रत की राहों पर चले।
  • जाने ये कैसे लोग हैं,ले-ले के जो ख़ंजर चले।।
  •  
  • देखकर इन्सान को तो,ख़ूब वे गर्जन किए।
  • सामने शैतान आया,सर झुका,झुक कर चले।।
  •  
  • एक पग इन्सानियत की राह पर ना रख सके।
  • हैवानियत की राह पर,वे जब चले,जी भर चले।।
  •  
  • अब दिलों में नफ़रतों के,भाव हैं घर कर गए।
  • भाव सब इन्सानियत के, अब दिलों से मर चले।।
  •  
  • अलहदा थी दुश्मनों की बात लेकिन देखिएगा।
  • तीर जो अपनों ने ताने,वो भी कहाँ कमतर चले।।
  •  
  • वो किनारे हो लिए,सिर्फ़ इतना बोलकर।
  • मैं चलूँ अंगार पर,साथ वो भी गर चले।।
  •  
  • 'सिद्ध' उनकी बात तो,सिर्फ़ कहने भर की थी।
  • मैं ये बोला-चल चलें, लेकर वो अपने घर चले।।
  •  
  •  



  • बात ठहरे तो कहाँ ठहरे।
  • वो अगर हैं बेज़ुबाँ ठहरे।।
  •  
  • ख़ूब से ख़ूबतर खड़े पुतले ।
  • नज़र फिर-फिर तिरी दुकाँ ठहरे।।
  •  
  • हम चले तो चले चाँद-सूरज ।
  • और ठहरे तो आसमाँ ठहरे।।
  •  
  • सिर्फ़ पानी ही वो नहीं लाए।
  • ले के सर पे वो बिजलियाँ ठहरे।।
  •  
  • बह चले महल और हवेलियाँ ।
  • अपने माटी के मकाँ ठहरे ।।
  •  
  • ख़ुद को महफ़ूज समझे हैं वो ।
  • जा के जो ऊँचे मचाँ ठहरे ।।
  •  
  • उसे देखा कि क़शमक़श ऐसी ।
  • साँस ठहरे कि मिरी जाँ ठहरे।।
  •  
  • पुर असर मुस्कान फिर देखी ।
  • फिर नज़र के इम्तिहाँ ठहरे।।
  •  
  • चल दिए वो रूठ के उठ के ।
  • रह गए पाँव के निशाँ ठहरे ।।
  •  
  • दे असर आवाज़ में कि सुन के।
  • वक़्त और आबे-रवाँ ठहरे ।।
  •  
  • मिरी ख़ुशबू का असर ये है।
  • ठहर-ठहर के बागवाँ ठहरे।।
  •  
  • अपनी तरफ नोंक तीरों की ।
  • उनकी आँखों में कमाँ ठहरे ।।
  •  
  • हमें टुकड़ों में देखना चाहें ।
  • लिए कुछ लोग आरियाँ ठहरे।।
  •  
  • ख़ुशनुमा है और दिलकश है।
  • देख मंज़र ये महरबाँ ठहरे।।
  •  
  • धूल उड़ती है नज़र तर है।
  • मगर उसका न कारवाँ ठहरे।।
  •  
  • चलो तैयार हम भी हो जाएं।
  • वो किए तैयारियाँ ठहरे ।।
  •  
  • बात कुछ और ही कुछ और है।
  • बेसवब कौन है यहाँ ठहरे ।।
  •  
  • वो झुकें तो सबको हैरत हो।
  • मालूम है कि बदगुमाँ ठहरे।।
  •  
  • लोग कहते हैं हवा उनकी ।
  • साँस अपनी भी कहाँ ठहरे।।
  •  
  • खड़े देखो वो पास फूलों के ।
  • देखने लेकिन वो तितलियाँ ठहरे।।
  •  
  • आगे नज़र आएँगे शोले ।
  • ज़रा ठहरो कि ये धुआँ ठहरे।।
  •  
  • पहले दिल फिर जिस्म सारा ।
  • हुए पत्थर के जो इन्साँ ठहरे।।
  •  
  • हो के जो नज़र नहीं आती।
  • अब न दीवार दरमियाँ ठहरे।।
  •  
  • किए हैं ख़ूब सितम सालों ने ।
  • हम तो फिर भी हैं जवाँ ठहरे।।
  •  
  • यकीं होता तो भला कैसे ।
  • जुमलेबाजों के बयाँ ठहरे ।।
  •  
  • मौसमे-बहार याद आता है ।
  • देखें कब तक ये खिजाँ ठहरे।।
  •  
  • वही घर है वही दुनिया है ।
  • 'सिद्ध'जब और जहाँ ठहरे।।



  • उनको होना चाहिए था,वो मगर क्यों ना हुए।
  • हम भी उड़ना चाहते हैं,अपने पर क्यों ना हुए।।
  •  
  • बेख़बर मिलता कोई तो,वो बनाते बेवकूफ़ ।
  • बाख़बर मिलता तो कहते,बेख़बर क्यों ना हुए।।
  •  
  • फैली जब-जब आग नफ़रत की,तो इनके घर जले।
  • पर कभी लपटों की जद में,उनके घर क्यों ना हुए।।
  •  
  • शैतानियत का हर हुनर,अब सीखने की होड़ है।
  • इन्सान में इन्सानियत के,कुछ हुनर क्यों ना हुए।।
  •  
  • भरपूर होता दिख रहा है, हर बुराई का असर।
  • नेक बातें भी हैं पर,उनके असर क्यों ना हुए।।
  •  
  • जो ज़माने को कुचलने की लिए हसरत खड़े हैं।
  • इस समय की ओखली में,उनके सर क्यों ना हुए।।
  •  
  • इसको जाना था जहाँ,उसको भी जाना वहीं था।
  • एक थी मंज़िल तो फिर,वो हमसफर क्यों ना हुए।।
  •  
  • 'सिद्ध' ये चक्का समय का,बिन थमे चलता निरन्तर।
  • थे उस पहर जो-जो मजे,वो इस पहर क्यों ना हुए।



  • नेता चाँदी-सोना चाहे ।
  • सब का स्वामी होना चाहे।।
  •  
  • धन के संग जो पाप कमाया।
  • उसको धन से धोना चाहे ।।
  •  
  • नहीं किसी को कुछ भी छोड़े।
  • जग का कोना-कोना चाहे ।।
  •  
  • जिसके बल पर राज करे वह।
  • ऐसा जादू-टोना चाहे ।।
  •  
  • उसके पास वही जाएगा ।
  • जो अपना सब खोना चाहे।।
  •  
  • वह चाहेगा गर चमचे हो ।
  • अगर नहीं हो तो ना चाहे।।
  •  
  • लोग रहें लड़ते आपस में ।
  • ऐसी नफ़रत बोना चाहे।।
  •  
  • उसकी बनी जान पर जानो।
  • उसका शासन जो ना चाहे।।
  •  
  • उसको मानव नहीं सुहाते ।
  • वह तो 'सिद्ध' खिलौना चाहे।



  • मिठी- मिठी बातो से क्या खूब ठगते है लोग।
  • एक ही आग के गोले को कभी सूरज तो कभी चांद कहते है लोग।।
  •  
  • दस्तुर है उगते सूरज को ही यहा सलाम करते है लोग।
  • जरा सा दिन फिका पडा नही के सुबह को ही शाम कहते है लोग।।
  •  
  • हो जिसके सितारे बुलंद सिर्फ उसी के साथ चलते है लोग।
  • गरीबो को बेचारा दौलतवालो को भगवान कहते है लोग।।
  •  
  • बडे मौकापरस्त है बहुत जल्दी बदल जाते है लोग।
  • एक ही अंगुर के गुच्छे को कभी खट्टा तो कभी मीठा कहते है लोग।।
  •  
  • एक ही शहर मे कई कई रंग के चेहरे रखते है लोग।
  • कभी मिलते है अपने बनकर कभी अजनबी से लगते है लोग।।
  •  
  • कब झुकना है कब उठना है खुब ये समझते है लोग।
  • एक ही पत्थर को रोडा तो कभी भगवान कहते है लोग।।
  •  
  • तेरे नामपर भी एक दुजे का खुन पीते है लोग।
  • तू भी देख ले मालिक किस तरह यहाँ जिते है लोग।।
  •  
  • कदम कदम पर क्या खुब कमाल करते हैं लोग।
  • कत्ल भी यहां गले लगाकर करते हैं लेाग।।
  •  
  • सांप भी डसंता नही जिस तरह से डंस जाते है लोग।
  • जंगल मे ऐसा वहशी नही शहर मे जितने शातिर है लोग।

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