hate shayari hindi sms message 2017


  1. Bachhon Ko Chhota Mat Samajh Bas Qad Ko~ Dekhkar, Kaanta Hai Kaafi Laaney Sikandar Ko Farsh Par


  2. Mere Sath Koi Rehta To Mera Hota Mere D~iL Me Kisi Ka Basera Hota Ban Ke Jugnu Me Deta Roshni Usko Chahe Meri Aankho Me Kitna Bhi Andhera Hota. 



  3. Umar raftar se guzar jaye to acha hota wakt ek bar thehar jaye to acha hota mera dil yu bhi tere kadmo me bikhar gaya hain tutke tu ise j~odke jata to acha hota 



  4. Toote Hue Phool Khushboo De Jaate Hain Beete Hue Pal Yaadein De Jaate Hain Koi Pyar Mein Dosti Toh Koi Dosti Mein Pyar De Jaate Hai 



  5. उनकी नफरत बढती गई हमारी मोहब्बत ब~ढती गई वो कही के ना रहे हम खुदा बन गये



  6. आये थे ज़िन्दगी मे वो बहार बनके छा ग~ये थे हम पर वो करार बनके पर दे सके ना सकुन इस दिल को कभी यादो मे हमारे घुलते गये वो ज़हर बनके 



  7. Woh deta hai dard bas humi ko kya s~amjhega woh in ankhon ki nami ko lakhon deewane hon jiske woh kya mehsoos karega ik hamari kami ko



  8. एक दोस्ती की ऐसी सजा मिली है हमे दुबारा किसी से दोस्ती करने की हिम्मत नही हममे हम सोचते है कि उस पल उस दोस्ती को भूला दे पर कभी-कभी उनके दिखते ही याद आ जाती है वो दोस्ती हमे 


  9. Are Pagli tu to samjhi nahi kuchh mere samjhane se samjha kar dekh liya tujhe maine ab har bahaane se aane vala kal mila de tujhe teri chahat se Par na milaye bhulkar bhi kabhi mujh jaise parvaane se - 



  10. दोस्ती दिल नही करता तो खुदा को भी सलाम मत करो बस दिल मे रखो सच्चाई दुनिया से फिर ना डरो अगर नही निभा सकते इस जहाँ मे दोस्ती तो रहम करो उसका नाम बदनाम मत करो




  11. यूँ खफा ना हो हमे मनाना नही आता तुझसे दूर होकर फिर हमे मुस्कुराना नही आता तुम चाँद हो मेरे तुम्हे देखा ही करती हूँ जब रू-ब-रू होते हो हा~ल-ए-दिल सुनाना नही आता एक तेरे प्यार की दौलत से जहाँ सारा खरीद लूँ बस तू अनमोल है जिसकी कीमत चुकाना नही आता हम एक ज़रा है, तुम्हारी रोशनी मे चमकते है जो तुम मुहँ फेर लो फिर हमे जगमगाना नही आता एक तेरा डर जबसे आया है मेरी राह-गुज़र मे भुल बैठी हूँ सब रास्ते कही आना कही जाना नही आता



  12. रब हमे दे दो इस जहानुम से छुटका~रा हम कही भी रह लेंगे बन के अवारा ये दिल तो बन गया है जैसे बेचारा क्योकि यहाँ अब नही होगा अपना गुजारा 



  13. हज़ारो बाद दिया धोखा तुमने हम सब को खडी दीवार नफरत की मिटाये तो भला कैसे किया है वार तू उसको जो अपना समझता था लगा दी आग ~मेरे घर मे बुझाये तो भला कैसे तेरी हर बेरुखी को नज़र अंदाज़ किया हमने दिया जो ज़ख्म इस दिल पर दिखाये तो भला कैसे तेरी क्यारी का ब्यान कब तक करेगा नूर तेरी हर गलती को यूँ ही भुलाये तो भला कैसे हज़ारो बार दिया धोखा तुमने हम सब को खडी दीवार नफरत की मिटाये तो भला कैसे - 



  14. तन्हाईयो से नही हम मेहफिल से डरते है दु~नियाँ से नही हम खुद से डरते है यूँ तो बहुत कुछ खोया है हमने ना जाने क्यो तुम्हे खोने से डरते है 



  15. माना तू मेरे साथ नही पर तेरे होने का एहसास कम भी नही है तू आयेगी ये ऐतबार है मेरा ना आये तो कोई गम भी नही है तेरी तलाश मे निकले है गर्म जज्बा~त मेरे दर्द तो है पर जिस्म पे जख्म भी नही है रोज तन्हाई मे चाँद से गुफ्तगू होती थी आज भी चाँद है गोया हम ही नही है



  16. लज़्ज़त ए अश्क़ का मजा पूछ मुझसे मेरे मेहबू~ब को तडपने मे मजा आता है तेरी नज़रो को मुझसे कोई शिकायत है शायद बिन बादल बरसात मेरे घर भी नही होती हम तो बस युही शायर बन बैठे सुना है उनको भी शौक है गुनगुनाने का अपनी अदाओ से वो तो बेखबर है हमे तो आदत है अदाओ को हर्फ पहनाने का




  17. मन्ज़िल से कोसो दूर सही, पुरदर्द सही रन्जोर सही, ज़ख्मो से मुसाफिर चुर सही, पर किसे कहे ए जान-ए-वफा, कुछ ऐसे घाँव भी होते है जिन्हे ज़ख्मी आप नही धोते, बिन रोये आंसु की तरह सीने मे छुपा कर रखते है, और सारी उम्र नही रोते, नींदे भी मोहैय्या होती है सपने भी दूर~नही होते, क्यो फिर भी जागते रहते है क्यो सारी रात नही सोते अब किसे कहे ए जान-ए-वफा, ये अह्ल-ए-वफा, किस आग मे जलते रहते है क्यो बुझ कर राख नही होते. 


  18. बिछड कर हमसे कभी वो भी तडपा तो होगा चन्द लम्हे ही सही वो भी रोया तो होगा बिनई चशम की खो गयी तीर रह कर उसके नैनो को भी अशको ने भिगोया तो होगा दिलके रिश्ते भी किस कद्र अजीब होते है तुझको भी सनम किसी रिश्ते ने ठुकराया तो होगा लब खामोश होंग़े किस्मत मे तन्हाई होगी तब ही वो मेरे प्यार मे डूबा तो होगा तेरे नसीब मे है आखिरी सांस जब तक जहाँ भी ~जाओगे वहाँ प्यार का साया तो होगा 


  19. मै दिल पर जब्र करूंगी तुझे भुला दुंगी मरूंगी खुद भी तुझे भी कडी सज़ा दुंगी ये तीरगी मेरे घर का ही क्यो मुक़द्दर हो मै तेरे शहर के सारे दीये बुझा दुंगी हवा का हाथ बताऊंग़ी हर तभी मे हारे शजर से परींदे मै खुद उडा दुंगी वफा करूंगी किसी सोगवार चेहरे से पुरानी क़ब्र पर क़ुतबा नया सजा दुंगी इसी ख्याल मे गुज़री है शाम-ए-दर्द अक्सर के दर्द हद से बढेगा तो मुस्कुरा दुंगी तू आसमान की सुरत है गिर पडेगा कभी ज़मीन हूँ मै भी मगर तुझको आसरा दुंगी बढा रही है मेरे दुख निशानियाँ तेरी~ मै तेरे खत तेरी तस्वीर तक जला दुंगी बहुत दिनो से मेरा दिल उदास है इस आईने को कोई अक्स अब नया दुंगी


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