Latest gazal 143 in hindi


  • तन्हाइयो में मुँह से निकले चार शब्द
  • दुनिया कहने लगी तराना हो गया है
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  • फिर मासूमों का कत्ल कर वो हँस रहा
  • इस्लाम तो बस इक बहाना हो गया है
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  • मुख खोलकर हर बार उगलता है जहर
  • महफिल में उसका आना जाना हो गया है
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  • बात है कल ही की आया था जलजला
  • आप कहते हैं मौसम सुहाना हो गया है
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  • मन्दिर के दर भीख माँगते बच्चे दिखे
  • बचपन भी कितना सयाना हो गया है





  • मियाँ तुम शेर हो अगर तो शेर कहो शेर की तरह
  • सियासी हथकंडे शायरी में यूँ अपनाये नहीं जाते
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  • गर होता है अन्याय तो आग उगलती है लेखनी
  • तमगे बेवजह विरोध में यूँ ही लौटाए नहीं जाते
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  • झुकता है हिन्दोस्ताँ जिसकी याद में अब भी
  • वो कलाम खुद ही बनते हैं बनाये नहीं जाते
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  • हो हामीद या भगत शहीद कहलाते हैं जवान
  • वो हिन्दू या मुसलमान कहलाये नहीं जाते
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  • हो बशीर या राहत शायरों की है कहाँ कमी
  • फनकार दुश्मन के घर से बुलवाये नहीं जाते
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  • अन्धकार मिटाने का तरीका है बड़ा सरल
  • जलाये जाते हैं चिराग बुझाए नहीं जाते



  • हो बलि या क़ुरबानी बस काटी जाती है गर्दन
  • इन बेजुबानों का क्या कोई खुदा नहीं होता ....
  • बन्दे खुदा के अब खुद ही बनने लगे खुदा
  • ईश्वर के दर पे अब कोई सज़दा नहीं होता .......
  • धार्मिक उन्माद में हर कोई शख्श सराबोर है
  • युवाओं में देशप्रेम का अब जज़्बा नहीं होता .......
  • धर्म के नाम पर अब महज़ होता है कत्लेआम
  • डर से खुदा के अब कोई ख़ौफ़ज़दा नहीं होता



  • जो बिखेरे थे फ़िज़ाओं में चन्द नफरतों के बीज
  • मासूम नस्ल को वो बन के खरपतवार खा गए
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  • क़त्ल और वहशियत को धर्म कहने लगे हैं लोग
  • धर्म को सियासत औ धर्म के ठेकेदार खा गए
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  • सड़कों में तड़पती रही वो औरत की नग्न देह
  • करके आबरू उसकी गिद्ध तार तार खा गए
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  • सुचना तंत्र में संस्कार की अब दिखती नहीं झलक
  • विज्ञापन औ चलचित्र, अश्लीलता के संसार खा गए
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  • पैरों से कुचले जाना ही जिनका होता रहा है ह्स्र
  • गुलशन को वो फूल बन के आज खार खा गए
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  • इस पार जो कहलाते हैं सौदागर मौत के
  • वज़ीर बन के आज वो उस पार आ गए
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  • सिखाया था जिसको बेरहमी से क़त्ल करने का हुनर
  • वो मिटा के आज उसका खुद का ही परिवार खा गए




  • परदे में होता है सभी कुछ ,प्यार भी इक़रार भी
  • बाजार में इसको दिखाना ,अच्छा नहीं लगता
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  • जिस्म को ढकने की खातिर ,पहरावों को किया था इज़ाद
  • झाँकने लगे जिस्म वो वस्त्र पहनाना, अच्छा नहीं लगता
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  • मंदिरों के द्वार पर, देख भूखों के कतार
  • करोड़ों का वो भोग लगाना ,अच्छा नहीं लगता
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  • क्या विज्ञापन, क्या गाने, फिल्मे, परोसते अश्लीलता
  • साथ बच्चों को टी वी दिखाना, अच्छा नहीं लगता
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  • शहीद होते हैं जंग में तो, कटते भी हैं सर वहाँ
  • कटे सिरों को हाथों में नचाना, अच्छा नहीं लगता
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  • मान दिया ओहदा दिया, इस मुल्क ने तुमको मगर
  • दुश्मन को घर में यूं बुलाना, अच्छा नहीं लगता
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  • चौखट पे जिसके सर्द से, मर गया वो रात में
  • उस दर पे चादर का चढ़ाना, अच्छा नहीं लगता


  • इस मुल्क में कई पंडित औ मुल्ला ,इमाम हैं
  • बेवजह के मुद्दे यूं उठलाए नहीं जाते
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  • रिस रिस के जख्म रिश्तों के जो नासूर बन जाएं
  • वो जख्म यूं हर एक बार सहलाये नहीं जाते
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  • देश क्या इंसानियत के सबसे बड़े दुश्मन
  • दावतों में यूं ही बुलवाये नहीं जाते
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  • जिहाद के नाम पर खूं बहाना जिनका बन गया पेशा
  • वो यज़ीद कभी पैगम्बर भी कहलाये नहीं जाते
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  • कुचल दिए जाते हैं ज़हरीले नागों के भी फन
  • वो आस्तीनों के सांप दूध से नहलाये नहीं जाते
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  • बस दहशतों के साये में पले हैं जाँ लेना ही जाना
  • अमन और शान्ति के हुनर वहाँ सिखलाये नहीं जाते
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  • इस वतन में सभी हामिद और अब्दुल कलाम हैं
  • धर्म के नाम पर अब लोग बरगलाये नहीं जाते




  • गौर से देख, चेहरा समझ 
  • आइने को, न आइना समझ
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  • सीख लेना, सियासत का खेल 
  • सादगी- संयम, अपना समझ
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  • गर्व की, कब उडी कोई पतंग 
  • बेरहम बहुत , आसमा समझ
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  • शोर गलियों में ,नाम दीवार
  • चार दिन का है , फरिश्ता समझ
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  • चाहतों को लुटा खुले हाथ 
  • नेमत खुदा यही , अता समझ
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  • स्याह अँधेरा रौशन करे जो 
  • ज्ञान को सर झुका 'दिया' समझ
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  • रात हो, जुल्म , खत्म होती है 
  • घूमता पास , सिरफिरा समझ
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  • लूटने वाले चल दिए लूट 
  • शोर करना, कहाँ-कहाँ समझ
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  • पेड़ की छाँव ,बैठ तो 'सुशील'
  • सोच 'माजी', उसे तन्हा समझ






  • क्या होना था क्या हो गया
  • कोशिशें तमाम नाकाम रही
  • दिल को समझाने की मगर
  • था इकरार लो प्यार हो गया
  • सुना मोहब्बत तो बदनाम है
  • पर साजिश थी बाली उम्र की
  • तमाशबीन बनी रही दुनियाँ
  • प्यार बड़ा व्यापार हो गया
  • पूछा आशिक से जब हमने
  • जिंदगी और प्यार की दूरी
  • बोला जिंदगी के सफर में
  • प्यार मंजिल पार हो गया
  • परिंदा बच निकला तूफानों से
  • देखने प्रेम की दुनियाँ लोगों
  • गुलाम थी मोहब्बत पैसों के
  • लाचार परिंदा बेजां हो गया




  • बुलन्दी जिसकी फ़ितरत है,और जीवन में आशा है
  • उसी के हक़ में बाज़ी है,उसी के वश में पांसा है
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  • हमेशा दिल की सुनता हूँ;और दुर्गम पथ चुनता हूँ,
  • ज़िन्दगी शर्तों पे जीता यही मेरी परिभाषा है
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  • ये कैसी ज़िन्दगी उलझी वक्त की धार में मेरी,
  • घटा है हर तरफ लेकिन मेरा मन प्यासा-प्यासा है
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  • कई चेहरे हैं चेहरों पर;ये ऐसा दौर है यारों,
  • जिसे रहबर समझता हूँ;वही क़ातिल बन जाता है
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  • उन्हें भी शाख से पत्तों सदृश मैं टुटते देखा,
  • बहुत ऊँची है जिनकी हद मगर दिल में हताशा है
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  • जब अपनें पथ से हटता है;कई टुकड़ों में बँटता है,
  • मूल में जब-जब ठहरा दिल;नये रस्ते तराशा है




  • दिलों को जोड़कर नफ़रत मिटा दे ओ मेरे मौला
  • कोई भी हो पुराना ग़म भुला दे ओ मेरे मौला
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  • कोई हिन्दू,कोई मुस्लिम,यहाँ पर सिक्ख है कोई,
  • मगर मुझको यहाँ इंसा बना दे ओ मेरे मौला
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  • धरम के नाम पर अब आशियाँ न फ़िर जलायें हम,
  • दिलों को कूप से सागर बना दे ओ मेरे मौला
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  • ज़ुबाँ पे कुछ,दिलों में कुछ और करनी में कुछ जिनके,
  • मेरे गुलशन को ऐसों से बचा ले ओ मेरे मौला
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  • कुलाचे भर रहे हैं कुछ यहाँ सूरज को छूनें की,
  • वो नादाँ हैं,वहम उनका मिटा दे ओ मेरे मौला





  • किसान मर रहे हैं बचा लो तो मान लूँ.
  • आतंक से भारत को बचा लो तो मान लूँ.
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  • मैं जानता हूँ संस्कृति के रहनुमा हो तुम,
  • औरत की आबरु को बचा लो तो मान लूँ.
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  • बनवा रहे हो मन्दिरें ग़ैरों के मुल्क में,
  • ग़र राम के मन्दिर को बना दो मान लूँ.
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  • व्यक्तित्व से सारे जहाँ को जीत लिया है,
  • अब पाक पे जादू को चला दो तो मान लूँ.
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  • हिंदी से सारे विश्व को अवगत करा रहे,
  • भाषा जो राष्ट्र की है बता दो तो मान लूँ.






  • कोहरे में ना सूझे कहीं आजकल|
  • बर्फ सी गल रही है जमीं आजकल||
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  • ओस की बूँदें फैली फ़िजाओं में हैं,
  • सूर्य दिखता नहीं है कहीं आजकल|
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  • ठिठुर सी गयीं वादियाँ ठण्ड से,
  • ज़िन्दगी दर-ब-दर हो गयी आजकल|
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  • आग के सामनें घण्टों बैठा मगर,
  • कँपकँपी है कि जाती नहीं आजकल||







  • एक ही नूर को अल्लाह-राम बना लिया|
  • कंकण-पत्थर जोड़कर भगवान बना लिया|
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  • असत्य अंगीकार व पुरुषार्थ का परित्याग कर,
  • याचना में उन्नति की राह बना लिया|
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  • त्यागकर करुणा,दया,उदारता और प्रेम को,
  • माया-लोभ के तले ईमान झूका लिया||
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  • सहज समाधि छोड़कय अग्यानता के मोह में,
  • कहत कबीर जग ने अमर हस्ती मिटा लिया|
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  • *याचना(मन्दिर-मस्जिद में मन्नतों हेतु भटकना)








  • बेख़ुदी में आजकल बहक रहीं हूँ मै|
  • दिलवर तुम्हारी आब से चमक रही हूँ मैं||
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  • रखा है तुने खुद को ऊसूलों में बाधकर,
  • शोले की तरह जान-ए-मन दहक रहीं हूँ मैं|
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  • हँसी लगे नजारे , प्यारा लगे ये जीवन,
  • तेरे हर ख़्यालात पे चहक रही हूँ मै||
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  • देखा यूँ तुने 'निर्भय' इज्ज़त की नज़र से,
  • गुलशन की तरह बेसबब महक रहीं हूँ मैं...






  • बारिस की फूहार देखिये|
  • मौसम का खुमार देखिये||
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  • बादल की अँजूरी से अमृत की,
  • फ़िजा मे बरसती बहार देखिये|
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  • फूहार पाकर के महकी है धरती,
  • प्रकृति में अद्भूत निखार देखिये||
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  • मिला है सुकूँ आज 'निर्भय'मुझे,
  • चँद बूँदें हथेली पे उतार देखिये|





  • तेरी रुशवाई ने हमदम किया नाशाद मुझको|
  • किया बेकद्र पर तुझसे नहीं कुछ दाद मुझको||
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  • जबकि याद करके आज मेरा दिल परेशाँ है,
  • तू तो तुरफत पे ना आयी,ना किया याद मुझको||
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  • शोर करती वही पायल वही कंगन की खनखन,
  • वही गुज़रा जमाना अब तलक है याद मुझको|
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  • वो तेरा बाग में आकर मेरे सीनें से लग जाना,
  • और वो शर्म से नज़रें झूकाना याद मुझको||
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  • तेरा वादा था मिलकर प्यार की कश्ती चलायेंगे,
  • भूली सब बात तुम जबकि अभी तक याद मुझको|
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  • ज़मानें से भी लड़नें को था मैं तैयार "निर्भय",
  • छोड़ दामन तुने ज़ालिम किया बर्बाद मुझको||
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  • सिसक कर रो ना देना जिक्र में जब नाम आयें,
  • फिक्र मत कर कब्र नें कर दिया आबाद मुझको...





  • बेसबब-बेकरार बनकर बैठा था|
  • घण्टों से तन्हा बीमार बनकर बैठा था||
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  • बारिस बेजोड़ थी उस रात फिर भी,
  • सूनी सड़क पर काँपती दीवार बनकर बैठा था|
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  • आहट मेरी पाकर चौक गया था पलभर,
  • गुमसुम,लावारिस,लाचार बनकर बैठा था||
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  • 'भीगो मत' कहा मैने धीरे से ज्योंहीं,
  • पास आया ज्यूँ इन्तजार करकर बैठा था






  • तुम्हारे दिल के मकाँ सा सूकूँ और कहाँ,
  • वहीं पर आजकल रहते हैं हम बेफिक्र होकर|
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  • इन्तजार है इज्हार-ए-मोहब्बत का तुमको,
  • तभी तो गैर से रहते हो हमसे मित्र होकर||
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  • दिल तो चाहता है तू जिगर के पास रहे,
  • मग़र बढ जाती है धड़कन क्यों जानें तीब्र होकर|
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  • अगर है प्यार तो ये दूरियाँ नहीं जायज़,
  • ना बैठ भाग्य की दहलीज़ पर बेफिक्र होकर||
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  • ताज़-ओ-तख्त की वो माँग क्या करे "निर्भय"
  • नाम गुज़रा हो जिसका लब से तेरे जिक्र होकर







  • जीवन-सफर में लक्ष्य का ग़र एहतमाँम होगा|
  • आसमाँ की दहलीज पर वो कारवाँ होगा||
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  • बनते नही मोती यहाँ हर बूँद आसमाँ के,
  • बनता वही जो सीप के भीतर गिरा होगा|
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  • जीवन है बहुँत छोटा,निश्तेज क्यों जियें|
  • अपनें लिए जिया तो क्या खाक जी लिए||
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  • पाता वही साम्राज्य जो पल-पल लड़ा होगा|
  • क़जा से जो यहाँ लिपटा क़फ़स बन कर पड़ा होगा||
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  • यूँ तो सुने किस्से कई सौभाग्य के क्षणों के,
  • पायेगा क्या जो भाग्य के पीछे पड़ा होगा|
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  • सौभाग्य भी चलता है उन्हीं के इसारों पर,
  • जो कर्म के सिद्धान्त पर 'निर्भय' खड़ा होगा||
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  • *एहतमाँम(व्यवस्था),क़जा(भाग्य),क़फ़स(जाल)





  • अपनें ख्वाब के तासीर को आली रखें|
  • ज़मीर से अपनें इश्क़-बफादारी रखें||
  • हँसते चेहरों को मिलते यहाँ हँसते हुए चेहरे,
  • गैर-वाजिब है सुरत-ए-भाव बेचारी रखें|
  • जो दिल में ज़हर और जुबाँ पे सुधा रखतें हैं,
  • कह दो यूँ ना तवियत वो दो-धारी रखें||
  • सौ बार गिरकर उठनें का हौसला रखते हम,
  • कहाँ सम्भव भला ज़मीर हम बाजारी रखें|
  • तुम्हें जब खुद पे यकीं है नहीं तो बता'विनोद'
  • कैसे खुदा यकीं वादों पे तुम्हारी रखे





  • पश्चिमी कायदों को इख्तियार करतें हो|
  • नासमझ हो अरे ! सड़कों पे प्यार करते हो||
  • सभ्यता,संस्कृति और पहचान को मिटाकर,
  • किस इल्म पे कहोगे कल तुम नाज़ करते हो|
  • लैला-मज़नू सोचकर सर्मा गये होते यहाँ,
  • नादानीयाँ आजकल जो बार-बार करते हो||
  • गैर-वाजिब जल्वों की इक्तिजा की खातिर,
  • ऐहतमाम की अहमियत को दरकिनार करते हो|
  • 'विनोद' बुजुर्गों की अहमियत को भूलकर तुम,
  • खुदगर्ज हो,रिश्तों को तार-तार करते हो






  • गर्दिश में सितारों को आज़माया नही जाता|
  • तुरफत पे समाँ इश्क के जलाया नहीं जाता|
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  • दामन लहूँ में डूबकर ना लाल हो जाये,
  • नश्तर की तेज धार को सहलाया नहीं जाता||
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  • बेशक बुझा दो जिन्दगी की लौ अंधेरों में,
  • जो आग है सीनें में बुझाया नहीं जाता|
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  • बच के रहो दुनियाँ वालो ना खाक हो जाओ,
  • तिनकों से दहन काबू में लाया नहीं जाता||
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  • दिल सोचता है तोड़ दूँ खामोंशियों के पल,
  • पर क्या करें जो राज है बताया नहीं जाता|
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  • क्या-क्या मैं कर चूका हूँ तुम्हें याद है "विनोद"
  • हर बात पे यूँ शर्त लगाया नहीं जाता







  • जब शासक के संवादों में निर्भय राक्षस की छाप मिले|
  • जब क्रुर के सिर पर ताज नम्रता को जीवन अभिशाप मिले||
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  • जब स्वार्थ-सिद्ध के अहंभूत समर्थ शक्ति दिखलाता है|
  • जब लोभ की लंका पलती है,वैभव रावण ले जाता है||
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  • जब सत्ता के गलियारों से मुरली की तान गुज़रती है|
  • एक बनवासी के बाण देख दंभी की दशा बिगड़ती है||
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  • कर सृजन स्वयं आत्मा अपनी ईश्वर विधान जब रचता है|
  • तब कंस हिरण्य या खुद रावण मरनें से कहाँ वो बचता है







  • निष्क्रिय और बेजान सी हो गयी है|
  • धरती रेगिस्तान सी हो गयी है||
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  • ऐ बादल ! तेरे हठी मिजाज़ से,
  • किसानों की आत्मा लहूलुहान सी हो गयी है|
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  • सूख गये तालाब और नदियाँ,
  • पशु-पक्षियाँ निष्प्राण सी हो गयीं है||
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  • तैर रहे आकाश में बेवजह क्यूँ "निर्भय",
  • बरसो भी फिजा श्मशान सी हो गयी है







  • हर मोड़ पे दिखता है एक पैगाम आदमी|
  • आगाज़ उसी से यहाँ अंजाम आदमी||
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  • पुरखों नें जो बताया हमें सच ही तो है,
  • लगता है कभी दिन,यहाँ पे शाम आदमी|
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  • कैसे कहें कि सब यहाँ पे पाक साफ है,
  • ईमाँ कहीं पे है,कहीं बेदाम आदमी|
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  • जो जीतता रहा है जुल्म से यहाँ "विनोद",
  • उसको बताओ होता है क्या आम आदमी||
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  • ईक दामिनी की मौत ने ये हमको बताया,
  • हो जाता है कैसे यहाँ सरनाम आदमी







  • पसीनें से तर-बतर हैं आज गरमी से|
  • जिन्दगी दर-बदर है आज गरमी से|
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  • सुरज की तपन से बेचैन है तन-मन,
  • असह्य मँज़र है आज गरमी से|
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  • हर शक्स बेहाल है मौसम-ए-मिजाज़ से,
  • फिर भी बच्चे बेअसर हैं आज गरमी से||
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  • वे तैर रहें हैं नदियों में बाखुशी "निर्भय",
  • बेफिक्र-बेख़बर है आज गरमी से|






  • जिन्दगी नें पथिक से कहा एक दिन,
  • मुझको कम ना समझ आजमाकर के देख|
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  • ग़म की गायब करुँ मैं हँसी खोखली,
  • सोच में क्यूँ पड़ा मुस्कुराकर के देख||
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  • थक गया है या लोगों का डर है तुझे,
  • तू अकेला ही पर्वत हिलाकर के देख|
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  • लोग पत्थर गिराते हैं तुझपे अगर,
  • एक तिनके से तारे गिराकर के देख||
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  • तू मेरा चाँद है मै तेरी चाँदनी,
  • मुझसे रौशन जहाँ को बनाकर के देख|
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  • आसमाँ भी झूकेगा तेरे सामनें,
  • अपनें सर को तू ऊँचा उठाकर के देख




  • एहसास हुआ कि शायद वह आया है
  • क्यो याद आता है जिसने सिर्फ रुलाया है

  • दिल तोडना ही था तो और भी बहाने थे
  • इल्जाम बेबफाई का क्यों लगाया है

  • सीने मे सहतेे रहे दर्द औ सितम
  • हंसने की चाहत ने हमे खूब रुलाया है




  • कोशिशें नाकाम हो गई
  • तेरा ख्याल दिल से जाता नही
  •  
  • कैसी चालें चलती है दुनिया
  • सीधी राह चलना इसको आता ही
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  • सोचते हैं दिल को बहलाएं कहीं
  • पर इसको अब कोई भाता नही
  •  
  • घावों को कुरेदता है हर कोई
  • मरहम इन पर कोई लगाता नही
  •  
  • भटक चुके हैं अब बहुत हम
  • गले अब हमें कोई लगाता नही
  •  
  • महफिल मे इस तरह मुस्करातें हैं हम
  • जैसे अब हमे कोई सताता नही




  • कौन कहता है पास ही मै रहो
  • इश्क मे सबसे अहम दूरी है

  • लोग कहते हैं नही मिलते
  • काम कुछ और भी जरूरी है

  • लोग कहते हैं अब नही हंसते
  • थोडा रोना भी तो जरूरी है

  • जिन्दा रहना है जहां मे अगर
  • हर सितम सहना भी जरूरी है

  • तुम ये कहते हो भूल जाओ हमें
  • चाहना तुम्हे भी मजबरी है




  • मय नही मै हमसफर. हूं
  • मुझको लेकर साथ चल.
  • मेरा ही लेकर सहारा ,
  • जिया सारी उम्र है,
  • मै दबा हूं तेरे गम की
  • ,मत मुझे बदनाम कर.मय नही......
  • लाख रुसबा लोग करले
  • फिर भी मै आबाद हूं
  • रख लगा के लब से मुझको
  • मत मुझे बरबाद कर. मय नही......
  • मयखाना है घर खुदा का
  • करले सजदा तू यहॉं
  • रख जला कर इसकी शमा
  • तू इसे गुलजार कर




  • भोर होते ही ,क्यो सो गई है जिन्दगी.
  • किस तरह के सघंर्ष मे,खो गई है जिन्दगी.
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  • बढती हुई महंगाई मै,क्यो फिकर मे हो गई जिन्दगी.
  • दो जून रोटी की जुगाड मे,क्यो रो गई है जिन्दगी.
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  • एक सपना पूरा करने की चाहत मे,
  • अरमान सारे धो गई है जिन्दगी.
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  • आस निराश के दो रंगो मे
  • कैसी बदरंग हो गई है जिन्दगी.






  • हंसते को रूलाते हैं सब ही
  • रोते को हंसाओ तो जाने
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  • ठुकराते ,अपनो को सब ही
  • सीने से लगाओ तो जाने
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  • चलते को गिराते हें सब ही
  • गिरते को उठाओ तो जाने
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  • फूलों को चुनते शाखों से
  • कॉंटों को उठाओ तो जाने
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  • प्यार मिटाते दुनिया से
  • नफरत को मिटाओ तो जाने







  • पटाखो कि दुकान से दूर हाथों मे,
  • कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा...
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  • एक गरीब बच्चे कि आखों मे,
  • मैने दिवाली को मरते देखा.
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  • थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की...
  • पर उन्ही पूराने कपडो को मैने उसे साफ करते देखा.
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  • तुमने देखा कभी चाँद पर बैठा पानी?
  • मैने उसके रुखसर पर बैठा देखा.
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  • हम करते है सदा अपने ग़मो कि नुमाईश...
  • उसे चूप-चाप ग़मो को पीते देखा.
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  • थे नही माँ-बाप उसके..
  • उसे माँ का प्यार और पापा के हाथों की कमी मेहंसूस करते देखा.
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  • जब मैने कहा, "बच्चे, क्या चहिये तुम्हे"?
  • तो उसे चुप-चाप मुस्कुरा कर "ना" मे सिर हिलाते देखा.
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  • थी वह उम्र बहुत छोटी अभी...
  • पर उसके अंदर मैने ज़मीर को पलते देखा
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  • रात को सारे शहर कि दीपो कि लौ मे...
  • मैने उसके हसते, मगर बेबस चेहरें को देखा.
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  • हम तो जीन्दा है अभी शान से यहा.
  • पर उसे जीते जी शान से मरते देखा.
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  • नामकूल रही दिवाली मेरी...
  • जब मैने जि़दगी के इस दूसरे अजीब से पहेलु को देखा.
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  • कोई मनाता है जश्न और कोई रेहता है तरस्ता...
  • मैने वो देखा..जो हम सब ने देख कर भी नही देखा.
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  • लोग कहते है, त्योहार होते है जि़दगी मे खूशीयो के लिए,
  • तो क्यो मैने उसे मन ही मन मे घूटते और तरस्ते देखा?





  • यह जिस्म तो किराये का घर है…
  • एक दिन खाली करना पड़ेगा…||
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  • सांसे हो जाएँगी जब हमारी पूरी यहाँ …
  • रूह को तन से अलविदा कहना पड़ेगा…।।
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  • वक्त नही है तो बच जायेगा गोली से भी
  • समय आने पर ठोकर से मरना पड़ेगा…||
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  • मौत कोई रिश्वत लेती नही कभी…
  • सारी दौलत को छोंड़ के जाना पड़ेगा…||
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  • ना डर यूँ धूल के जरा से एहसास से तू…
  • एक दिन सबको मिट्टी में मिलना पड़ेगा…||
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  • सब याद करे दुनिया से जाने के बाद…
  • दूसरों के लिए भी थोडा जीना पड़ेगा…||
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  • मत कर गुरुर किसी भी बात का ए दोस्त…
  • तेरा क्या है…क्या साथ लेके जाना पड़ेगा…||
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  • इन हाथो से करोड़ो कमा ले भले तू यहाँ …
  • खाली हाथ आया खाली हाथ जाना पड़ेगा…||
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  • ना भर यूँ जेबें अपनी बेईमानी की दौलत से…
  • कफ़न को बगैर जेब के ही ओढ़ना पड़ेगा…||
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  • यह ना सोच तेरे बगैर कुछ नहीं होगा यहाँ ….
  • रोज़ यहाँ किसी को “आना” तो किसी को “जाना” पड़ेगा…






  • सहारा पाक़-दामानी का मैं छोड़ूँ भला कैसे !
  • ग़ुरुर अपना ख़ुद अपने सामने तोडूँ भला कैसे !!
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  • बदल कर बिस्तरों को अक्सर ही बिछती रही है जो,
  • बिना धोये उसी चादर को मैं ओढूँ भला कैसे !!
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  • जिसे बदनामियों के ख़ौफ़ में जीना लगा आसान,
  • मैं अपना नाम तक उस नाम से जोडूँ भला कैसे !!
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  • कटे हैं हाथ मेरे इश्क़ में फूले हुए हैं पाँव,
  • तुझे पानें कि खातिर होड़ में दौड़ू भला कैसे 





  • ये तो हालात हैं ! मनते हैं रूठ जाते हैं
  • हम भी उनमें से नहीं हैं जो टूट जाते हैं
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  • हम नहीं कहते तरक्की की ओर मत भागो
  • उनको भी साथ में ले लो जो छूट जाते हैं
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  • पुण्य के पुष्प कमाओ इधर नहीं देखो
  • ये घड़े पाप के भरते ही फूट जाते हैं
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  • जागती आँखों के सपने ही मुक़म्मल होंगे
  • नींद के ख्वाब तो जगते ही टूट जाते हैं
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  • जाने कैसे यकीं हर बार मैं कर लेता हूँ
  • उनके वादों पे जो हरदम ही झूठ जाते हैं
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  • ये तो बस माँ की दुआओं का असर है हमपे
  • हम जहां जाते हैं महफिल ही लूट जाते हैं




  • मौसम के रूठने की ख़बर अज़नवी न थी ,
  • लेकिन फ़िज़ाँ में इसकी कहीं सनसनी न थी ।
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  • उपवन उजाड़ के वो मेरा क्यों चली गईं ,
  • मेरी तो आँधियों से कभी दुश्मनी न थी ।
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  • बेमानी हो गये थे मदारी के करिश्मे ,
  • चेहरों पे नन्हे मुन्नों के आई हँसी न थी ।
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  • आई थी एक बहार मेरी बनके हमसफर ,
  • ये ख़्वाब था हंसीन मगर ज़िन्दगी न थी ।
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  • ये नूर था ख़ुदा का मैं उस दर पहुँच गई ,
  • जिस दर से इस जहाँ में विभा वापसी न थी ।






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