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  • शाम मुझसे नजर मिलाए तो।
  • रात ख्वाबों को फिर सजाए तो॥
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  • काँटे हँस -हँस के चुन लूंगी मैं,
  • मुझे मिलें गुलों के साए तो।
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  • ग़ैरों पर उठती उंगलियों से कहो,
  • उन्हें दरपन कोई दिखाए तो।
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  • खुद -ब -खुद देवता हो जाएगा,
  • पहले दिल में कोई समाए तो।
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  • मैंने दुनिया को खूब परखा है,
  • मुझे भी दुनिया आजमाए तो।




  • इस मसले का हल किस तरह निकाला जाए।
  • ख़ार को कैसे भला गुलों में अब ढाला जाए।
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  • दीया जला के मैं चौखट पे रख तो दूं लेकिन,
  • गली के छोर तक तय हो कि उजाला जाए।
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  • चलो अच्छा है सोचते हो मुस्तक़बिल के लिए,
  • बिगड़े हालात पर पहले तो सम्हाला जाए।
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  • क्यों न आएगा चैन -अो अम्न का मौसम बोलो,
  • प्यार के पंछी को बस प्यार से पाला जाए।
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  • उनके वादे, ज़फा, रूसवाईयाँ, तनहाई अौ फरेब,
  • 'शोभा' किस -किस को अब घर से निकाला जाए





  • धूप की साजिश ने तन झुलसा दिया।
  • इस जुर्म को पेड़ों ने भी हवा दिया।
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  • क्या कहें इस दौर की खाता - बही ने,
  • स्वार्थ जोड़ा, प्यार को घटा दिया।
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  • जिसकी अाँखों में घटाअों का हुनर था,
  • वक्त ने उसे रेत का दरिया दिया।
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  • शोख़ किरणों की मुजस्सिम आमदी ने,
  • झील को सरे शाम बहका सा दिया।
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  • उस शज़र की फिक्र कुछ करिए जनाब,
  • उम्र भर जिसने तुम्हें साया दिया।
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  • कुछ तो मजबूरी रही होगी " शोभा "
  • उसने मेरा ख़त मुझे लौटा दिया॥
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  • रह-रहकर परदे की ओट से कुछ- कुछ झाँकती आँखें,
  • मन-ही-मन कुछ कहती, कुछ-कुछ छिपाती-सी आँखें.
  • मुदित मन से खिली-खिली कुछ मुसकराती-सी आँखें,
  • दबी-दबी-सी सकुचाती, कुछ-कुछ हिचकिचाती-सी आँखे.
  • महुए की ओट से झाँकती हुई कुछ-कुछ शर्माती-सी आँखें,
  • सिर पर गगरी रखे इठलाती-सी कुछ बलखाती-सी आँखें.
  • साड़ी के पल्लू को मुँह में दबाए कुछ सकुचाती-सी आँखें,
  • बिना बात देख-देख खुली-खुली खिलखिलाती-सी आँखें.
  • सोलह श्रृंगार से सजी-धजी कुछ-कुछ इठलाती-सी आँखें ,
  • नेह के आमंत्रण से भरी-भरी कुछ-कुछ लजाती-सी आँखें.
  • प्रणय-अवमानना से उपेक्षित क्रोध से तमतमाई आँखें ,
  • बार-बार देख मुझे हँसती-हँसाती-सी मनुहारी-सी आँखें .





  • भूखे कुनबे को लेकर किधर जायेंगे।
  • भीख लेंगें नहीं चाहे मर जायेंगे।।

  • जिन्दगी से तो नाराज है जिन्दगी।
  • मौत माला लिये है उधर जायेंगे।।

  • अच्छे दिन के तो वादे रफू हो गये। 
  • बीते दिन दे दो हालत सुधर जायेंगे।।

  • बीच में से हमारे जो ऊपर उठे। 
  • देंगें तकरीर हक पूरा कर जायेंगे।।

  • मौत की डोरियां जिनके हाथों में हैं।
  • मंच पर बैठे वे सब नजर आयेंगे।।

  • पन्ने इतिहास के फिर न खूनी करो। 
  • आगे पढ़ने पे झुक खुद ही सर जायेंगे।।

  • खूनी मंजर न नफरत के रोके अगर।
  • दशहतों के ही शामों सहर आयेंगे।।

  • दावतों से न नफरत को बिखराइये।
  • सब ओर मंजर नजर आयेंगे।।
  •  




  • हवायें कितनी लगी बहने गरम।
  • चोटियां इसको लगी कहने वहम।।

  • वजन जूतों का बढ़ाने वे लगे।
  • देख तो लें हम गये कितने सहम।।

  • एक ही उस्ताद के शार्गिद है।
  • लगे लड़ने नहीं आती कुछ शरम।।

  • हिलाई जो नींव खुद हिलने लगे।
  • हो रही मीनार खुद पर बे रहम।।

  • आदमीं में जानवर उठनें लगे।
  • बे असर इन्सानियत की है कसम।।
  •  



  • इतना प्यार हम दम आपस में हम करें।
  • कांटा अगर तुम्हे चुभे तो आह हम भरें।।

  • आपकी बातें तो अच्छी लगती हैं हमें।
  • पर गुफ्तगू में भी कम पेंचों खम करें।।

  • मेरे अफसानों में रहती आह गम की है।
  • उनको सुनके आप भी क्यों आंख नम करें।।

  • मुल्क परस्तों के किस्से जोश भरते हैं।
  • आप सुनते ही नहीं हैं कुछ शरम करें।।

  • भूख अगर आपसें कुछ मांगती हैं दें।
  • ऐसे नजारों के लिये दिल नरम करें।।





  • रास्ता सीधा नहीं, अवरोध मिलेगा।
  • क्रांति में अन्याय का प्रतिशोध मिलेगा।।

  • आत्मा है जिनमें, सत्याग्रह से झुकेंगे।
  • क्योंकि उसमें सत्य और अनुरोध मिलेगा।।

  • यंू तो ज्ञान विश्व के हरेक कदम पर है।
  • ज्ञान लेंगे वहीं जिनमें बोध मिलेगा।।

  • प्रयोग की शालायें दुहराती हैं क्रियायें।
  • जाओं प्रकृति में तो वहां पर शोध मिलेगा।।

  • एक ही आवाज हो, हों एक ही कदम।
  • जीतोगे तुम्हीं भले कुछ प्रतिरोध मिलेगा।।

  • आदमी निर्भय रहे और धैर्य हो उसमें।
  • जानवर में पलायन और क्रोध मिलेगा।






  • पैरों में गरीबी है गिरे दण्ड की तरह।।

  • देखा हैं हमने साधुओं का दिल टटोल कर।
  • प्रवचन और कीर्तन लगे पाखण्ड की तरह।।

  • आते चुनाव गरीबी को फिर घटायेंगे। 
  • बढ़ जायेगी फिर पूस की वह ठण्ड की तरह।।

  • झोपड़ी हमारी झुकी नम्रता सी है।
  • सामने भवन है एक उद्दण्ड की तरह।।

  • मौजूदा वक्त महल सा तन कर खड़ा हुआ।
  • बीता हुआ है खण्डहर के खण्ड की तरह।।
  •  





  • बोये ऐसे दरख्त क्या कहिये
  • हमी पे धूप सख्त क्या कहिये
  • नही मालूम था जीत में हमको
  • छिपी थी एक शिकस्त क्या कहिये
  • दल के दलदल है कई दिल्ली में
  • सभी मौका परस्त क्या कहिये
  • थैलियों को तो न्याय मिनटों में
  • हमपे कसते गिरफ्त क्या कहिये
  • लूटेरो पर मुहर लगा दी है
  • ला रहे उल्टा वक्त क्या कहिये
  • वे वन्दे मातरम तो गाते है
  • करते है माँ को जप्त क्या कहिये





  • राह मंजिल की अब वे मोड रहे है
  • बुत खुद अपने ही बुत को तोड़ रहे है
  •  
  • बदलाब अब कभी किस्मत में आएगा
  • इस इंतजार में ही दुनिया छोड़ रहे है
  •  

  • अच्छे दिनो का दोस्त दिलासा ही रह गया
  • पहले भी गगन अब भी गगन ओढ़ रहे है
  •  

  • है महल तो वही वाशिंदे नए है
  • उनकी हवस मिटाने पत्थर छोड़ रहे है
  •  

  • पटके ही जाते रहे देके दिलासे हम
  • बचपन से ही दिल के टुकड़े जोड़ रहे है




  • कई खुदा मुझको यहाँ तक लाए हैं
  • कई खुदा आजमाय और ठुकराए हैं
  •  

  • कितनो ने की है मेरी तारीफ और
  • मैंने कितनो के कसीदें गायें हैं
  •  

  • खुदा तुने मुझको जब धोका दिया
  • मैंने कई लोगो से धोखे खाए हैं
  •  

  • मई अलग बिलकुल यहाँ रह गया हूँ
  • मैंने कितने ही अजीज आजमाए हैं
  •  

  • किनारा दिखता नहीं है सामने
  • हर कदम पर जबकि साहिल आये हैं
  •  

  • घर मेरा खाली नहीं हो रहा है
  • गैरों ने कोने कई हथियाए हैं
  •  

  • तन्हा मुझको भटकना है जिंदगी
  • साथ कितने ठिकानो के साये हैं







  • नये दौर के इस युग में, सब कुछ उल्टा दिखता है,
  • महँगी रोटी सस्ता मानव, गली गली में बिकता है।
  •  
  • कहीं पिंघलते हिम पर्वत, हिम युग का अंत बताते हैं,
  • सूरज की गर्मी भी बढ़ती, अंत जहाँ का दिखता है।
  •  
  • अबला भी अब बनी है सबला, अंग प्रदर्शन खेल में ,
  • नैतिकता का अंत हुआ है, जिस्म गली में बिकता है।
  •  
  • रिश्तो का भी अंत हो गया, भौतिकता के बाज़ार में
  • कौन, पिता और कौन है भ्राता, पैसे से बस रिश्ता है।
  •  
  • भ्रष्ट आचरण आम हो गया, रुपया पैसा खास हो गया ,
  • मानवता भी दम तोड़ रही, स्वार्थ दिलों में दिखता है।
  •  
  • पत्नी सबसे प्यारी लगती, ससुराल भी न्यारी लगती ,
  • मात पिता संग घर में रहना, अब तो दुष्कर लगता है।
  •  




  • मौन रहकर भी मुखर जो हो रहा है,
  • दर्द चेहरे से बयां वो हो रहा है ।
  •  
  •  
  • सोचा था जिऊँगा खुशहाल होकर ,
  • तनहा जीवन आज बोझिल हो रहा है ।
  •  
  •  
  • उम्र गुजरी सोचा नहीं मैंने कभी कुछ ,
  • जो नहीं सोचा वही सब हो रहा है ।
  •  
  •  
  • साथ थे मेरे हजारों हम सफ़र ,
  • आज क्यों सूना सा जीवन हो रहा है ?
  •  
  •  
  • मधुमास के दिन और रातें अब कहाँ ,
  • पतझड़ सा यौवन,उजड़ा सा आँगन हो रहा है ।
  •  
  •  
  • आंसू नहीं बहते मेरी आँख से अब ,
  • राजे दिल ,कौन फिर खोल रहा है.





  • तुम्हारी यादों का,… गुलदस्ता दिल में ,… सहेज रखा है हमने आज तक
  • कई गुल समाये हैं उसमें ,…सब अपनी अपनी…. दास्तान समेट कर

  • तुमने दिए थे प्यार से ,… जो जख्म वो भी,… हरे हैं आज तक
  • उनकी अलग जगह है सीने में ,... हमने कबूला था… उपहार समझ कर

  • तुम मुस्कुराते रहो सदा ,… जिन्दगी की ख्वाहिशें अपनी … सारीं पूरी करते रहो
  • सपनों को अपने हम,… बिखेरते रहे हमेशा ,….पूरा होना नामुमकिन समझ कर
  •  
  • तुम्हें वाह वाही मिले ,……जिंदगी की राहों पे …. हर उठे तुम्हारे कदम को
  • तुम्हारी हर कड़वी बात में, … ढूंढ़ ली थी तारीफ …अपनी तकदीर समझ कर
  •  
  •  
  • तुम विचलित न हो जाओ ,…. अपनी दुनियाँ के लिए , वफादारी निभाने में
  • समेट लिए हमने सारे ,…अधिकार अपने ,…. खुद को नाकाबिल समझ कर
  •  
  • ये तो सच है ,….कि … सम्पूर्ण नहीं है कोई,…. … इस जहाँ में
  • क्यों नहीं मान लेते ,… हमी को अपना मीत ,… अपना साया समझ कर
  •  



  • अंधेरों में लिपटी थी , जब रूह मेरी
  • तुम आये थे , रौशनी … बन कर

  • थी मेरे चारों तरफ ,स्याही निराशा की
  • तुम आये थे , उम्मीद …. बन कर
  •  
  • अमावस की चांदनी , मैं थी बनी हुई
  • तुम आये थे, पूर्णिमा … का चाँद बन कर

  • शून्य थी मेरी जिन्दगी, उजले व्योम सी
  • तुम आये थे, जीवनांक ….मेरे बन कर
  •  
  • सुलझाने लग गयी , मैं जब पहेलियाँ
  • सवाल बना दिया तुमने , परिचय … मुझ से तेरा

  • करने लगी थी मैं, मुस्कुराने …. की कोशिशें
  • तुम चले गए क्यों , रूठे हुए …. अजनबी बन कर ?




  • बहारों ने चमन को तो सदा मुस्कराहट दी है 
  • हमसे कतरा के निकल जाना इसकी फितरत है
  •  
  • खिले फूलों की खुशबुओं ने जग को महकाया है 
  • हम तक पहुँचे कि,पतझड़ ने हमारा दामन थामा है
  •  
  • चाँद आस्मां से रौशनी बिखेर के दुनियाँ को नहलाता है 
  • हमें छूने से पहले ही , गुम हो जाना रौशनी की आदत है
  •  
  • हवाएँ जो जीवन की धुन बजाती ,मधुर - मधुर स्वरों में गाती - नाचती है 
  • हमें सहलाने से पहले ही, अक्सर धुँधली फिजाओं में रम जाती है
  •  
  • ज्यों हर दिन सूरज का निकल के ,हौले हौले सफ़र करना जरुरी है,
  • जिन्दा रहने के लिए हमसफ़र, किसी हमदम का होना भी तो जरुरी है

  • ख्वाहिशों के पँख लगा ,जब भी स्व्पनलोक में विचारना चाहा 
  • ख्वाबों के बुनने से पहले ही ,चाहतें सब टूट के बिखर जाती हैं




  • तुम अम्बर में विचरते, आवारा बादल ,कहीं तो ठहरो 
  • मैं अपनी ही धूरी पे, घूमती धरा , पल भर थामों ना
  •  
  • तुम तारे तोड़ने को बेताब ,और अकेले ही चल पड़े
  • मैं आस्मां को निहारूं रात भर ,मझे साथ ले लो ना

  • तुम चमन में सुस्ताते, सुबहो -शाम , चुनने लगते सुमन 
  • मैं बगिया सवांरती दिन भर , पौधे लगाने दो ना
  •  
  • तुम फूलों पे मंडराते रसिया भौंरे ,रंग -बिरंगे फुल खिले 
  • मैं मौसम से बचाती बगिया , ख़ुशबू फैलने दो ना
  •  
  • तुम बर्फ से ढके उन्नत पर्वत ,अरसे से खड़े तनहा 
  • मैं बहने को बेताब नदी ,बर्फ पिघलने दो ना
  •  
  • तुम नाच रहे , समुन्दर की लहरों पे ,अब लगे डूबने 
  • मैं कश्ती हूँ यहाँ ,मुझे पतवार अपनी बनाने दो ना
  •  
  • तुम चले हो भवसागर करने, पार ,क्यों, निपट अकेले
  • मैं इंतजार मे खड़ी तेरे ,मुझे साथ लेलो ना



  •  
  • जान की तरह सीने से लगाये रखती
  • हो तुम जिसे, वह मेरी तस्वीर नहीं है
  •  
  • मर मिटे खाक1 मेरा, दर- ए-यार2 पे
  • हमको मिली , ऐसी तकदीर नहीं है
  •  
  • दूर दुनिया में, मेरे गम से फ़ैल जायेगा
  • अंधेरा , किसी के वश में ताबीर3 नहीं है
  •  
  • जर्रे-जर्रे4 को बाँधा जिसने, क्यों उसके
  • पास कुफ़्र5 को बाँधने की जंजीर नहीं है
  •  
  • दूरी-ए-जन्नत को रोता आ रहा इन्सां
  • रूके कहाँ,जमीं पे मिलती वो लकीर नहीं है
  •  
  • तोड़ने से टूटती नहीं,गम की जंजीरें,तस्वीर
  • बदल लेने से बदलती तकदीर नहीं है




  • जबाँ पर हम ला न सके वो अफ़साना1
  • रात तुमने किया जो न आने का बहाना
  •  
  • मुद्दत से बेरंग है नक्शे-मुहब्बत2 हमारा
  • हम बैठे हैं हाथ पर हाथ धरे,जैसे कोई बेगाना
  •  
  • दोस्ती निभती नजर आती नहीं, महबूब से
  • मंजिले – हस्ती3 को समझती मुसाफ़िरखाना
  •  
  • न सुबहे - इशरत4 है ,न शामे- विसाल5 हमको
  • जबसे छोड़ा है उसने मेरे कूचे में आना
  •  
  • नूर में होती इतनी जुल्मत6,हुआ आज उसकी आँखों
  • से साबित ,खुदा इस शातिर निगाह से हमें बचाना





  • जहाँ जिंदगी ज़ामे हलाल पीकर अमर हो
  • जाती है , मैं वहाँ जाकर रहना चाहता हूँ
  •  
  •  
  • नींद आ जाये , मेरी तकदीर को, मैं
  • तदवीर के दीये, बुझाये रखना चाहता हूँ
  •  
  •  
  • मुझे गुमराही का नहीं कोई खौफ़, मैं वक्त
  • के सीने में, शम्मा जलाये रखना चाहता हूँ
  •  
  •  
  • मुझे मेरी हस्ती का मकसद मालूम नहीं,मगर
  • मैं उड़ने के पहले गिरफ़्तार होना चाहता हूँ
  •  
  •  
  • गुलजार बुलबुल को मुबारक हो,मुझको दुनिया
  • से मुहब्बत है, ख़ुदा पर नज़र रखना चाहता हूँ




  • किसने मेरे दिल के बुझे दीये को जला दिया
  • जब्ते-मुहब्बत1 से, तमन्ना का परदा हटा दिया
  •  
  • तन्हा दिल मेरा कातिल नहीं था,रहनुमा2 किसी
  • के बहकावे में आकर मुझको कातिल बता दिया
  •  
  • या खुदा ! हद चाहिये सजा में उकूवत3के वास्ते
  • तूने सीने में जलजले को भरके यह क्या किया
  •  
  • फ़जा भी बेकरार रहती है,जीस्त4की कराह से तूने
  • काफ़िला-ए-अश्क5 को सदा6 न देकर बुरा किया
  •  
  • जिक्रे-जफ़ा उससे करे, जो वाकिफ़ नहीं है, उसने
  • तो मेरे कत्ल के बाद ज़फ़ा से तोबा किया




  • चिरागे - राह तो है , दीखता मंजिल नहीं
  • आपकी बातों में दम है, सीने में दिल नहीं
  •  
  • बज्मे - हस्ती1 की तस्वीर हूँ , महफ़िल में
  • होकर भी , मैं महफ़िल में शामिल नहीं
  •  
  • खुदा ने आदमी की किस्मत में चार गिरह कपड़ा
  • तो दिया,जिंदगी-ए-कश्ती को मयस्सर साहिल नहीं
  •  
  • बुतखाने में सोता हूँ,उठाता हूँ नाज बुत का, मगर
  • निर्माण होता जिससे जन्नत, मैं वो गिल2 नहीं
  •  
  • जब तक चमन में खिजाँ नहीं आती बहारे-ज़ाफ़रा3
  • गुलिस्तां में होती दाखिल नहीं




  • गैर से रात क्या बनी, तुम खफ़ा हो गये
  • यार मेरे, क्या थे तुम ,क्या हो गये
  •  
  • कभी कहते थे ,दो दिल एक जान हैं हम
  • आज दिल से दिल कैसे जुदा हो गये
  •  
  • चार दिन भी कहीं आराम न कर सका
  • हम एक बेवफ़ा पर फ़िदा हो गये
  •  
  • कहाँ है वह फ़सले-बहारी, वादे मुराद,कैसे
  • चमन का खेमा-ए-गुल पल में हवा हो गये
  •  
  • जब से जमान-ओ-मकान तुम्हारा ,गैर से
  • हुआ, हम जमीं ,तुम आसमां हो गये



  • खुदा तेरी बागे-जहाँ1 में बहती यह कैसी हवा है
  • इसमें न तेरी दुआ, न कोई दवा है
  •  
  • तपे-हिज्रा2 की गर्मी में झुलसता है प्राण- पक्षी कोई
  • गुल ऐसा नहीं, जो अपने पहलू में खार3नहीं रखा है
  •  
  • इन्सां तेरे एक इशारे पर परवाने की तरह अर्श4 से
  • जमीं पर उतर आया, क्या यही उसकी खता है
  •  
  • वफ़ा के बदले जफ़ा किया तूने खाक में मिल
  • जाने को साहिल कहकर, तुझको मिला क्या है
  •  
  • दिले-जार5 रश्के-मसीहा6 क्यों बना, क्या इन्सानों
  • की तरह होती तेरी भी मजबूरी, जब कि तू खुदा है




  • महफ़िले-हयात1 में कभी रौनक भी थी
  • यह अकदा2 खोला, एक मुद्दत के बाद
  •  
  • दुश्मन को भी ,फ़िराके-दोस्त3 का सदमा न
  • मिले,ख़ुदा मिले भी तो क्या, जन्नत के बाद
  •  
  • उड़ जायगा चार दिन में यह रूप का रंगे-
  • चमन,उसने माना, मगर बड़ी हुज्जत के बाद
  •  
  • बचाकर जान,अपनी प्रतिष्ठा की दाँव लगा दूँ
  • यह नहीं हो सकता ,इतनी शोहरत के बाद
  •  
  • किस्मत में जो सजा थी,वो तो तुमसे मिलकर
  • पा गया, अब क्या मिलेगा ,फ़ुरकत4 के बाद
  •  
  • छोड़ दो कहना,तारा सबकी नजर में फ़रिश्ता है
  • इतनी अदावत5 अच्छी नहीं, मुहब्बत के बाद
  •  



  • माना कि तेरे दीद1 के नहीं काबिल, हूँ मैं
  • तू जिसे चाहे, उनमें नहीं शामिल हूँ मैं
  •  
  • तूने जिस दिल से किया था अपने
  • जी का करार, वो अजीजे नहीं दिल हूँ मैं
  •  
  • मगर कभी हवा-ए-दहर2 जो दिया फ़ैसला
  • तो सुनना, तेरे बहरे-मोहब्बत3 का साहिल हूँ मैं
  •  
  • तेरा यह ख्याल यूँ ही नहीं है कि किस्मत
  • से वही मिलेगा ,जिस इनाम के काबिल हूँ मैं
  •  
  • मगर मैं नहीं,तेरे महफ़िल की आलमे-तस्वीर4जो
  • रकीब5 करे खिदमत, इतना नहीं जाहिल हूँ मैं




  • मेरा घर, तेरे घर से दूर तो था ,पर उतना दूर नहीं था
  • मगर हमारे किस्मत में,दो दिलों का मिलना मंजूर नहीं था
  •  
  • साजे-सफ़र1 कंधे पर कभी बोझ नहीं होता, फ़िर भी करे
  • बार-बार शिकायत मन, यह मेरे दिल को मंजूर नहीं था
  •  
  • दर्द ने मुझे उठाया जब बज़्म2 से, तब मैं नसीब से
  • तो दूर था, तेरे आस्तान3 से बहुत दूर नहीं था
  •  
  • तेरे दिल में खारे-मुहब्बत4 का खालिस5 मेरे बाद भी
  • बरकरार रहा, तभी मेरे जनाज़े का हमराह दूर-दूर नहीं था
  •  
  • मेरे दिल की तपिश से बिस्तर का हर तार खफ़ा था
  • जो कराह उठा रंज-ए-बालीन6 ,इसमें मेरा कसूर नहीं था





  • अक्सर हमारे ही साथ ऐसा होता क्यों है
  • हम जिसका भला चाहते, वह बुरा चाहता क्यों है
  •  
  • गजब की दुनिया है,इन्सां को इन्सां की कद्र नहीं
  • फ़िर भी फ़रिश्ता यहाँ आना चाह्ता क्यों है
  •  
  • सुनाने काबिल थी जो बात, सुनाया नहीं
  • आज उसी बात को सुनाने वह रोता क्यों है
  •  
  • पता है,चारा-ए-गम1 उल्फ़त की मिलती नहीं दवा
  • फ़िर भी आदमी नक्शे-मुहब्बत पर चलता क्यों है
  •  
  • नजर आता नहीं खते तकदीर, कैसा होगा वह
  • लौह2 और कलम, आदमी देखना चाहता क्यों है
  •  
  • मुहब्बत में नहीं फ़र्क जीने और मरने में,तुम्हारी
  • तप-हिज्रा3 की गर्मी है बड़ी तेज, कहता क्यों है




  • आगे आता था इश्के- बेकसी पे रोना
  • अब उसकी हर बात पे हँसी आती है
  •  
  • आदमी को किस तरह कज़ा1 मालूम हो
  • वो घूँघट में , गहनों से लदी आती है
  •  
  • बे-एतवार2 नक्श-ओ-निगारे3 जमाना है, फ़िक्र
  • जान की सुराग में, आसमां से कूदी आती है
  •  
  • सर्द-मेहरी4से उसके दिल को लगती है चोट,मगर
  • क्या मुहब्बत की आग इस कदर लगाई जाती है
  •  
  • दिल-ओ-जां दोनों जलकर राख हुए,वस्ल5 की
  • जब भी बात किया,कसम गैर की दी जाती है
  •  





  • इक तू नहीं साथ, गम सारा मेरे साथ है
  • आज फ़िर वही दिन ,वही जुल्मते-रात1 है
  •  
  • मौत रहती है , जिंदगी पर घात लगाये
  • हौसला, मुस्ते-खाक2 का बेबुनियाद है
  •  
  • नजर बंद कर देखती हूँ जब तमशाये-दिल
  • दीखता , रूह3 से कालिब4 आज़ाद है
  •  
  • दो दिन की सैर में तमाम हो जायेगा यह
  • गुलिस्तां,वक्त से कैसी शिकायत,कैसा फ़साद है
  •  
  • मैं तो बस इतना जानती, बागे-आलम5 का जो
  • महबूब है, मैं उसका शागिर्द, वह मेरा उस्ताद है




  • रात भर जागे हैं , नींद आती नहीं
  • काफ़िर के आँखों की शरारत जाती नहीं
  •  
  • क्या बात करूँ उस बेहया की ,जब आती
  • है याद , तो मेरी नज़रों से शर्माती नहीं
  •  
  • आतिशे-आग1 में जल- जलकर दिल खाक हुआ
  • वो है कि उसे बू-ए-सोजे-निहाँ2 आती नहीं
  •  
  • डरूँ कैसे न उस सितमगर के कूचे में जाने से
  • मुहब्बत है , कि भरोसा दिलाती नहीं
  •  
  • शाखे-गुल3की तरह रह-रह के लचक जाती है् वो
  • उसे मेरे दिल पे लगी चोट नजर आती नहीं





  •  
  • कैसे कहूँ दिले हाल अपना, बेरुखी पे तुली
  • अहले –दुनिया1 कहती तू बात करने काबिल नहीं है
  •  
  • तेरे सीने में जो धड़कता है दिल, वह
  • दिल तो है ,मगर जिन्स-ए-दिल2 नहीं है
  •  
  • दुनिया ने दागे-सौदा3 का नजराना दिया है
  • तुझको, तू कहता,मेरा दिल इसके काबिल नहीं है
  •  
  • तू न किसी का हुआ,न तेरा कोई हो सका
  • तू मुसाफ़िर है उस पथ का, जिसकी मंजिल नहीं है
  •  
  • अजल4 तुझको गले लगाकर,कहाँ से कहाँ ले आई
  • तू कहता, सिवा हसरते5, मुझको कुछ हासिल नहीं है





  • क्या कयामत है, सभी हमीं को बुरा कहते हैं
  • हमारी नेकी को छोड़, बदी की चर्चा करते हैं
  •  
  • प्रलय के दिन भी, वे हमारे विरूद्ध खड़े रहे
  • देखना है, आगे वे, और क्या तमाशा करते हैं
  •  
  • मिटती नहीं, मुहब्बत के पाँव से जिबह-साई1का
  • नक्श2, हम जिसे पत्थर की लकीर कहा करते हैं
  •  
  • न किसी की पूछताछ, न आवभगत है,बज्म3 में
  • आजकल लोग, कैसा अहतमाम4 किया करते हैं
  •  
  • बहरे-गम5 से पार उतारेगी, कश्ती-ए-मय हमको
  • यही सोचकर, हम रोज मयखाने जाया करते हैं
  •  
  • शबे-हिज्र6जब आती है, लहू को पानी करने ,तब
  • गुलशने–दहर में हम सराये-मातम7को ढूँढ़ा करते हैं
  •  




  • गमे-दिल किससे कहे, कोई गमख्वार1 नहीं मिलता
  • दिल से दिल तो मिलता, दिलदार नहीं मिलता
  •  
  • वो रोज आती है ख्यालों में,आँखों में रहती है तस्वीर
  • बनकर ,हाथ बढ़ाता जब दौलते-बेदार2 नहीं मिलता
  •  
  • उम्र भर हम अपनी किस्मत पर रोते रहे, बहारे
  • उम्र के बागे जहां में खिला गुलजार नहीं मिलता
  •  
  • कई बार दिल चाहा, उसके कूचे3 से उठकर जाना
  • मगर जायें तो कैसे, ताकते-रफ़्तार4 नहीं मिलता
  •  
  • मौत ही एक दवा है, हम इश्क के बीमार की
  • मगर मिलती कहाँ, वह बाजार नहीं मिलता





  • चाहो तो बना दो, न चाहो तो मिटा दो
  • मर्जी है तुम्हारी ,तुम कौन सी सजा दो
  •  
  • मगर दुनिया में मिलता कहाँ मेह्रो1 मुहब्बत
  • का निशां,जो तुमको पता है,तो हमें भी बता दो
  •  
  • तुम अपनी दहकती जवानी को सँभालो कि गैर
  • जल न जाये, जलाना ही है तो हमें जला दो
  •  
  • मेरा क्या,कभी मेहमां था,तुम्हारे दिले महफ़िल
  • का ,अब मजारे चराग हूँ,जब चाहो बुझा दो
  •  
  • मगर मेरी किस्मत का इतना बुरा हश्र हुआ
  • कैसे, जो तुमको मालूम हो, तो हमें भी बता दो
  •  
  • न दिल में वह बेदर्द रहा,न दर्द,मुहब्ब्त को लगी
  • किसकी नज़र, बोलकर न किसी को बद-दुआ दो






  • जाने वाले मिट जाते हैं, फ़ना नहीं होते
  • आँखों से दूर रहकर भी,दिल से जुदा नहीं होते
  •  
  • यादों के पहाड़ को ,दिल पे लिये लाचार फ़िरते
  • चाहकर भी, उतारकर फ़ेंक नहीं सकते
  •  
  • मजा जिसने भी गम के खाये, वे अपना मुख
  • आसुओं से अंधेरे में धोते,उजाले को नहीं रोते
  •  
  • कुछ न कुछ तो बात होगी उसके हँसने की
  • बेवजह कोई किसी पर नहीं हँसते





  • मेरे दिल की लगी को जो बुझा देते
  • तो क्या हम तुमको बेवफ़ा कहते
  •  
  • दुश्मन को राजदार बनाकर मेरे दिल को
  • रुसवा किया, तुमको बेवफ़ा नहीं तो क्या कहते
  •  
  • तुमसे गले मिलकर देखा,दिल तुम्हारा न मिला
  • ऐसी मुलाकात को हम जाहिर क्या करते
  •  
  • निगाहें-मस्त से होशियार रहना कोई खेल
  • नहीं, जो दिल हमारे उससे मुकाबला करते
  •  
  • जीने के लिए कुछ त-अल्लुफ़ तो चाहिये
  • तुमको हमसे गिला नहीं,हम क्या शिकवा करते
  •  
  • गमे फ़िराक1 में जो रोज जीते- मरते हैं
  • जो जानते तो वे क्या जहर को दवा कहते





  • जो सुनना चाहते हो, दास्तां हमारी तबाही की
  • तो सुनो कहानी उस शाखे-गुल- कलाई1 की
  •  
  • फ़ंसाकर अपने जुल्फ़ में उसने मेरे दिल को
  • उम्र भर बहलाया,अब बात करती है रिहाई की
  •  
  • कहती है, जिंदगी के वस्ल2 में अब वो मज़ा
  • रहा नहीं, आने दो मज़ा अब जुदाई की
  •  
  • ख़ुदा,दुश्मन को भी न ऐसा काफ़िर सनम देना
  • तुमको है वास्ता , मेरी किब्रियाई3 की
  •  
  • देखते ही गैर को लेने लगती है अँगराई वह
  • क्या-क्या हकीकत बयां करूँ उस बेहयाई की
  •  
  • मेरे सामने , मेरी बुराई करती और मुद्दा
  • रखती है, हमारे पिछले जनम की लड़ाई की





  • तकल्लुफ़ शराफ़त का निशां है
  • सोचकर तू क्यों इतना परेशां है
  •  
  • तेरा तर्के-बयां कहता,तू रंजित है,वरना
  • दहन में होती नहीं ऐसी जबां है
  •  
  • जहाँ में न तेरा अपना कोई, न तू
  • किसी का, तू रहता कहाँ है
  •  
  • शाम आती, सुबह कूचकर जाती
  • जिंदगी, कफ़न पहने तक की मेहमां है
  •  
  • तू जो पहले था, अब नहीं है क्यों
  • दुनिया इसी बात को सोचकर हैरां है
  •  
  • तू कहता रस्मे –मुहब्बत उठ चुकी
  • मैं कहती हूँ, मेरा अपना सारा जहाँ है





  • तस्वीर बदल लेने से तकदीर नहीं बदलती
  • दास्तां तो मिलती है, तकरीर नहीं मिलती
  •  
  • हम मरने को तो खड़े हैं ,मगर उस शोख
  • नजर के म्यान से शमशीर1 नहीं निकलती
  •  
  • अल्लाह की बताये राह पर चल रहा हूँ
  • रुकें कहाँ जमीं पर वह लकीर नहीं मिलती
  •  
  • मिट्टी के पैकर2 में बंद जिंदगी , क्यों मेरे
  • आईने के तस्वीर से तुम्हारी तस्वीर नहीं मिलती
  •  
  • जिसने सूरज की शुआओं3 को गिरफ़्तार किया
  • क्यों उसे एक कुफ़्र4के पाँव की जंजीर नहीं मिलती
  •  




  • तुम बिन जाऊँ तो कहाँ जाऊँ
  • नसीमे1 जहाँ है खिजा2 कहाँ जाऊँ
  •  
  • सुनता नहीं वक्त ,बयाने गम किसी का
  • किसको अपनी फ़ुरकते3 दास्तां सुनाऊँ
  •  
  • इन्सां, इन्सां का कद्र भूल गये
  • दिल को जिगर से कहाँ मिलवाऊँ
  •  
  • खीच लाया जल्वा-ए-दिल मुझको यहाँ
  • मैं कब चाहा तुम दोनों के दरम्यां आऊँ
  •  
  • एक मिट्टी के पैकर4 में निहाँ5 जिंदगी,इसे
  • लेकर जमीं पर रहूँ या आसमां जाऊँ





  • तुम क्या खफ़ा हुए, जमाना खफ़ा हुआ
  • गलत क्या हुआ, जो तुमसा दूसरा पैदा हुआ
  •  
  • अदम1तक चर्चा गई तुम्हारी बेवफ़ाई की,तुम कहती
  • हो, मालूम नहीं, कब जमीं से आसमां ज़ुदा हुआ
  •  
  • शम-अ बुझती है तो धुआं उठता है,तुम्हारी नजर में
  • जो शोला-ए-इश्क2 सियाहपोश3 न हुआ,तो क्या हुआ
  •  
  • हम भी जले हुओं में हैं ख़ुदा,हमसे दाग-ए-नातमामी4
  • की बात न पूछना, जो मैं दुनिया से रिहा हुआ
  •  
  • खाक में मिल गई ,नामूसे-पैमाने-मोहब्बत5, दुनिया
  • से उठ गई राहो-रश्मे-यारी, तू कहता, तो क्या हुआ





  • तेरे दिये जख्मों के सहारे जी लूँगा
  • बात निकलेगी जब, जुबां को सी लूँगा
  •  
  • दुआ माँगूँगा मरने की, जब न होगी
  • कबूल , जहर जिंदगी की पी लूँगा
  •  
  • दर्दमंदों से दूर फ़िरने वाले से वादा है मेरा
  • अपने फ़िक्रे फ़न में हिस्सा तुमको भी दूँगा
  •  
  • जिसकी फ़ुरकत ने इश्क की काया बदल दी
  • दिल उसे पहले ही दे दिया,अब जान भी दे दूँगा




  • तुमको देखें कि तुमसे हम बात करें
  • नजरें उठाओ तो हम मुलाकात करें
  •  
  • हम दोनों, जहाँ से गुम हुए थे, वहाँ की
  • या जहाँ मिले , वहाँ की हम बात करें
  •  
  • किस सफ़ाई से तुमने किया था वस्ल1 से
  • इनकार, क्या उस रात की हम बात करें
  •  
  • पहले हमारा दिल लिया,फ़िर गैर की जान
  • तुम्हारे किस अपने-पराये की हम बात करें
  •  
  • तदवीर2 को तकदीर ने दिया मात
  • क्यों , उस शातिर की हम बात करें
  •  
  • दिल ने दिये धोखे ,जिगर काम न आया
  • किससे अपना हम जरूरते फ़रियाद करें




  • दिल में दिल बनकर रहता हूँ,फ़िर भी कहती ,तुम्हारा
  • न कोई अपना मुकाम,तुम गुजरा हुआ जमाना हो
  •  
  • तुममें जमाने- रफ़्तार की लज्जत ओ आरजू-ए-जहान1
  • की चाहत नहीं, तुम एक उलझा हुआ फ़साना हो
  •  
  • तुम अफ़सुदगी2 हो, तुममें सैर- बहार ओ बाग
  • की चाह नहीं, तुम अपने निगाहे-शौक का दीवाना हो
  •  
  • तुमने मेरी तरफ़ देखा, मेरे जिगर को नहीं देखा
  • तुम जन्मों का पहचाना होकर भी एक अनजाना हो
  •  
  • इस कदर भी फ़िरेगा रंगे-जमाना3,मालूम न था आइने
  • को क्या याद दिलाना ,कि तुम आशिक मेरा पुराना हो





  • दुनिया मेरी बदल गई, एक उनके आ जाने से
  • मुंतजिर1 थीं, आँखें मेरी जिनके लिए जमाने से
  •  
  • वक्त के पैमाने में है जहर भरा, अजलरोज2
  • आ जाती पिलाने किसी न किसी बहाने से
  •  
  • कहती दोनों जहां का गम साथ लेकर,चलती हूँ
  • मेरा जी नहीं भरता थोड़े गम पिलाने से
  •  
  • दिल में सौ शिकवा-ए-गम है,पूछने वाला कोई
  • नहीं, फ़ायदा क्या आशना3 को गले लगाने से
  •  
  • वो इन्सां ही क्या, जो बफ़टके न गम के पास
  • कभी घबड़ाये अहबाब4 का जनाजा उठाने से





  • रुख बदलकर मौजें तुफ़ां हो गईं
  • कल जो गुल थीं, आज गुलिस्तां हो गईं
  •  
  • निगहे-गर्म से टपकती है आग,जब सोचता
  • हूँ , कैसे ये बस्तियाँ वीरां हो गईं


  • बेकसी ने उड़ा ले गई,आँसुओं का कफ़न मेरा
  • जिंदगी मेरी इम्तिहां की मैदां हो गईं


  • दिल में लिये थी हजारों तमन्नाएँ,फ़िर जुल्फ़ें उसकी,
  • मेरी बाँहों में क्यों परेशां हो गईं
  •  
  •  
  • तेरे ही हुश्न-ओ-जमाल1 से है जमाने में
  • रोशनी, यह कहने में गलतियाँ कहाँ हो गईं




  • रूह1 कालिब2 में दो दिन का मेहमान है
  • कफ़स3 में ज्यों बंद शौके गुलिस्तान है
  •  
  • फ़िर क्यों लोग फ़िराके- यार4 में मर- मर के
  • जीते हैं, इतनी सी बात क्यों नहीं उन्हें मान है
  •  
  • कैसा गम, दरिया से कतरे की जुदाई का
  • जो आज जमीं है वही तो कल आसमान है
  •  
  • सैलाब की तरह हम आज आये, कल चले
  • यहाँ आदमी कफ़न पहना, मौत का मेहमान है
  •  
  • पीरी5 में नौजवानी से मिलने की तमन्ना रही
  • जब कि सीने में गमे- इश्क6 रहता जवान है
  •  
  • कालिबे-खाकी7,जेरे खाक8 में रहता कैसे कोई नहीं
  • जानता, आदमी क्यों बज्म से निकलने परेशान है




  • ले जाओ मेरे सीने से दिल निकाल के गिरे न
  • किसी के नजरों से ,रखना इसे संभाल के
  •  
  • आयेगा बुरे वक्त में बहुत काम तुम्हारे
  • मुज्तरिब- आशिक- जार1 है पर है कमाल के
  •  
  • न रखना कफ़स -ए- आहनी2 में इसे कभी
  • लोग कहेंगे ,तेरा साकी है बड़ी बुरे ख्याल के
  •  
  • न हुआ दिले असर मेरे हाल पर तुमको कभी
  • फ़िर तेरे होठों की हँसी है किस मलाल3 के
  •  
  • बड़ी नाजुक होती है रिश्ता-ए-मुहब्बत की
  • न खीचो इसे, न मुद्दा बनाओ मेरे सवाल के







  • राह वही, राही बदल गये
  • शोरिशे-तुफ़ां1 में साहिल2 बदल गये
  •  
  • मुकाबला दिल से आसान नहीं था
  • हम उसके साँचे में ढ़ल गये
  •  
  • बचे न जान सीने में, बहाकर
  • खून, दुनिया से कातिल निकल गये
  •  
  • बेखुदी में कदम बढ़ा ,हम चलते गये
  • जब होश आया, खुद संभल गये
  •  
  • वस्ल3 की आग लगी कुछ इस तरह
  • सीने में,बुझाने वाले भी साथ जल गये
  •  



  • जिंदगी की शाम ढ़लने लगी
  • न तुम मिले, न तुम्हारा सहारा मिला
  •  
  • भटक गये गम के अंधेरे में हम
  • उम्र भर न तुम्हारा इशारा मिला
  •  
  • हम अकेले थे, दिल भी बीमार था
  • न दवा ही मिली,न तीमार-दारा मिला
  •  
  • मौत ने जब मुस्कुराकर पुकारा मुझे
  • लगा , जिंदगी को किनारा मिला
  •  
  • मिट गये जमाने के सारे गिले,अब
  • न शिकवा रहा , न शिकारा मिला
  •  
  • आ गये जिंदगी से बहुत दूर हम
  • न तुम मिले, न दामन तुम्हारा मिला
  •  
  • चलते- चलते आ गए हम किस मोड़ पर
  • जहाँ न सूरज मिला,न चाँद दुलारा मिला
  •  
  • दूर तक आसमां , आसमां था मगर
  • आसमां में न कोई सितारा मिला








  • चमन में रहकर भी, बहार से दूर रहे हम
  • उश्शाक1पा रहे जुर्म की सजा,सोच मगरूर2रहे हम
  •  
  • मेरी जिल्लत ही, मेरी शराफ़त की दलील है
  • मेरे खुदा, इस गफ़लत में जरूर रहे हम
  •  
  • शिकवा उसकी ज़फ़ा3 का हमसे हो न सका, इस
  • दर्जा उसकी चाहत के नशे में चूर रहे हम
  •  
  • उसकी फ़ुरकत4 में रोयें, यह हमारी औकाद नहीं
  • पराये अपने हुए नहीं,अपनों से भी दूर रहे हम
  •  
  • नाम हमारा उसके चाहनेवालों में शामिल न रहा
  • उसके खूने-तमन्ना में शामिल जरूर रहे हम




  • जो तुम हसरते - दीदार1 का इजहार न करती
  • कसम ख़ुदा की , हम तुमसे प्यार न करते
  •  
  • जिंदगी काट लेते, गमो हसरत के जोश में
  • दागे - मुहब्बत को दिले - गुलजार2 न कहते
  •  
  • अपने महरूम-किस्मत3 की शिकायत मालिक से
  • करते, जो सहरा4 में ताकते-खलिशे5 खार6 न होते
  •  
  • काश कि कातिल की तरह गवाह भी करीब होता,
  • हम खंजर से चीरकर अपने सीने को शर्मसार न करते
  •  
  •  
  • जो तुम रंगे-रुखसार7 बन याद न आती, हम अपने
  • सपने को तुम्हारे जल्वे से गुलजार न करते
  •  
  •  





  • जो पूछो तुम हमसे, हम क्या करते हैं
  • हरचन्द तुम्हारी खुशी की हम दुआ करते है
  •  
  • देती जो न वह दिल हमें,हम चैन उसे
  • कहाँ से देते ,ख़ुदा से यही हम कहा करते हैं
  •  
  • बाद जब मिलती फ़ुरसत रोने से खुद से
  • अपनी रामकहानी हम सुना करते हैं
  •  
  • अब ख़ुदा जाने ,हम ये क्या करते हैं
  • अपना भला या दूसरों का हम बुरा करते हैं
  •  
  • झकझोरती जब डालियों को सर्द हवा सदा
  • फ़तहनसीबी कोई नहीं होता,हम कहा करते हैं





  • गमें जिंदगी से घबड़ाकर चला आता हूँ
  • न पाकर तुझे बड़बड़ाकर चला आता हूँ
  •  
  •  
  • लोग कहते ,पागल- दीवाना ,सिरफ़िरा मुझको
  • पत्थर से प्यार जताकर चला आता हूँ
  •  
  •  
  • मज़लिसे –यार में तो जगह न मिली मुझको
  • मज़लिसे दीवार से हाल बताकर चला आता हूँ
  •  
  •  
  • जब देखता हूँ गैर को तुम्हारे पास बैठा
  • जिंदगी ,फ़िर मिलूँगा बताकर चला जाता हूँ
  •  





  • कुछ गम तुमने दिये,कुछ आसमानी है
  • किस्मत का खेल है,कहना बेईमानी है
  •  
  • बज्में-अहबाब1 में भी,दिल रहता है उदास
  • खुदा जाने उसकी क्या पड़ेशानी है
  •  
  • दर्दे-दिल पैदा हुआ ,दर्दे-जिगर जा रहा
  • आगे की मत पूछो, किस्सा तुलानी है
  •  
  • हुस्न कातिल से तपिशे दिल की बात कर
  • उससे वफ़ा की उम्मीद रखना नादानी है
  •  
  • दरिया-ए-जिंदगी में कैसे-कैसे हस्ती डूबे
  • तुम कहते , बश घुटने भर पानी है






  • उनके दिये जख्म सभी, जब मुस्कुराने लगे
  • तब वे दूर-दूर तक हमको, नजर आने लगे
  •  
  • निगाहें- शौक सरे- बज्म1 बेपर्दा हुआ
  • जुल्मते-आश2 मेरी ओर कदम बढ़ाने लगे
  •  
  • पता नहीं, इश्क में थी क्या ऐसी बात
  • जिसे भुलाने में, हमको जमाने लगे
  •  
  • खुशबू से महकाकर कफ़न भेजा हमारे लिए
  • जब नसीबा हारा, तब गैर से उठवाने लगे
  •  
  • राहे-जिंदगी काट चुके ,अब जमाने की हवा
  • जिधर ले जाये, हमारे पाँव लड़खड़ाने लगे
  •  
  • जान से मारा जहाँ भी उसने हमको तन्हा पाया
  • वक्त यह सोचा, हम हिज्र3 से घबड़ाने लगे






  • कहते हैं मेरे दोस्त, मेरा सूरते हाल देखकर
  • कर ले न ख़ुदा तुझको याद ,तू ख़ुदा को याद कर
  •  
  • आदमी खाक का ढ़ेर है, वादे-फ़ना1 कुछ भी नहीं
  • मौत का सजदा2 हो, मौत से न कोई फ़रियाद कर
  •  
  • तेरी सूरत से जो हो किसी को इंकार, तो रहने दे
  • खुद को जर्रा समझकर उसकी राह में ना बर्बाद कर
  •  
  • बू-ए-गुल दीवारें–गुलिस्तां को फ़ाँदकर आती है,तकदीर
  • के काज़ी का फ़तवा है, किस्मत से न फ़साद कर
  •  
  • तू शाखे-ताक3 है, कैदे-मौसम4 से आजाद अपनी
  • तबीयत से, तू किसी वीरां को आबाद कर





  • ऐ नूर, तू चिरागे राह है, मुसाफ़िरे मंजिल नहीं
  • तेरी तबीयत आम है , तू जौहरे काबिल नहीं
  •  
  •  
  • दरिया- ए- दिल तेरी कशिश1 से मौजजन2 है
  • पर तेरे दिल की तरह, उसका खामोश दिल नहीं
  •  
  •  
  • बज़्मे - महफ़िल का आराइश3 है तू , फ़िर भी
  • बज़्मे- हस्ती के महफ़िल का तू महफ़िल नहीं
  •  
  •  
  • माना कि तू तिलिस्मे- पेचो- ताब4 है , तुझमें
  • सोजे- दरू5 है पर तू गरमी -ए -महफ़िल नहीं
  •  
  •  
  • तू ठहरी हुई शरर6 है, मेरी तरह मिटनेवाली नहीं
  • हर दिल अजीज रहकर भी,तू रफ़ीके-राहे7मंजिल नहीं





  • एक बेवफ़ा ,नज़र से दिल में उतर गई
  • हाय ! बिन बताये यह क्या कर गई
  •  
  • मैं एक मुसाफ़िर था गुमज़दा1, लगाकर
  • मुझ पर खून का इलज़ाम,बाद मुकर गई
  •  
  • मैने कब कहा उसे ठहरने, अपने घर
  • वह तो खुद अपने इरादे पे ठहर गई
  •  
  • संग लाई थी जो अपनी गुलाबी आँखों पर
  • तुरबत2 ,जाते- जाते मेरे घर धर गई
  •  
  • मैं जहाँ, वहाँ मुझे अपनी खबर नहीं,जाने
  • उस बेवफ़ा को कैसे यह खबर गई









  • उस बेवफ़ा को हम आज भी याद करते हैं
  • उसकी सलामती की दुआ, फ़रियाद करते हैं
  •  
  •  
  • जिसको रात-दिन तसव्वुर-ए-जाना किये हम बैठे 
  • रहे, वो अक्सर मेरे गुजर जाने की बात करते हैं
  •  
  •  
  • सुना था मैदाने- वफ़ा में नाम औ- नसब की
  • बात नहीं पूछी जाती, वो जात की बात करते हैं
  •  
  •  
  • समझ में नहीं आता, क्यों उस निगाहे नाज
  • को हम नज़अ में भी याद करते हैं
  •  
  •  
  • जमाने की नज़र में मिटी जा रहीं,जिंदगी की कद्रें
  • और हम गम से निजात की बात करते हैं






  • इधर भी दर्द होता है
  • उधर भी दर्द होता है
  •  
  • तुमने छुआ , जहाँ - जहाँ
  • वहाँ - वहाँ दर्द होता है
  •  
  • दर्द तब और बढ़ जाता है
  • जब मौसम सर्द होता है
  •  
  • आँखें झड़ती हैं , सामने
  • जब तुमसा कोई मर्द होता है
  •  
  • तारा, इश्क वह रोग है, जिसका
  • दुनिया में, न कोई मर्ज होता है





  • आँधी की तरह आना और चला जाना तेरा
  • इससे तो अच्छा था नहीं आना तेरा
  •  
  • बेवफ़ा , तू ढूँढ़ ले अपना आशियाना1 कोई
  • दूसरा, अब न रहा यह घर ठिकाना तेरा
  •  
  • कभी कान देकर तेरे अफ़साने2 को सुननेवाले
  • अब धरते हैं कान,कहाँ गया वह जमाना तेरा
  •  
  • कर याद उन नशीली आँखों को आता है 
  • रोना ,जिसके दम पर था आशियाना मेरा
  •  
  • देखा जब गैर के आने पर अँगराई तेरी
  • बेहिजाबी3 मैं समझ गया बहाना तेरा





  • बिजलियाँ टूट पड़ती हैं मेरे आशियाने पर,जलाने
  • कैसे कर मैं बचाऊँ प्राण, मौत ढूँढ़ रही बहाने
  •  
  • उठ गईं कैसी--कैसी सूरतें मेरे सामने से
  • किस-किस पर कहूँ तुमसे, बैठकर आँसू बहाने
  •  
  • जिंदगी भर न दीदा-ए-तर1 से थमे आँसू,जब-
  • तब याद उसकी आ जाती,लहू को पानी बनाने
  •  
  • उसकी निगाहें—शौक के साँचे में ढ़लने के बाद
  • उनके लबों ने सिखाया, हर्फ़2 से दास्तां बनाने
  •  
  • हर अदा सागर की तरह छलकती है उसकी
  • महफ़िल में जिक्र किया क्या,वह लगी शरमाने





  • बहरे-जहां1 में जर्र-जर्र होती जा रही, हमारी
  • जीवन-कश्ती को कब मिलेगा किनारा,नहीं मालूम
  •  
  • इश्क फ़ंदे से तंग हैं,उसके जुल्फ़ के फ़ंदे से होकर
  • गिरफ़्तार रहना बेहतर है या छुटकारा नहीं मालूम
  •  
  • नफ़से - मुरदा2 फ़ना होकर भी दुनिया में
  • सीमाब3 बन आता कैसे दुबारा नहीं मालूम
  •  
  • हमको इश्के-हबीब4ने मारा,जब जलेगी लाश हमारी
  • तब ,पहले धुआँ उठेगा या अंगारा नहीं मालूम
  •  
  • तुम्हारे वादे-बुतां को हम अच्छी तरह समझते हैं
  • ख़ुदा जाने कैसे चलता,कारोबार तुम्हारा नहीं मालूम





  • हमें तुम्हारी दया नहीं, दुआ चाहिये, जिसे
  • अपना कह सकें जिसे, ऐसा एक खुदा चाहिये
  •  
  • बहुत हुए तनहा तरीके इश्क में हम, हमें और
  • नहीं राह चलने , आपके नक्शे पा चाहिये
  •  
  • कूए दुश्मन की गली में जाने से पहले अच्छी
  • तरह देख लेना, वहाँ की आवो-हवा चाहिये
  •  
  • सीने से लगाये रखती है, वह आश्चर्य क्या
  • जो कहे, तुम्हारे दिल का एक टुकड़ा चाहिये
  •  
  • सब्र करने का हमको अंदाज नहीं, हम कैसे
  • कहें उनसे कि हमको पैमाने-वफ़ा चाहिये






  • आओ तुमको सुनाता हूँ, आज एक कहानी
  • कल का क्या,कल रहे न रहे यह जिन्दगानी
  •  
  • मुहब्बत हर चंद बला नहीं है होती, मगर
  • मुहब्बत में बहुत बुरी होती, बदगुमानी
  •  
  • सूरज में वह तपिश नहीं है, जो ताप
  • लिये रहती सोजे - गम1 निहानी
  •  
  • मुहब्बत का एहसास हर क्षण लिखकर
  • नहीं कराई जाती,कुछ बातें हैं जो,होती जुबानी
  •  
  • शामे-जिन्दगी के साथ कब रही जवानी
  • ऐसे भी उम्रे-कोताह2से वफ़ा चाहना है नादानी





  • ऐ शम्मा1, ज्यों एक-एक रात तुझ पर भारी है
  • त्यों हमने अपनी उम्र सारी गुजारी है
  •  
  • बदगुमानों से कर इश्क का दावा
  • हमने बज्म2 में हर बार शर्त हारी है
  •  
  • मय और माशूक को कब, किसने नकारा है
  • तुन्द—खूँ3 के मिजाज को इसी ने संवारी है
  •  
  • सदमें सहने की और ताकत नहीं हममें
  • उम्मीद—वस्ल4 में, तबीयत फ़ुरकत5 से हारी है
  •  
  • अब किसी सूरत से हमको करार नहीं मिलता
  • हमारे तपिशे6 दिल की यही लाचारी है
  •  
  • बहार गुलिस्तां7 से विदा लेने लगा, लगता
  • नजदीक आ रही पतझड़ की सवारी है




  • हमारे नाम के पते से खल्क1 को जो
  • न मिले तुम्हारा घर , तो क्या करें
  •  
  • तदवीरें—तकदीरें हमारे कुछ काम न आईं
  • दवा बन गई जहर , हम क्या करें
  •  
  • सुनाना था किस्सा - ए- गमे दिल का
  • सुनकर तुमको नींद न आई , हम क्या करें
  •  
  • उसकी ना-उम्मीदी में भी उम्मीद रखती हो
  • हमने जो की बफ़ाई, उसका हम क्या करें
  •  
  • माना कि बुरे हैं हम, तो बुरा जान के मिलो
  • हमारे ऐब को जो ऐब,न समझो,हम क्या करें





  • मैं मरती हूँ जिस पर, वह मेरा हमदम नहीं है
  • तुम्हारी इन बेतुकी बातों में, कोई दम नहीं है
  •  
  • उसका हुस्न जग में हरचंद मौजनन1 है
  • कैसे कहें,उससे न मिलने का हमको गम नहीं है
  •  
  • तुम हाले दिल पूछते हो हमसे कि कैसे हो
  • तुम्हीं कहो, क्या यह शाइस्ता2-ए-गम नहीं है
  •  
  • शामे जिंदगी माँगती है रिश्ते की हकीकत का
  • खजाना, ऐसे भी जो मिला है वह कम नहीं है
  •  
  • बेगाना था तो कोई शिकायत नहीं थी,जिंदगी में
  • उसका आना और चला जाना क्या सितम नहीं है





  • बदल चुका है अहले- दर्द का दस्तूर
  • अब दीखता नहीं, जनाजे का हमराह,दूर-दूर
  •  
  • कफ़न में लिपटा देखकर उसे,आँखों में उतर
  • आया खूं, लोग समझे हैं,शराब का सुरुर1
  •  
  • अपनी रुसवाई2, उसकी शोहरत में मिली
  • फ़िर भी नाज है हमको, हम हो गये मशहूर
  •  
  • मलाले-यार3 ने हमको मलाल दिया
  • सरुरे-यार से हासिल हुआ हमें सुरुर
  •  
  • नादां हैं जो कहते हैं, क्यों जिंदा हो,तुम
  • उसे पता नहीं, घर से चौकठ होता नहीं दूर





  • किस्मत हम पे रोती है, हम किस्मत पर रोते हैं
  • फ़िर भी जिंदगी के सफ़र में, हम साथ फ़िरा करते हैं
  •  
  • कभी उसका हाल मेरे जैसा,कभी मेरा उसके जैसा कभी वह
  • हमारे होशो-खिरद1 का शिकार,कभी हम उसका करते हैं
  •  
  • उसके कूचे में कोई शोर या कयामत का जिक्र नहीं
  • होता , मगर हंगामें , आठो पहर हुआ करते हैं
  •  
  • जिंदगी ने सुलह की बात उससे कई बार की, मगर जो
  • न हो तबियते काबिल, कोई तरबियत2 से कब संवरते हैं
  •  
  • अब तो बहरे-जहाँ3 में कश्ती-ए-उम्र हर क्षण तबाह
  • रहती है, कब टूटकर लगेगा किनारा,यही सोचा करते हैं





  • न पूछो, तुम बिन दिन हम कैसे गुजारे हैं
  • तुमको पाने की चाहत में, खौफ़ से हारे हैं
  •  
  • जब भी तुमसे मिलने का खयाल आया
  • तन्हाई के भंवर में, हाथ- पाँव मारे हैं
  •  
  • भला हो उस गम का,जो कभी साथ न छोड़ा
  • उसे पता था हम किस्मत के मारे हैं
  •  
  • मौजों को गोते खिलवाता साहिल से किनारा
  • कहने को वे जीते, एक दूजे के सहारे हैं
  •  
  • जिंदगी के चमन से जो एक बार चला जाता
  • फ़िर लौटकर कभी आती नहीं बहारें हैँ





  • आपका दिल मेरे प्यार के काबिल नहीं है
  • खाक में मिल जाना साहिल नहीं है

  • मेरा दिल बिस्मिल1 है , कातिल नहीं है
  •  
  • शमां चुप है,आशिक परेशान है,आलमे-तस्वीर2
  • कहती है , यह रंगे महफ़िल नहीं है
  •  
  • जिक्र मेरी बदी की महफ़िल में हो, मेरा
  • गम इन्तिहाने इश्क के काबिल नहीं है
  •  
  • न आप मिलने पे आमादा हैं,न मैं मिलने के
  • काबिल हूँ , इस मुहब्बत की मंजिल नहीं है




  • दूर-दूर रहती हो क्यों ,मेरे करीब आओ
  • कुछ मेरे दिल की सुनो,कुछ अपनी सुनाओ
  •  
  • बीते दिनों की यादों को, हो जाने दो ताजा
  • बुझे इश्क के चिराग को फ़िर से जलाओ
  •  
  • बढ़ती जा रही है बेखुदी मेरे दिल की, अपने
  • दिल की बात, आँखों के इशारे बताओ
  •  
  • रात चुप है, फ़ज़ा है सहमी-सहमी,तुम अपने
  • मुखड़े को ज़ुल्फ़ के साये में न छुपाओ
  •  
  • इस दुनिया के अलावा भी,एक और दुनिया है
  • मुहब्बत की, हम वहीं जा रहे, तुम भी आओ
  •  




  • तुम्हारी राह तकते बीत गया जमाना
  • तुम तो आये नहीं , आया तुम्हारा बहाना
  •  
  • कहते हो, मुझको भूल जाओ, कितना आसान है
  • कहना , पर कितना मुश्किल है भूल जाना
  •  
  • इंतजारे-मय-ओ सागर सदा नहीं रहता साकी
  • पलटकर कभी नहीं आता ,शबाब1 का जमाना
  •  
  • हम भी हुस्न की दुनिया का दरवेश2 हैं, हमें भी
  • आता है इश्क की माँग पर,अपना दिल जलाना
  •  
  • दुख होता है, कर याद जिस साज से हरारत3 था
  • हमें, महफ़िल में तुम्हारा उसी साज को बजाना
  •  
  • इतनी बेगानगी भी अच्छी नहीं,जिंदगी की राह पर
  • कुछ दूर साथ चलकर ,फ़िर लौट तुम्हारा जाना




  • मैं नहीं रह सकता पड़ा हमेशा तुम्हारे दर
  • आशना1 कोई नहीं, कौन लेता किसकी खबर
  •  
  • मैं क्यों तुम्हारा पाँव चूमूँ, मेरी तरह तुम भी
  • एक इन्सान हो, तुम नहीं कोई प्याला–ओ-सागर
  •  
  • मिलते ही नज़र ,हमसे मुँह फ़ेर लेते हो,आखिर
  • किस बात में समझते हो मुझको खुद से कमतर
  •  
  • मेरे दिल की बात जो जानता मेरा ईश्वर
  • अब तक बदल गया नहीं होता मेरा मुकद्दर
  •  
  • माशूका से मिली दाग, दिल पर,लगती प्यारी
  • बशर्ते कि वह दाग जख़्म से हो बेहतर





  • तुम संग बीते लम्हों की कसक मेरे साथ है
  • न जिक्र करो वादे की, मुझे अपना वादा याद है
  •  
  • ऐसा नहीं कि मैं कयामत को भूल गई,पर
  • शबे-फ़ुरकत1का दिन कयामत से ज्यादा याद है
  •  
  • बेखुदी में पाँव उठा , ले आया मुझे यहाँ
  • पूछा,जो कहा,कुएं-यार2में रहने का तरीका याद है
  •  
  • गमे दिल रोता है बहुत, होकर तुम से जुदा
  • पर इतना भी नहीं,कि लोग पूछे क्या बात है
  •  
  • ख़ुदा के लिए मेरी बर्बादी पर,तुम न ताज्जुब
  • करो, तुम जिसे बर्बाद करो वही तो बर्बाद है





  • तेरी आँखों में मुझको, अपना घर नज़र आता है
  • ना फ़ेरो मुँह,तुझमें मुझे अपना मुकद्दर1नज़र आता है
  •  
  • कभी कम न हुई, मेरी शबे-फ़ुरकत2 की स्याही3,अब
  • तो इश्क का आईना भी, पत्थर नज़र आता है
  •  
  • दिल चाहता है, गमे दुनिया से निकलकर भाग जाऊँ
  • मगर कहीं नहीं गुम्बदे-गरदू4 का दर नज़र आता है
  •  
  • गुलशने-हस्ती की जिंदगी मेरी, एक सूखी डाली है
  • जहाँ से जीवन मेरा,आलूदा-ए-गर्दे5सफ़र नज़र आता है
  •  
  • मुहब्बत पूजा है, इबादत है ख़ुदा की , इश्क की
  • इजहारे- फ़कीरी से मौत मुझे बेहतर नज़र आता है




  • ख़ुदा ! मेरे कातिल को सलामत रखना
  • मेरी वहशत1 में, उसकी शोहरत रखना
  •  
  • फ़रियादे-मुहब्बत की मुझमें हिम्मत नहीं
  • तुम इसे वयां करने की ताकत रखना
  •  
  • रोज दुआ माँगती है,वह मेरे मरने की
  • उसकी दुआ की तुम इज्जत रखना
  •  
  • उम्रे-रवां2दिल की तड़पन सह नहीं सकती
  • मेरे दिल की और न कोई हसरत3 रखना
  •  
  • है, दुनिया में इश्क अगर मुसीबत,तो
  • इस मुसीबत को मेरे साथ रखना






  • दुनिया में हम जिंदा हैं कि हमारे संग तेरा नाम रहे
  • कुछ रहे न रहे,तेरी आँखों का छलकता ज़ाम रहे
  •  
  • तेरी मेहरबानी को सितम क्यों न कहें हम,जो तेरे
  • खत में हमारे नाम लिखा, तेरे गुरूर का सलाम रहे
  •  
  • करना ही है तुमको गैर की जिक्रे-वफ़ा, तो करो
  • मगर, ख़याल रहे , कि महफ़िल में मेरा दाम रहे
  •  
  • है उम्मीद पर दुनिया टिकी,हमको भी थी उम्मीद
  • कि कभी न कभी, नजरें-वफ़ा करोगी,पर नाकाम रहे
  •  
  • कोई राहें-फ़ना1 में साथ नहीं देता,है खुदा से यही
  • दुआ अपनी , हमारे बाद भी हमारा नाम रहे




  • मैँ जो भी हूँ, जैसा भी हूँ , तुम्हारा हूँ
  • मैं रात ही नहीं, दिन का भी मारा हूँ
  •  
  • न करो दूर अपनी नजरों से तुम हमको
  • मैं अपने भी दिल के सहारे से,बेसहारा हूँ
  •  
  • तुम लाख करो ना-ना , तुम्हारी झुकी नजरें
  • बता रहीं , मैं आज भी तुम्हारा हूँ
  •  
  • तुम बिन जिंदगी तो थी,मगर जिंदगी नहीं थी
  • बड़ी मुश्किल से गमे जिंदगी को संवारा हूँ
  •  
  • राह मिलती नहीं बहरे-बस्ती1 की,जाऊँ तो
  • कहाँ जाऊँ , मैं जिंदगी से भी हारा हूँ





  • जो तू देख रहा, वह वैसा नहीं है
  • तू खुदा तो है, खुदा जैसा नहीं है
  •  
  • जिंदगी जीने के लिए और भी बहुत
  • है चाहिये, सब कुछ पैसा नहीं है
  •  
  • सूरत तो तेरी मिलती है उससे
  • पर तू दीखता उसके जैसा नहीं है
  •  
  • गैर की फ़िक्रे वफ़ा अपने आगे सुनकर
  • भी न जले, मेरा कलेजा वैसा नहीं है
  •  
  • मुद्दत से तुझे मेरी याद न आई, तू
  • मुझे भूल गई, मेरा आरोप ऐसा नहीं है
  •  




  • साकिया, उठा परदा,फ़िर तू उसी अंदाज से
  • और कर ले आँखें चार, इस तीरंदाज से
  •  
  • जमाना पहले सा नहीं रहा,बदल गया हर –
  • अंदाज, तू छेड़ कोई नई राग अपने साज से
  •  
  • हुए हैं पाँव मेरे, नबर्दे-इश्क1 में जख्मी तू
  • उड़ा ले चल मुझे , अपने इश्के गुदाज2 से
  •  
  • फ़िर जिस रंग में चाहे रंग ले तू, खुद को
  • मेरे खिलवत- औ-अंजुमन3 के नियाज4 से
  •  
  • कहीं साहिल से लगकर मौजे बेताब सो जाये
  • एक बार फ़िर उठा दे परदा, तू उसी नाज़ से





  • न रहीम के , न राम के
  • तुम आदमी , किस काम के
  •  
  • दर्दे - जहाँ की बात नहीं, बात
  • करते केवल, मय- ए- खाम1 के
  •  
  • बेशर्मी तुम्हारी तब हद हो जाती
  • जब चाटते तुम दर्द-ए-तहजाम2 के
  •  
  • तुमको हो न हो, हमको है अजीज
  • कब्रे निशान अपने नाम के
  •  
  • जहाँ-ए-गुलिस्तां मुबारक हो तुमको
  • बुलबुल बिना मेरे ये किस काम के





  • समन्दे-उम्र1 कहीं नहीं ठहरता
  • बुतखाने2 में भी ठहरता नहीं
  •  
  • हाल पीरी3 का जानता फ़िर भी
  • गोर4 के साँचे में ढ़लता नहीं
  •  
  • दम-ए आखिर तक दौड़ लगाता
  • दो टूक आराम करता नहीं
  •  
  • जिंदगी की राह में,कब और कहाँ
  • मिला,पूछने पर कुछ कहता नहीं
  •  
  • बोलता, ख़ुदा के घर जो हुआ
  • करार, क्यों उस पर तू रहता नहीं





  • दिल देकर दिल न लेना, किसका कसूर है
  • इस बात पर चर्चा महफ़िल में हुआ जरूर है
  •  
  • तुम्हारी नजर में वह कुछ न सही,मगर मरहम
  • की जुस्तजू1 में वह घिरा हुआ दूर-दूर है
  •  
  • दुनिया-ए-बाग का यक जर्रा-ए-जमीं2बेकार नहीं
  • लाले3 खिले नहीं तो,उसे कुछ हुआ जरूर है
  •  
  • दिल खामोश है उसका, फ़रियाद से मजबूर है
  • या खुदा! इस अंजुमन4में वह कितना माजूर5है
  •  
  • उभरते हुस्न पर नाज किसे नहीं होता
  • मगर इतना नहीं , उसे जितना गरूर6 है





  • हम तो चले उधर, जिधर मेरे रहबर चले
  • है फ़ितरत1का इशारा, हर शब2 का सहर3चले
  •  
  • सरे महफ़िल में हमीं से करना था परदा, जो
  • गैर के दामन से वे, अपना मुँह ढँककर चले
  •  
  •  
  • हुए हैं ,इश्क की गारतगरी4 में शर्मिंदा,करने
  • गिरफ़्तार निकले थे, होकर गिरफ़्तार चले
  •  
  • आगे देखना है और क्या रंग लाती है,शोख
  • जिससे हम ज़फ़ा5कर न सके,वे ज़फ़ाकर चले
  •  
  • हम जिसे गुल समझकर सीने से लगाये रखे
  • थे , आज वे दागे जिगर होकर चले





  • साकी ,यूँ ही नहीं,तुझको तेरा गुमान है
  • तू जवान है, तेरे कदमों में आसमान है
  •  
  • तेरे बदन की गर्मी से जिंदा है आफ़ताब
  • और आफ़ताब1 के जर्रे2 में जान है


  • यक मैं ही नहीं,कर तेरे जल्बे का आलम--
  • का ख़याल,मैकदा3 भी रहता परेशान है
  •  
  • जाने और किस-किस का लहू पानी हुआ
  • होगा, सोचकर वक्त भी रहता परेशान है
  •  
  • चमन की सैर से नफ़रत है,तेरे दिल को
  • यह मैं नहीं कहता,तेरा खुद का बयान है





  • मेरे सीने में दर्द जब पाया राहत
  • तब मिट गई वस्ल1 की हर चाहत
  •  
  • फ़ुर्सते-हस्ती2 का गम नहीं मुझको
  • उम्रे अजीज का क्यों करूँ इबादत
  •  
  • मुझसे उसकी कोई दुश्मनी नहीं,क्यों
  • वह, किसी और से करे मुहब्बत
  •  
  • तेग-बे-आब3 है वह, मरने के पहले
  • कब दिया किसी को खुद से फ़ुर्सत
  •  
  • बस एक बात है उसमें बुरी,सफ़रे-इश्क
  • में भी, जगाने की है उसको आदत





  • मेरे सीने में दर्द जब पाया राहत
  • तब मिट गई वस्ल1 की हर चाहत
  •  
  • फ़ुर्सते-हस्ती2 का गम नहीं मुझको
  • उम्रे अजीज का क्यों करूँ इबादत
  •  
  • मुझसे उसकी कोई दुश्मनी नहीं,क्यों 
  • वह, किसी और से करे मुहब्बत
  •  
  • तेग-बे-आब3 है वह, मरने के पहले
  • कब दिया किसी को खुद से फ़ुर्सत
  •  
  • बस एक बात है उसमें बुरी,सफ़रे-इश्क
  • में भी, जगाने की है उसको आदत
  •  




  • गैर की जिक्रे वफ़ा न करो तो अच्छा है
  • जहरे - हलाल को कंद न कहो तो अच्छा है
  •  
  • जिस राह पे चलके दिल मेरा खाक हुआ
  • उस राह चलने न कहो , तो अच्छा है
  •  
  • राहे मुहब्बत में किसी का कोई रफ़ीक नहीं होता
  • तुम्हीं कहो,तुम अच्छी या तुम्हारा हिज्र अच्छा है
  •  
  • जिस बात से बेगानगी की बू आती हो
  • खुदा के लिये वैसी बात, न करो तो अच्छा है
  •  
  • तुम्हारी चाहत ने अर्श पर बिठाकर रखा मुझे
  • नजरों से न गिराओ , तो अच्छा है





  • जिस दिल की जान हो
  • तुम, उसी से अनजान हो
  •  
  • कहते हया आती है, साकी
  • तुम कैसे पासबान हो
  •  
  • इश्क की खाक भी न उड़ने 
  • दिया , फ़िर क्यों परेशान हो
  •  
  • तुम्हारे हाथ बज्म की शमा नहीं
  • तुम कैसे मेजबान हो
  •  
  • गैर की फ़िक्रे-वफ़ा आईने से
  • मत करो , अभी तुम जवान हो





  • साकी ! क्या कहा तुमने अपने दीवाने से
  • मय उड़ी जा रही मेरे पैमाने से
  •  
  • ता उम्र मैंने बीमार मोहब्बत की दवा की
  • कहा न कभी सरगुजश्त अपना , जमाने से
  •  
  • फ़िर भी हर जबाँ पे मेरी रुसवाई के फ़साने रहे
  • क्या मिला छाती पर जराहत खाने से
  •  
  • साकी ! वादे बहार से दूर रखने का, यह तुम्हारा 
  • अच्छा बहाना है,कौन रोका है,इस तरह तड़पाने से
  •  
  • इससे तो अच्छा था, फ़ूँक देती एक बार ही
  • क्या मिलेगा तुमको ठहर –ठहर के जिलाने से
  •  
  • देखना, निकल पड़ेंगे आँसू तुम्हारे भी, जब तुम
  • ढूँढ़ोगी , हम दीवानों को किसी बहाने से






  • नज़र की चाह रूकती है नज़र से
  • कौन कहे जाकर , उस बेखबर से
  •  
  • है बेकार की बातें , कहना कि
  • मैं मज़बूर हूँ अपने मुकद्दर से
  •  
  • आईने की तरह साफ़ है किस्मत, जो
  • दुश्मनी छोड़ , देखो दोस्ती की नज़र से
  •  
  • यही बात चाहा था उससे बताना मगर
  • खुलती कहाँ जुबां , उसके डर से
  •  
  • वरना कहे देता ,इश्क नहीं बुल के वश में
  • जो लड़ा रही हो आँख , जानवर से
  •  
  • जो देती साथ किस्मत,उठाकर नकाब उसका;मैं भी 
  • देख लेता कुदरत का नज़ारा अपनी नज़र से



  • राहें मोहब्बत में गम हजार मिले
  • कुछ इस पार , कुछ उस पार मिले
  •  
  • हम क्यों न उसकी सादगी पर मरें,जिसके
  • हाथों कत्ल हुए, हाथ में न तलवार मिले
  •  
  • जहाँ की हस्ती में अदम की कूच की चाहत
  • न हो, ढूँढ़कर भी हमें न ऐसी दयार मिले
  •  
  • दुनिया के तरीके ,इश्क की राह में चलना
  • आसान नहीं, कहीं चढ़ाव कहीं उतार मिले
  •  
  • हजारों दिल ने हमें जोशे जुनून इश्क में
  • दिये , उससे माँगा,तो वर्षों का इंतजार मिले

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