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  1. उस बेवफ़ा को हम आज भी याद करते हैं
  2. उसकी सलामती की दुआ, फ़रियाद करते हैं
  3.  
  4. जिसको रात-दिन तसव्वुर-ए-जाना किये हम बैठे 
  5. रहे, वो अक्सर मेरे गुजर जाने की बात करते हैं
  6.  
  7. सुना था मैदाने- वफ़ा में नाम औ- नसब की
  8. बात नहीं पूछी जाती, वो जात की बात करते हैं
  9.  
  10. समझ में नहीं आता, क्यों उस निगाहे नाज
  11. को हम नज़अ में भी याद करते हैं
  12.  
  13. जमाने की नज़र में मिटी जा रहीं,जिंदगी की कद्रें
  14. और हम गम से निजात की बात करते हैं





  15. हम तुम पर अपनी जान वारे हैं
  16. तुम कहती हो,हम नहीं तुम्हारे हैं
  17.  
  18. बद्गुमानों से इश्क का दावा कर
  19. हम हर बार शर्त हारे हैं
  20.  
  21. यह फ़साना तुम्हारा नहीं
  22. मगर चर्चे हर जगह तुम्हारे हैं
  23.  
  24. कहते,दिल दोनों का मिलता नहीं
  25. मिलती केवल घर की दीवारें हैं
  26.  
  27. अब गर्मी-ए-इश्क भी नहीं रही
  28. ये खुद के दिल से भी बेसहारे हैं




  29. तेरे संग बैठा , अपना यार देखा
  30. देखने की चीज थी ,बार- बार देखा
  31.  
  32. माना कि मैं तेरे काबिल नहीं,फ़िर भी
  33. दिलकशे दिल मेरा, तेरा इंतजार देखा
  34.  
  35. रात महफ़िल में हुस्न बेपरवाह को
  36. परदादारी किये,दिलजलों में शुमार देखा
  37.  
  38. अंदेशा ए-तूफ़ां से काँपता दिल मेरा
  39. चमन में,मौसमें बहार को सोगवार देखा
  40.  
  41. मुँद गईं, खोलते ही खोलते आँखें उसकी 
  42. वक्त से पहले चला गया, बीमार देखा



  43. साँझ हुई , वे घर न आये
  44. अब तक कोई खबर न आये
  45. चौकठ खड़ी मैं राह निहारूँ
  46. चाँद अभी तक नजर न आये
  47. बदरा रे तू उनसे जा कहना
  48. बरस बीते, क्यों इधर न आये
  49. यार मेरा मुझसे रुसवा हुआ है
  50. प्यार का उनको कदर न आये
  51. आहों के शोले उठ रहे जां से
  52. कण भर भी राख नजर न आये



  53. मेरा रंग – रूप बिगड़ गया
  54. मेरा प्यार मुझसे बिछुड़ गया
  55. अब ढूँढूँ तुझे मैं कहाँ- कहाँ
  56. मेरा यार तू किधर गया
  57. तुम बिन जीना हुआ दुशवार 
  58. जीवन कण- कण में बिखर गया
  59. कर मुझे तकदीर की बेरुखी के 
  60. हवाले, मेरा यार तू किधर गया
  61. दीखे न जहाँ से यार की गली
  62. क्यों तू ऐसा सफ़र गया



  63. कौन चला रे, यह कौन चला
  64. जग छोड़कर ,यह कौन चला
  65. किसकी साँस घबड़ाकर दिले –
  66. तुंग को तोड़ा रे,यह कौन चला
  67. ब्राह्मण आओ, ग्यानी आओ
  68. बतलाओ, यह कौन चला
  69. इसे रोको, इसे मनाओ, नींद
  70. से जगाओ,पूछो,यह कौन चला
  71. मेरा पुत्र या तेरा -सखा
  72. इसका प्रेमी या उसका पिता
  73. कौन चला रे, कौन चला
  74. जग छोड़कर यह कौन चला
  75. धू –धू कर मिट रहा तन,माटी
  76. से मिल जा रहा,यह कौन चला



  77. हम पे जो गुजरी , हम जानते हैं
  78. बाकी तुम्हारे, रहमो-करम जानते हैं
  79. फ़ैलाया है जो तुमने गम का अंधेरा
  80. वह कितना है गहरा, हम जानते हैं
  81. दुनिया हमारी वीरान हो गई, हमारा
  82. दर्द बेजुवां क्यों रहा, हम जानते हैं
  83. दिन कटता नहीं, कुछ जँचता नहीं
  84. रात कटती नहीं क्यों, हम जानते हैं
  85. अश्क आँखों में अब आता नहीं
  86. साँस टूटती नहीं क्यों, हम जानते हैं
  87. हमारा यह जीवन अमानत है जिसका
  88. वह लगता हमारा कौन, हम जानते हैं




  89. अरमां है तुम्हारे दर्दे गम की दवा हो जाऊँ
  90. कभी फ़ूल, कभी शबनम,कभी शोला हो जाऊँ
  91. तुम्हारी आँखों में बसूँ,तुम्हारे दिल में रहूँ
  92. तुमसे दूर होने की सोचूँ,तो तनहा हो जाऊँ
  93. अब यह न कहना कि,अधूरा हूँ मैं
  94. मुझे बाँहों में भरो कि मैं पूरा हो जाऊँ
  95. हर मुहब्बत दुलहन बने,जरूरी तो नहीं
  96. इश्क इबादत है मेरी,कैसे मैं खुदा हो जाऊँ
  97. हँस-हँस के पूछते हैं, लोग नाम तुम्हारा
  98. खुदा का नाम बता दूँ और रुसवा हो जाऊँ
  99. तुम्हारा प्यार समंदर है,डूबी जा रही हूँ मैं
  100. रोक लो मुझको, इसके पहले मैँ फ़़ना हो जाऊँ
  101. तुम मेरी जान हो.जहर दे दो,मगर यह न कहो
  102. यह कैसी बात है, मैं गुस्सा हो जाऊँ
  103. गम ने खुद आके दिया है सहारा मुझको
  104. मैंने कब मांगा था हाथ कि,मैं उसका हो जाऊँ



  105. ऐन वक्त पर बात बिगड़ गई
  106. उस बेवफ़ा से आखें लड़ गईं
  107. देखा जो , डूबकर वीराना था वहाँ
  108. पसरा हुआ, जहाँ तक नज़र गई
  109. पहले प्यार , फ़िर इनकार , बाद
  110. अपने हर वादे से मुकर गई
  111. कहें क्या जो पूछे हमसे कोई
  112. कल जो आई , आज किधर गई
  113. हम सिज़दा करते रहे,उसके कदमों में
  114. वह , सुखी रहो , दुआ कर गई




  115. पहले दर्द , फ़िर देते हो दवा
  116. क्यों शोले को करते हो हवा
  117. खता मेरी नजरों ने की है
  118. दिल को क्यों देते हो सजा
  119. काम मर्दों का कर सके नहीं
  120. हमीं को कहते हो बेवफ़ा
  121. दुश्मनी मेरे दिल से रखो
  122. नजरों से क्यों करते हो गिला
  123. बेड़ियाँ दिल को पिन्हाकर
  124. पाँव को करते हो रिहा




  125. देखिए ! लोग हमें क्या कहते हैं
  126. हमारी ज़फ़ा को वफ़ा कहते हैं
  127. ति का फ़ेर है या वरना
  128. कोई जहर को दवा कहते हैं
  129. रख अपनों से दुश्मनी
  130. गैर को अन्दोरूबा कहते हैं
  131. रूठता जब भाग्य जिंदगी से
  132. बुरे कर्मों की सजा कहते हैं
  133. सुनाकर अपनी पीड़, न जाने
  134. और ये क्या- क्या कहते हैं




  135. उसका पावन मन देखा है
  136. सितारों को ओढ़े कफ़न देखा है
  137. कैसे कोई भरोसा करे किसी पर
  138. दोस्त सा न कभी , दुश्मन देखा है
  139. चाहत का हर फ़ूल खिले जहाँ
  140. ऐसा न कोई , चमन देखा है
  141. इस रंग बदलती दुनिया में
  142. अपनों का परायापन (बेगानापन) देखा है
  143. कभी फ़ूलों से झड़ती आग, कभी
  144. चाँदनी में , दहकता गगन देखा है




  145. नये वर्ष का नया दिन मुबारक है आपको
  146. मिले वह सब कुछ, जिसकी चाहत है आपको

  147. कभी न बेरहम हो, वक्त का मिज़ाज़ आप पर
  148. हर हसीन वादियों में घूमने की इजाजत है आपको

  149. चुप सी है मोहब्बत की फ़ज़ा,कुछ न कहिये मुँह से
  150. ऐसे भी इशारों में कहने की आदत है आपको

  151. काट डालिये बेबसी की हर जंज़ीर को,ख़ुदा से
  152. बेफ़िक्री में घूमने की मिली ज़मानत है आपको

  153. कभी न अस्त हो आपके भाग्य का चमकता सूरज
  154. चाँद- तारों से भरा आँगन मुबारक है आपको

  155.  



  156. आ जा कि तेरा आज भी इंतजार है

  157. तेरे बिन दुनिया में जीना दुशवार है

  158. तेरी नजरों से हम दूर सही ,मगर मेरा

  159. दिल आज भी तेरी जुल्फ़ों में गिरफ़्तार है

  160. जाने क्या सकून मिलता ,तेरी गली में,मेरे

  161. दिल को पाँव बढ़ता चला आता यहाँ,बार-बार है

  162. माना कि दुनिया में खुशियों की कमी नहीं

  163. मगर ,अपने यार बिना सब कुछ बेकार है

  164. तू रह कहीं, मर्जी तेरी, मगर इतना तू

  165. याद रख, यह दुनिया एक बाजार है



  166. दिल न लगाओ , गले लगाकर तो देखो

  167. पास न सही , दूर बिठाकर तो देखो

  168. दुनिया के हर रंग बदले नजर जायेंगे

  169. मेरा गीत अपने होठों पर सजाकर तो देखो

  170. मिलता है दुनिया में, बड़ी मुश्किल से,कोई

  171. चाहनेवाला,हर्ज क्या,एक बार आजमाकर तो देखो

  172. खिलते हैं फ़ूल वीरानों में भी कभी – कभी

  173. कोई फ़ूल मेरी हसरत की खिलाकर तो देखो

  174. आना ब- बन्दाखाना, अगर मंजूर नहीं तुमको

  175. तो अपने घर मुझको ही बुलाकर तो देखो



  176. तुम  अपनी  कोई  कहानी मेरे नाम कर दो
  177. बीती  जा  रही  जवानी  मेरे  नाम कर दो

  178. मुहब्बत  में  सब  कुछ  जायज  है  होता
  179. तुम  अपनी  कोई निशानी मेरे नाम कर दो

  180. ढूँढ़्ते- ढूँढ़ते  ढूँढ़  लेंगे  तुमको  ऐ  बेनिशां
  181. तुम  अपनी  परेशानी  मेरे  नाम  कर  दो

  182. दरिया  की  तरह  बहती  जा  रही  अपनी
  183. जवानी  के  दो  बूँद पानी मेरे नाम कर दो

  184. निकलते  ही  दम, उठ  जायेंगे जहाँ से हम
  185. तुम अपनी कोई गजनिहानी मेरे नाम कर दो




  186. तुमको जवां रात न कहूँ,तो और क्या कहूँ
  187. हूर  को  हूर न कहूँ , तो और  क्या कहूँ
  188.  
  189. तुम्हारी  ये आँखें  बड़ी कातिल  हैं सनम
  190. इन्हें  कातिल न  कहूँ, तो और  क्या कहूँ
  191.  
  192. हजारों दीये आरजुओं के एक संग बुझ गये
  193. उसे  बेरहम न  कहूँ , तो और  क्या  कहूँ
  194.  
  195. जन्नते  तसवीर  हो  तुम, मेरे  ख़्वाब की
  196. तुमको  ख़ुदा  न कहूँ, तो  और क्या  कहूँ
  197.  
  198. अपनी दुआओं का असर देख ली, मैंने उसे
  199. बेवफ़ा को बेवफ़ा न कहूँ, तो और क्या कहूँ   



  200. बाकी है बोतल में अभी भी शराब,महताब मत देखो
  201. उसके  और खुद  के दरमियां  का हिसाब  मत  देखो
  202.  
  203.  
  204. सफ़र  जिंदगी का   तय करना  है  तुमको अकेले  ही
  205. किस –किस का  मिला न साथ,पलट कर मत देखो
  206. जहाँ फ़िसलती  जा  रही है, जीवन  से जिंदगी
  207. रेत – सी  फ़कीरे इश्क  की, जात  मत  देखो
  208.  
  209. बेरहम जमाना जिल्लत के सिवा तुमको दिया ही 
  210. क्या और तुमसे लिया क्या, इतिहास  मत देखो
  211.  
  212. बदलना  है  तुमको  कर्मों  से  तकदीर  अपनी
  213. तनहा  बैठकर  अकेले में, लकीरें हाथ मत देखो
  214.  
  215. आग  तो  दिल में लिए सभी  घूमते हैं, किसने
  216. लगाई  यह आग, कौन  हुआ  खाक, मत देखो
  217.  
  218. शामे गम है,कुछ उस निगाहें–नाज की बात, करो
  219. ख्वाहिशें  होंगी  दिल  की पूरी, आश मत  देखो
  220.  



  221. मोहब्बत  में अश्क की  कीमत कभी कमती नहीं
  222. अंधेरे  में रहकर  भी  रोशनी  कभी  मरती नहीं
  223.  
  224. नजरों   का   यह  धोखा    है   वरना  कभी
  225. कहीं   आसमां    से   धरती   मिलती   नहीं
  226.  
  227. चिनगारी  होगी  राख  में दबी तो  धुआँ उठेगा
  228. ही, मोहब्बत  की  आग   कभी  छिपती  नहीं
  229.  
  230. कहते  हैं  यह  घर   भूत  का  डेरा  है, यहाँ
  231. हजारों आत्माएँ रहती हैं,तभी तो यह ढहती नहीं
  232.  
  233. जिंदगी  एक  जंग है, हर साँस पर फ़तह होगी
  234. ऐसी  तकदीर , कभी  किसी  को मिलती नहीं
  235.  
  236. कौन  कहता इश्क  में हर मंजिल इन्किलाब है
  237. आशिक  की  नीयत   कभी  बदलती    नहीं
  238.  
  239. ऐसी  मुहब्बत को  हम क्या  कहें, जहाँ आँखें
  240. तो  मिलती हैं, मगर नजरें कभी  मिलती नहीं



  241. तुम्हारे नाम से सँवरना,अच्छा लगता है
  242. तुम्हारी यादों में जलना,अच्छा लगता है
  243.  
  244. तुम मेरे पास रहो न रहो,तुम्हारी तसवीर
  245. से   लगकर , रोना  अच्छा  लगता  है
  246.  
  247. कौन  यहाँ  आया  है  जीने  के  लिए
  248. घूँट - घूँटकर मरना  अच्छा  लगता  है
  249.  
  250. गुलाब गुलशन में महके ,या मेरे छत पर
  251. मुझे तो उसका महकना अच्छा लगता है
  252.  
  253. यादों की घाटी में, तुम्हारी स्मृति के पीछे
  254. तितली बन  उड़ते रहना अच्छा लगता है
  255.  
  256. तकिये पर लिख नाम तुम्हारा,आँसू बहाकर
  257. मिटाना ,मिटाकर लिखना अच्छा लगता है





  258. आँखों  से यूँ न, बरसात  करें
  259. चलो  चलकर कुछ  बात करें
  260.  
  261. जीवन की हरियली बनी रहे
  262. इसके लिए  कुछ शुरूआत करें
  263.  
  264. अमरैया  में  झूले  पड़  गये
  265. हम  भी खुशियाँ  गात करें
  266.  
  267. मिलकर  एक  दूजे  के गले
  268. मधुर  प्यार  का  संजात करें
  269.  
  270. एक   दूजे    में   खो जायें 
  271. रातों  को    मदमात   करें



  272. चले हो जब , किस-किस का मिला साथ , मत देखो
  273. रात अंधेरी है , मौसम है बरसात , आकाश मत देखो
  274.  
  275. बेरहम दुनिया जिल्लत के सिवा तुमको दिया ही क्या
  276. बदलना  है तकदीर  तुमको, लकीर-ए हाथ मत देखो
  277.  
  278. जलती  हैं यहाँ  रोज चिताएँ, कत्ल  होता  दिल का
  279. आकाश है धुआँ-धुआँ,उड़ रही किसकी खाक,मत देखो
  280.  
  281. शाम –ए-गम है, कुछ उस निगाहें नाज की बात करो
  282. हर  ख्वाहिश  होगी  दिल  की पूरी, आश मत देखो
  283.  
  284. सड़क खून से लाल है निश्चय,किसी इन्सान का कत्ल
  285. हुआ है,हिन्दू की है या मुसलमान की,लाश मत देखो





  286. दूसरों  की  बात  क्यों, हम  स्वयं की बात करें
  287. अपने   घर- परिवार,  देश-समाज  की  बात करें
  288.  
  289.  
  290. मिलती  दो जून  की  रोटी, जिसकी  मेहनत से
  291. देश   के  उन   किसान   भाइयों  की  बात  करें
  292.  
  293.  
  294. रक्त- पात, हिंसा , नफ़रत   की  बात,  पाप  है
  295. हम   प्यार, मानवता , मोहब्बत   की  बात  करें
  296.  
  297.  
  298. हमारा   वतन , चमन   कैसे   बने, उसके   लिए
  299. कुछ     खुशनुमा      फ़ूलों       की    बात     करें
  300.  
  301.  
  302. गीता  , महाभारत  , रामायण, कुरान, पुराण
  303. का  सम्मान  करें,गाँधी,बुद्ध,ईशा  की बात करें




  304. देखो     कहर    मौसम   ने   कैसा   ढाया   है
  305. घर  कब्र  बना, कोई  नहीं  बच पाया है                       

  306. गाँव  वीरान  हो गया , भूत  का  डेरा है
  307. आह  ईश्वर, यह  कैसी  तुम्हारी  माया है
  308.  
  309. दाने - दाने  को  तरस   रहे  हैं  बच्चे
  310. पास  न  माँ  है , न पिता  का साया है
  311.  
  312. सुना  है फ़ितरत  सोती जब,पत्ता भी नहीं
  313. खड़कता , यह   कहर  किसने  ढाया  है
  314.  
  315. क्या  हमारी  तकदीर  में  आती जब रात
  316. उसके भी हिज्र में आता अंधेरा का साया है





  317. बैठे  न कभी पास  हम ,दूर-दूर ही रहे
  318. दिल के करीब रहकर भी,हम दूर ही रहे
  319.  
  320. न  खुद के  हो सके, न जमाने  के ही
  321. निभाते  दुनिया का  हम दस्तूर ही रहे
  322.  
  323. फ़ासले  दरम्यां  जमीं - आसमां  हुये
  324. मगर अपनी  जगह हम मगरूर ही रहे
  325.  
  326. कभी  मंदिर ,कभी मस्जिद ,कहाँ-कहाँ
  327. न फ़िरे ,फ़िर भी घर से हम दूर ही रहे
  328.  
  329. न  जिंदगी  मिली , न मौत ही आयी
  330. बन  कर खाक, उड़ते हम जरूर ही रहे



  331. मैं काला तो हूँ,आप जितना उतना नहीं
  332. झूठा  भी हूँ, आप  जितना उतना नहीं
  333.  
  334. हौसले  भी बुलंद  हैं मेरे, आसमां  को
  335. छू  लूँ,  आप   जितना  उतना   नहीं
  336.  
  337. मैं भी आस्तिक हूँ, मगर मूर्ति पूजन में
  338. विश्वास   आप  जितना  उतना   नहीं
  339.  
  340. मौत,  मौत  है; मौत से  डरता मैं भी
  341. मगर  डरते  आप  जितना उतना नहीं
  342.  
  343. सच है,हस्त जन्नत की बहारों में बंद है
  344. मगर  सोचते आप  जितना उतना नहीं



  345. मोहब्बत   के   जज़्बे    फ़ना   हो  गये
  346. मेरे  दोस्त  क्या  से  तुम  क्या  हो गये
  347.  
  348. कभी  आरजू   थी, निकले   दम तुम्हारा
  349. मेरे  दर  के आगे, उसके  क्या  हो  गये
  350.  
  351. कहते  थे, लो आ  गया  कातिल तुम्हारा
  352. दोनों  हाथ  बाँधे  उनके  क्या  हो  गये
  353.  
  354. वो  बेबाकी  के  दिन,  याद  है  मुझको
  355. तुम्हारे मोहब्बत के जज़्बे को क्या हो गये
  356.  
  357. जब  भी  मिले  तुम,  मिले  मुसकुरा के
  358. आज  नजरों  को  ये  क्या   हो   गये




  359. सड़कें  खून  से  लाल  हुईं , हुआ  कुछ  भी  नहीं
  360. इनसानियत  शरम-सार  हुई , हुआ  कुछ  भी नहीं
  361.  
  362. हर  तरफ़  बम के  धमाके हैं, चीख है, आगजनी है
  363. मगर  सितमगर  को आया  मजा  कुछ  भी  नहीं
  364.  
  365. राहें  चुप  हैं, वीरान हैं ,दहकती  तबाही का मंजर है
  366. प्रशासन   कहती   शहर  में, हुआ  कुछ  भी  नहीं
  367.  
  368. राह लाशों  का  बनाकर  सत्ता के सफ़र पर निकलने
  369. वाले  कहते , सब  ठीक  है , हुआ  कुछ  भी  नहीं
  370.  
  371. ईश्वर करे,तुम्हारे घरों में भी पत्थर गिरे,कोहराम मचे
  372. आकाश फ़टे,तब कहना,सब ठीक है,हुआ कुछ भी नहीं




  373. मुसलमान  कहता मैं उसका हूँ
  374. हिन्दू   कहता    मैं   उसका  हूँ 
  375.   
  376. या खुदा तुम बता क्यों नहीं देते
  377. आखिर   हिस्सा मैं  किसका हूँ
  378.   
  379. फलक   में  फंसी है जान मेरी
  380. इन्सान  हूँ  या  मैं फ़रिश्ता हूँ
  381.   
  382. मंदिर का हूँ या मसजिद का हूँ
  383. राम हूँ, रहीम हूँ या मैं ईशा हूँ
  384.  
  385. शमां  चुप है , आईना  परेशां है
  386. आशिक शिशदार है,मैं किसका हूँ





  387. मुझ पत्त्थर दिल इन्सान में, वफा ढूँढते हो तुम
  388. खामोश मकबरे    में,    खुदा  ढूँढते   हो   तुम
  389.  
  390. गरीब  की   मौत पर शोक नहीं मनाये जाते
  391. उनकी   लाशों के लिए  कफन  ढूँढते  हो तुम
  392.  
  393. गड़े  मुर्दों  को आज क्यों उखाड़ रहे हो तुम 
  394. उनमें  अपनी  दुआ  का  असर ढूँढते  हो तुम 
  395.  
  396. सदा से  गरीब का  खून  अमीर  पीता   आया
  397. अब  उनके  लहू में  पिता को ढूँढते हो  तुम 
  398.  
  399. अंतिम समय में खाक भी खुद के संग न होगी
  400. व्यर्थ   साड़ी,  गाड़ी,   बंगला   ढूँढते  हो     तुम 
  401.  
  402. सूरज   की   तपिस   बड़ी   तेज  होती जा रही है
  403. कोई घनी छाया  को क्यों  नहीं  ढूँढते हो तुम
  404.  




  405. जिंदगी, नसीब  के  साथ  चलना है तुझे
  406. न   चाहकर  भी  संग  रहना  है  तुझे
  407.  
  408. उससे   अलग  तेरी,   कोई  कद   नहीं 
  409. राह का खार क्या,गुल भी कुचलना है तुझे
  410.  
  411. जिंदगी, तेरे  कब्जे  में  तू खुद  भी नहीं
  412. बख़्त  के साथ  गिरना, सँभलना  है तुझे
  413.  
  414. माना  कि तू हकीकत  है और कहानी भी
  415. फ़िर  भी  ऋतु  के साथ  बदलना है तुझे
  416.  
  417. ऐसे तो,अभी रुकने का बख़्त नहीं,फ़िर भी
  418. नसीब  रुकाये   तो    रुकना  है   तुझे
  419.  



  420. हुस्नवालो , कभी  मेरी  गली भी आया करो
  421. नर्म  इशारों   से   मुझे  भी  बुलाया  करो
  422.  
  423. मैं  भी   हूँ . तुम्हारे  चाहनेवालों  में  एक
  424. अफ़साना ऐ दिल, कभी मुझे भी सुनाया करो
  425.  
  426. माना  कि  सैरे- बाग  हो  तुम, हर   वक्त
  427. मौजे- मये-  नाब  से  न   लहराया   करो
  428.  
  429. बेज़ार अगर  मिल जाये, कोई तुमको मुझसे 
  430. मुख्तार बेहतर,तो उससे भी दिल लगाया करो
  431.  
  432. घेरा  है जो गम मुझको, मिले उससे फ़ुरसत
  433. कभी   मेरी  गली  भी, जी  बहलाया  करो
  434.  


  435. जिंदगी  लम्हा -लम्हा  घटती  चली  गई
  436. हवा,   दरिया   सी,  बहती  चली  गई
  437.  
  438. अब   कैसी  लड़ाई  उससे, जीवन   को
  439. तमाशा- ऐ- जमाना  बनाकर  चली  गई
  440.  
  441. साजे दिल को जब जरूरत थी ,जिंदगी की
  442. आवाज की,तब ठुकराकर जिंदगी चली गई
  443.  
  444. जलते - जलते   सुबह  से  शाम  गुजरी
  445. दिल    है   शोला , बताकर  चली  गई
  446.  
  447. दिले  दर्द की  फ़रियाद क्या सुनाऊँ, बगैर
  448. आईने  का  जलवा  दिखाकर  चली  गई



  449. साया - ए -गुलेशाख   की  देख, डरता   क्यूँ   हूँ  मैं
  450. दो  पल  ठहरने  से  घबड़ाता  क्यूँ  हूँ   मैं
  451.  
  452. यतीम दिल याद कर जिसे,रहता था सबदे गुल
  453. पाकर  उसे   अपने  करीब, रोता  क्यूँ  हूँ मैं
  454.  
  455. लाया  है  शौक  मेरा, मुझे  इस मयखाने में
  456. इसी आस्तां पर गुजरेगी उम्र,सोचता क्यूँ हूँ मैं
  457.  
  458. बूते  काफ़िर  को  पूजना,  मजबूरी  है  मेरी
  459. खल्क  छोड़  न  दे कहीं, सोचता क्यूँ  हूँ मैं
  460.  
  461. जब  रही  न  ताकतें, करवट फ़ेरने  की, अब
  462. तब  उस  सुख्न  को  पास  बुलाता क्यूँ हूँ मैं





  463.  

  464.  
  465. मैं  अपने हाथों  में गुलाब  लिये फ़िरता हूँ
  466. तन  पिंजरे में  दिल बेताब लिये फ़िरता हूँ
  467.  
  468. मिल  जाये  कहीं, मेरे  दिल   की   रानी
  469. खुली  आँखों  में  ख्वाब  लिये  फ़िरता  हूँ
  470.  
  471. टकराये न कभी सय्यारे ,तेज गर्दिशे-दौरों में
  472. आँखों  में अश्रु  का सैलाब  लिये फ़िरता हूँ
  473.  
  474. कैद है जिसमें बदनसीब मोहब्बत की बे-रुखी
  475. कहानी ,मैं  वो  किताब  लिये  फ़िरता   हूँ
  476.  
  477. जमाना  दम  साधे  बैठा है जिस सवाल पर
  478. मैं  उस  सवाल का  जवाब  लिये फ़िरता हूँ




  479.  

  480.  
  481. माना   कि मय  जिंदगी  के लिए जहर है
  482. मगर यह  मुझे खुद  से भी अजीमतर है
  483.  
  484. जमाने  ने  किया  है, जो  वार मुझ पर
  485. सीने  में  छुपा  अब भी  वह  नश्तर है
  486.  
  487. एक  दिन  लूँगा  जमाने  से  इन्तकाम
  488. यह तय  है, जोश  अभी  भी  अंदर  है
  489.  
  490. पहले  पता  कहाँ था,आदमी, आदमी पर
  491. पड़ता   भारी   भी   इस    कदर   है
  492.  
  493. सुना   था,  उसके   हुक्म   के  बिना, पत्ता भी
  494. नहीं खड़कता,तो फ़िर यह किसका कहर है




  495. उठो ,  जागो   भारत  के  वीर  नौजवान
  496. हिन्द कराह  रहा   है, हवा  है लहूलुहान
  497.  
  498. बुझ गई इन्सां  के दिल की तरह,राहें वफ़ा
  499. अपने ही खून  से  इन्सां  कर रहा स्नान
  500.  
  501. डार चढ़कर  तुम कर दो यह  नारा एलान
  502. डगर नहीं भगत सिंह का है हमसे अनजान
  503.  
  504. सफ़े  दुश्मनों  को बता दो, सुना दो ,कर्ज़
  505. रखता  नहीं  बाकी किसी का, हिन्दुस्तान
  506.  
  507. सहर  से कह दो, न  घबड़ाये  कभी, जो
  508. चाहूँ तो उतारकर रख दूँ,जमीं पे आसमान




  509.  

  510.  
  511. मेरे   प्यार    को  इन्तिहां   चाहिए
  512. फ़ूल   एक   दरमियां   चाहिए
  513.  
  514. गम     की     दवा     बन    सके   जो
  515. ऐसा    एक   रहनुमा  चाहिये
  516.  
  517. मुबारक  हो    जन्नत  ज़ाहिदों  को
  518. मुझे  अश्कों का कहकहा चाहिये
  519.  
  520. जिसकी  याद मिटे, मुद्दतें गुज़रीं
  521. उसके  होने  की  निशां  चाहिये
  522.  
  523. अपनी खामोशी को कर सकूँ बयां
  524. मेरे   दर्द  को   जुबां   चाहिये
  525.  




  526.  

  527.  
  528. तुमको  चाहा, यह  मेरी भूल  है सनम
  529. पत्थर  में  रहता  ख़ुदा, भूल  है सनम
  530.  
  531. हार    गुलाब    के    गले   में   लगते  सुंदर
  532. मगर,     रहते     वहाँ,    शूल    हैं      सनम
  533.  
  534. अच्छा था, पहले  मैं था,मेरी तनहाई थी
  535. अब   हम  दोनों   के    बीच   बबूल  है  सनम
  536.  
  537. ऐ हुश्न, तुमसे  मेरी  कोई शिकायत नहीं
  538. तुम्हारी  हर बात  मुझे  कबूल है सनम
  539.  
  540. मगर वक्त-बेवक्त दिल से निकला न करो
  541. घर  को घर न  समझना, भूल है सनम




  542.  

  543.  
  544. क्यों   करते   नहीं  कोई  बात,  मुझ  दिल - बीमार से
  545. कहते, कटते  हैं लोग  यहाँ फ़ूलों  के  भी धार से
  546.  
  547. जब  तक  ऊँची  न हो , ज़मीर की लौ, तब तक
  548. होते  नहीं  प्राण  रौशन, आँखों   के   दीदार  से
  549.  
  550. अखड़ियों  में जल  रहा, उसके जुल्मों, अव्वली का
  551. चराग,लौ शोला न बन जाये,उसकी सूरते तकरार से
  552.  
  553. मोहब्बत  की राह में कैसी- कैसी मुसीबतें हैं आती
  554. न  चाहकर भी  दिल-ए-हाल बताना  होता यार से
  555.  
  556. जुनूं   दिला   जाता   रह-  रहकर  उसकी  याद
  557. तालए- बेदार   हार   जाता, दिल  -ए -बेकरार से



  558. press news  political news  paintings  awards  special edition  softwares

  559.  

  560. दिल     का     दर्द     बाँटने     चला    हूँ
  561. मरने  से  पहले मुस्कुराने चला हूँ
  562.  
  563. मिल  जाये   कोई  हमदर्द  कहीं
  564. लकीर, तकदीर का मिटाने चला हूँ
  565.  
  566. रोक  लूँ  उसे   अरमान    नहीं
  567. दुनिया  दिल  की  बसाने चला हूँ
  568.  
  569. जिन  जख्मों को  वक्त भरने चला
  570. उन्हीं  जख्मों  को कुरेदने चला हूँ
  571.  
  572. आँखों  में  नमी,  लवों  पे हँसी है
  573. दिल-ए-हाल  है क्या,बताने चला हूँ





  574. दुनिया   में  जीना  आसान नहीं है
  575. सिवा तुम्हारे,कोई पहचान नहीं है
  576.  
  577. मंदिर  में  है, अब  पत्थर बैठा
  578. मिलता  वहाँ  भगवान  नहीं  है
  579.  
  580. कोई  चाहे   कुछ  भी कह  ले
  581. मेरे  दिल  में कोई आन नहीं है
  582.  
  583. माना  कि हुस्न  अभी नादान है
  584. मगर नज़रें  अब नादान नहीं है
  585.  
  586. आखिर  उल- उम्र  क्या   होगा
  587. इसका  जरा  भी ध्यान  नहीं है
  588.  
  589. कत्ल    करती     जिस    बेरहमी  से
  590. जिंदा   रहना, आसान  नहीं  है
  591.  
  592. सब   कसूर   है   निगाहों  की
  593. वरना,  हुस्न  बुहतान  नहीं  है




  594. यह       सागर       क्यों           सूख      चला
  595. हम       सबसे         मुँह        मोड़        चला
  596.  
  597. क्या  जमीने  मोहब्बत  स्वीकार  नहीं
  598. जो   दस्ते- चमन   को   छोड़  चला
  599.  
  600. वो  रंगे- नशात  की  बहारें  हैं  कहाँ
  601. जिसके लिए धरा को तिश्नगी छोड़ चला
  602.  
  603. खोलता नहीं भेद दिल का, क्या बात है
  604. हर लम्हे पर अक्से–वफ़ा को छोड़ चला
  605.  
  606. अब  लेगी साँस  कैसे जमीं शायर की
  607. मेरे  अशआर  को  कुचल, तोड़  चला




  608.  

  609.  
  610. न   तुम   मजबूर   थी, न  मैं  मजबूर  था
  611. रहा  न दिल, दिल के पास,क्या कसूर था
  612.  
  613. गुलशन परस्त नज़रों को गुल कबूल नहीं
  614. बेताब  दिल में, प्यार का कैसा सुरूर था
  615.  
  616. कोई तो रहता था मेरे दिल के आस-पास
  617. तुम  नहीं, तो  कोई तुम  सा  जरूर था
  618.  
  619. प्यार   सौदागरी   नहीं, इबादत   है  ख़ुदा की
  620. तुम्हारे  बेखबर दिल को, खबर जरूर था
  621.  
  622. रोता  फ़िरता  हूं आज उस कूचे में, जहां
  623. कभी  गुलकारी करने का रहता गुरूर था



  624. नकाब में छिपा चेहरा पहचानना मुश्किल हैं
  625. दिए जो जख्म दिल पर,भूलाना भी मुश्किल है
  626.  
  627. कसमें वादे ,बचपन के वह हसीन पल और तुम
  628. यादो के इस सिलसिले को दबाना मुश्किल हैं
  629.  
  630. आइने के सामने सँवारने ,मुस्कुराने पर भी
  631. दिल में बसे दर्द को छिपाना भी मुश्किल हैं
  632.  
  633. गीला - शिकवा और रूसवाइयाँ भी है
  634. पर दोस्तों से दूरियाँ सहना भी मुश्किल हैं



  635. अपने ख्वाबो को संजोना चाहता हूँ जिंदगी
  636. यही आरजू लिए जीता हूँ जिंदगी
  637.  
  638. अगर भटक जाऊ किसी मोड पर कभी
  639. तो रूसवा न होना कभी मुझसे तूु जिंदगी
  640.  
  641. बहलवाने के लिए बहुत है इस दुनिया में
  642. इसलिए मुझे, हमेशा संभाले रखना तूु जिंदगी
  643.  
  644. बहुत काँटे बिखरे होंगे मेरी राह में
  645. हमेशा मेरा हात थामे रखना तूु जिंदगी
  646.  
  647. जीत के नशे में कभी उँडू आसमान में
  648. मेरे पैरो को जमी पर लाना तू जिंदगी
  649.  
  650. थका ,टूटा कभी मैं आऊँ तेरी आगोश मे
  651. मुझे सुकुन की नींद सुलाना तू जिंदगी



  652. क्यों मै रिश्तो की उलझनों मे
  653. सारी उम्र युँही जूझता रहा ?
  654.  
  655. ऐतबार और एहसास के धागों में
  656. मोतियों की तरह उन्हे पिरोता रहा
  657.  
  658. वजूद तो इन्हीं से,जानता था मैं
  659. सिलवटें आने पर क्यों कोसता रहा?
  660.  
  661. सपने तो बहुत संजोये दिनरात
  662. साथ के लिए क्यो तरसता रहा ?
  663.  
  664. बस,यह आख़री बार कहकर
  665. अक्सर रिश्तों की डोर में बंधता रहा
  666.  
  667. सुलझाने पर जान गया हूँ अब ए जिंदगी
  668. के थोड़ी खूशी थोड़े गम में ही मज्जा आता रहा





  669. शक कि बुनियाद पर प्यार अबाद नही होता
  670. एतबार से ही उम्मीद का दामन मायुस नहीं होता
  671.  
  672. कर ले ,कितनी भी जदोजहद नाकाम करने की
  673. हौसला यह दिल में बसा कभी पस्त नही होता
  674.  
  675. आजमाले ले चाहे तु किसी भी तरीके से हमे
  676. समझ जाओगे के ,संगदिल बेहाल नही होता
  677.  
  678. यु रूकसत न कर तु अपने आदावों के जलवेसे
  679. कबक्त इस धडकना पर कुछ असर नही होता




  680. ऑखो के समंदर से छलके ये आसू भी
  681. मझधार मे अकेला छोड ,बह जाते है
  682.  
  683.  
  684. अब तो खामोशी भी इजहार करती हैं
  685. लब्ज़ो का काम तनहाई बया करती हैं
  686.  
  687.  
  688. कितना भी कहे के दिल मे पनपते मोहब्बत के जज़्बात ही तो
  689. तकदिर-ए-दिल की लकिरे बदल देती हैं
  690.  

  691. फिर भी क्यों कुर्बान होने के अफसाने अक्सर ही
  692. लैला मजनू के नसीब में होते हैं




  693. जवाँ जब वक़्त की दहलीज़ पर आंसू बहाता है,
  694. बुढ़ापा ज़िन्दगी को थाम कर जीना सिखाता है। 
  695. तजुर्बे उम्र भर के चेहरे की झुर्रियां बन कर,
  696. किताबे-ज़िंदगी में इक नया अंदाज़ लाता है।  
  697. पुराने ख़्वाब को फिर से नई इक ज़िन्दगी देकर,
  698. अधूरे से पलों को फिर कहानी में सजाता है। 
  699. किसी के चश्म पुर-नम दामने-शब में अंधेरा हो,
  700. बुझे दिल के अंधेरे में शमां फिर से जलाता है। 
  701.  
  702. क़दम जब भी किसी के बहक जाते हैं जवानी में,
  703. भटकती ज़िन्दगी में इक नई आशा दिलाता है।
  704.  



  705. जब वतन छोड़ा……
  706. जब वतन छोड़ा, सभी अपने पराए हो गए
  707. आंधी कुछ ऐसी चली नक़्शे क़दम भी खो गए
  708. खो गई वो सौंधि सौंधी देश की मिट्टी कहां ?
  709. वो शबे-महताब दरिया के किनारे खो गए
  710. बचपना भी याद है जब माँ सुलाती प्यार से
  711. आज सपनों में उसी की गोद में हम सो गए
  712. दोस्त लड़ते जब कभी तो फिर मनाते प्यार से
  713. आज क्यूं उन के बिना ये चश्म पुरनम हो गए! 
  714. किस कदर तारीक है दुनिया मिरी उन के बिना
  715. दर्द फ़ुरक़त का लिए हम दिल ही दिल में रो गए
  716. था मिरा प्यारा घरौंदा, ताज से कुछ कम नहीं
  717. गिरति दीवारों में यादों के ख़ज़ाने खो गए
  718. हर तरफ़ ही शोर है, ये महफ़िले-शेरो-सुखन
  719. अजनबी इस भीड़ में फिर भी अकेले हो गए



  720. खून से मेंहदी रचाते हैं :
  721. अदा देखो, नक़ाबे-चश्म वो कैसे उठाते हैं,
  722. अभी तो पी नहीं फिर भी क़दम क्यों डगमगाते हैं?
  723. ज़रा अन्दाज़ तो देखो, न है तलवार हाथों में,
  724. हमारा दिल ज़िबह कर, खून से मेंहदी रचाते हैं।
  725. हमें मञ्ज़ूर है गर, गैर से भी प्यार हो जाए,
  726. कमज़कम सीख जाएंगी कि दिल कैसे लगाते हैं।
  727. सुना है आज वो हम से ख़फ़ा हैं, बेरुख़ी भी है,
  728. नज़र से फिर नज़र हर बार क्यों हम से मिलाते हैं?
  729. हमारी क्या ख़ता है, आज जो ऐसी सज़ा दी है,
  730. ज़रा सा होश आता है मगर फिर भी पिलाते हैं।
  731. ज़रा तिर्छी नज़र से आग कुछ ऐसी लगादी है,
  732. बुझे ना ज़िन्दगी भर, रात दिन दिल को जलाते हैं।
  733. वफ़ा के इम्तहाँ में जान ले ली, ये भी ना देखा
  734. किसी की लाश के पहलू में खंजर भूल जाते हैं।





  735. भूल कर ना भूल पाए, वो भुलाना याद है
  736. पास आये, फिर बिछड़ कर दूर जाना याद है
  737. हाथ ज़ख्मी हो गए, इक फूल पाने के लिए
  738. प्यार से फिर फूल बालों में सजाना याद है
  739. ग़म लिए दर्दे-शमां जलती रही बुझती रही
  740. रौशनी के नाम पर दिल को जलाना याद है
  741. सूने दिल में गूंजती थी, मदभरी मीठी सदा
  742. धड़कनें जो गा रही थीं, वो तराना याद है
  743. ज़िन्दगी भी छांव में जलती रही यादें लिये
  744. आग दिल की आंसुओं से ही बुझाना याद है
  745. रह गया क्या देखना, बीते सुनहरे ख़्वाब को
  746. होंट में आंचल दबा कर मुस्कुराना याद है
  747. जब मिले मुझ से मगर इक अजनबी की ही तरह
  748. अब उमीदे-पुरसिशे-ग़म को भुलाना याद है




  749. करते तो हैं सभी गलतियां
  750. ढूंढते बस  मेरी  गलतियां
  751.  
  752. सामने आएंगी एक दिन
  753. दोस्तो, आपकी गलतियां
  754.  
  755. तल्खियां ही मुझे  दे गईं
  756. थीं बडी मतलबी गलतियां
  757.  
  758. लूटकर ले गईं चैन ही
  759. ये मरीं दिलजली गलतियां
  760.  
  761. लडकियां जब हुई थीं जवां
  762. तब हुई मतलबी गलतियां
  763.  
  764. खौफ़े औलाद ने दी छुडा
  765. आपसे ’श्याम’ जी गलतियां



  766. वो पहली मुह्ब्बत भुलाई न जाये
  767. करूं लाख कोशिश मगर याद आये

  768. थी बांकी वो चितवन था उलझा मेरा मन
  769. हटी आँख कब थी वो मेरे हटाये
  770. हमारी निगाहें हुई चार थी जब 
  771. थे पलकों ने कुछ ख्वाब स्वर्णिम सजाये
  772. मुझे तो यकीं था उसे पर नहीं था
  773. इसी बात पर हो गये हम पराये  

  774. सुनी उनकी बातें हुये ज़ख्म दिल पर
  775. भला इन पे अब कौन मरहम लगाये
  776. गये चुटकियों में वे दिन चार यारो
  777. कहें सब जिन्हे थे सितारों के जाये
  778. निगाहें पड़ी जब जमाने की हम पर
  779. नहीं उसकी नजरों मे हम थे सुहाये
  780. मुहब्बत के दुश्मन थे आड़े यूं आये
  781. बदन काटकर थे    हमारे बिछाये
  782. बनाए जो बिगड़ा मुक्ददर हमारा
  783. पुकारे मेरा दिल फरिश्ता वो आये
  784. करे मेघ से‘श्याम’फरियाद यारो
  785. मेरे दर्द के गीत उन्हे जा सुनाये
  786. फ़ऊलुन-फ़ऊलुन-फ़ऊलुन-फ़ऊलुन




  787. न भूख ही मिटे यहां न चैन ही मिले कभी
  788. समझ मेरी न आये है क्या जिन्दगी कहें इसे

  789. तुम्ही नहीं हसीन हो जहांन है भरा पड़ा 
  790. अगर यही है आशिकी क्या आशिकी कहें इसे 


  791. है सेन्सक्स चढ़ रहा गरीब भूखों मर रहा
  792. अगर यही है तरक्की क्या तरक्की कहें इसे

  793. दवा नहीं दुआ नहीं मरीज पर मरा नहीं
  794. तुम्ही कहो ऐ दोस्तो क्या दिल्लगी कहें इसे

  795. ये गेरुए पहन-पहन,वे रट रहे खुदा-खुदा
  796. हैं लूट्ते सभी को हैं,क्या बन्दगी कहें इसे

  797. वे दर्द बाँटते नहीं ,न सुख ही बाँटते कभी
  798. अगर यही है दोस्ती क्या दोस्ती कहें इसे



  799. था शजर यहां ईक पूराना वोह कहां गया ?
  800. था यहां ईक आश् यानाँ वोह कहां गया ?
  801.  
  802. था हसीँ मंज़र कितना ? मेरे गावँ का कभी !!
  803. था रिस्ता ईक दरमियानां वोह कहां गयां?
  804.  
  805. क्यों न हो हिस्सा तेरी ,काइनात में , उसका ?
  806. था गरीब का आबोदाना वोह कहां गया ?
  807.  
  808. हो गई सहर लो बस उनके ही ख़याल में ,
  809. था मौसम ईक सुहाना ,वोह कहां गया ?
  810.  
  811. कोई ना समजा "हुसैन ", क्यूं उसको उम्रभर ?
  812. था शख़्श यहां ,ईक दिवाना, वोह कहां गया ?



  813. जलता नही कोई दीया दूर-दूर तक,
  814. ढूंढ़ता रहा मैं तुझ को पिया दूर -दूर तक ।
  815.  
  816. आती रही आहट वोही रात-रात भर,
  817. गुंजती रही पैंजनीयां दूर-दूर तक ।
  818.  
  819. उस पार भी आश्ना किसी का नहीहुं मैं ,
  820. क्यां सोच के में चल दिया था दूर-दूर तक।
  821.  
  822. किस्सा हुआ मुकम्मल ब स स फ़र का यूं ,
  823. रहे हम सफर बादल सियाह् दूर-दूर तक ।
  824.  
  825. सर पर पडे जोह धूंप परछ़ाई फि र कहा ?
  826. फ़ैला हुआ हैं ये सिलसिला दूर- दूर तक।
  827.  
  828. हैं कौन सा फ़न कुछं बताओ "हुसैन" जी,
  829. चर्चे तुम्हारे हैं मियाँ दू र-दू र तक।


  830. Silsilaa वोह आज भी कायम रहा ।
  831. फासला बस दो कदम दायम रहा |
  832.  
  833. Chhid गई Fir से चमन में गुफ़्तगूं ,
  834. बेईमॉं कुछं आज भी मौसम रहा |
  835.  
  836. दे रहा था राह में कोई सदा ,
  837. क्यों सफ़र में तनहा तूं हरदम रह| ?
  838.  
  839. mil गया Fir क्यां लङाई Jit कर ?
  840. हाथ में बस जश्ऩ का परचम रहा |
  841.  
  842. रोक रख्खुं सांस को मैं कब तक भला ?
  843. ढ़ल गया Din वक्त भी तो कम रहा |
  844.  
  845. थी हमारी सब दुआं jis के Liyeay ,
  846. वोह "हुसैन " हम से क्यों बरहम रहा ?




  847. Hai Tereay Daaman Par Zindagee Halkaa Saa Ekk Naam Meraa Hoon
  848.  Musaafeer Tay Heay Jaana Subah Nahee Toh Shaam Meraa ....
  849.  

  850. umadeay Haii fir Abreay karam Barsengeay Na Jaaneay jaakar kahaa'n ?
  851. Reat Par Likh kar Aayaa Hu'n meay Unkeay Naam Payaam meraa.
  852.  
  853.  
  854. Door Kahaa'n Hai Meqada Gar Joh maeay uuth Paau'n Toh !!
  855. Ab Takk Toh Hai Dekho Naa Khalee khali Saa jaam Meraa.....
  856.  

  857. Sirhaaneay Beith kar Raat -Bhar, Bahut Samajayaa Nind Neay,
  858. Koii Na Aayaa Milaney Tujhko Ab Toh DaamanThaam Meraa . ..
  859.  

  860. Iitaraa keay Bhee Too Iitanaa Na chal Maanaa kee Sodaaii Hai Too,
  861. Joh Mujhko Naa Khareed sakaa Too poochhleay Unko Daam Meraa.
  862.  
  863.  
  864. Jaanta Haii Behttar Too Toh ,fir Aaage kyaa Batlaau'n Rabb ?
  865. Hu'n mujhreem main Teraa fir bhee Hai Tujh Par Iimaan Meraa . ...
  866.  
  867.  
  868. Bolaa thaa Haqq " Husen " Main Thee Meree Bas Iitnee See khattaaaa ,
  869. Haii Duniyaa Meay Phir Bhee kyo'n .Naam Bahut Badnaam Meraa ? .....
  870.  

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