poet urdu shayari new


  • Hamare sar par hi kiy!’n waqt ki talwaar girti hai ,
  • Kabhi chhat baith jati hai kabhi divaar girti hai,
  • Pasand aayee nahi bijli ko bhi taqsim aangan ki ,
  • Kabhi is paar girti hai kabhi us paar girti hai,
  • Qalam hone ka !khatra hai agar mai’n sar uthaa Ta hoo’n ,
  • Jo gardan ko jhukayu’n to meri dastar girti hai ,
  • Mai’n apne dasto bazoo par bharosa kiyo’n nahi karta,
  • Hamesha na kh!uda ke hath se patwar girti hai ,
  • Sharafat ko kahi’n jaaye amaa’n milti nahi hai kiya ,
  • Mere dahlez par aakar voh kiyo’n har bar girti hai,
  • Voh amrit ke jo jharne the hue hai’n khushk kiyo’n “Aalam”,
  • Ab is parbat ki choti se lahoo ki dhaar girti hai .





  • غزل 

  • عالم خورشید 
  • ___________________________
  • وہ بھی شامل ہو جاۓ تو اچھا ہو 
  • محفل، محفل ہو !جاۓ تو اچھا ہو 
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  • اسکے ساتھ چلوں تو جی میں آتا ہے 
  • رستہ منزل ہو جاۓ تو اچھا ہو 
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  • کب پروا ہے مجھ کو دنیا ونیا کی 
  • بس وہ حاصل ہو! جاۓ تو اچھا ہو 
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  •  مولا! میرے عاقل کے بھی سینے میں  
  • تھوڑا  دل ول ہو جاۓ تو اچھا ہو 
  • ___________________________
  • میری نظمیں غزلیں جس کی خاطر ہیں 
  • میرا قائل ہو جاۓ تو اچھا ہو 
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  • وہ بھی واقف ہو زخموں کی لذت سے 
  • ظالم بسمل ہو جاۓ تو اچھا ہو 
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  • شام ہجراں ! میری طرح اب اس کا بھی 
  • جینا مشکل ہو جاۓ تو اچھا ہو 
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  • جس بیری کی خاطر ہم نے جوگ لیا 
  • وہ بھی سائل ہو جاۓ تو اچھا ہو 




  • یہ کہانی عجیب ہوتی ہے
  • نوجوانی عجیب ہوتی ہے
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  • ہوش رہتا نہیں کسی شے کا
  • رائیگانی عجیب ہوتی ہے
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  • چاند دیتا ہے دستکیں در پر
  • خوش گمانی عجیب ہوتی ہے
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  • دل کی باتیں زبان سے توبہ 
  • ترجمانی عجیب ہوتی ہے 
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  • ایک صورت کے م!سکرانے سے 
  • گل فشانی عجیب ہوتی ہے 
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  • دل میں کوئی مکین ہوتا ہے 
  • بیکرانی عجیب ہوتی ہے 
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  • ہیرے موتی بھی ہیچ لگتے ہیں 
  • اک نشانی عج!یب ہوتی ہے 
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  • سب سمجھ کر نہیں سمجھنے میں 
  • شادمانی عجیب ہوتی ہے
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  • دھوپ میں کوئی یاد آتا ہے 
  • سائبانی عجیب ہوتی ہے
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  • چین ملتا نہیں کہیں دل کو 
  • لامکانی عجیب ہوتی ہے 
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  • شاعر: عالم خورشید
  • ترتیب وپیشکش :موسٰی آرٹ




  • رائیگانی عجیب ہوتی ہے
  • زندگانی عجیب ہوتی ہے 
  • ..............................
  • پڑھنا آیا تو یہ کھلا مجھ پر 
  • ہر کہانی عجیب ہوتی ہے 
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  • بولتی ہے تو چپ نہیں ہوتی 
  • بے زبانی عجیب ہوتی ہے 
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  • بے سبب کوئی روٹھ جائے تو 
  • سرگرانی ع!جیب ہوتی ہے 
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  • دل کی بازی کو ہار کر دیکھا 
  • کامرانی عجیب ہوتی ہے 
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  • اصل صورت نظر نہیں آتی 
  • بدگمانی عج!یب ہوتی ہے
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  • جب عدو مہربان ہو جاہیں 
  • مہربانی عجیب ہوتی ہے
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  • شوق سے ہم فریب کھاتے ہیں 
  • خوش بیانی عجیب ہوتی ہے 
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  • یار جو موڈ میں چلا آے
  • نکتہ دانی عجیب ہوتی ہے
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  • اپنی حد میں کبھی نہیں رہتی 
  • چھیڑ خانی عجیب ہوتی ہے 




  • रेंग रहे हैं साये अब वीराने में
  • धूप उतर आई कैसे तहख़ाने में

  • जाने कब तक गहराई में डूबूँगा 
  • तैर रहा है अक्स कोई पैमाने में

  • उस मोती को दरिया में फेंक आया हूँ
  • मैं ने सब कुछ खोया जिसको पाने में

  • हम प्यासे हैं ख़ुद अपनी कोताही से
  • देर लगाई हम ने हाथ बढ़ाने में

  • क्या अपना हक़ है ह!मको मालूम नहीं
  • उम्र गुज़ारी हम ने फ़र्ज़ निभाने में

  • वो मुझ को आवारा कहकर हँसते हैं
  • मैं भटका हूँ जिन!को राह पे लाने में

  • कब समझेगा मेरे दिल का चारागर
  • वक़्त लगेगा ज़ख्मों को भर जाने में

  • हँस कर कोई ज़ह्र नहीं पीता आलम
  • किस को अच्छा लगता है मर जाने में



  • रंग-बिरंगे ख़्वाबों के असबाब कहाँ रखते हैं हम
  • अपनी आँखों में कोई महताब कहाँ रखते हैं हम

  • यह अपनी ज़रखेज़ी है जो खिल जाते हैं फूल नए
  • वरना अपनी मिटटी को शादाब कहाँ रखते हैं हम

  • हम जैसों कि नाकामी पर क्यों हैरत है दुनिया को
  • हर मौसम में जीने के आदाब कहाँ रखते हैं हम

  • महरूमी ने ख़्वाबों में भी हिज्र के काँटे बोए हैं
  • उस का पैकर मर्मर का किम्ख्वाब कहाँ रखते हैं हम

  • तेज़ हवा के साथ उड़े हैं जो अवराक़ सुनहरे थे
  • अब क़िस्से में दिलचस्पी का बाब कहाँ रखते हैं हम 

  • सुब्ह सवेरे आँगन अ!पना गूँज उठे चहकारों से
  • तोता, मैना, बुलबुल या सुर्खाब कहाँ रखते हैं हम




  • हम को गुमाँ था परियों जैसी शहजादी होगी
  • किस को ख़बर थी! वह भी महलों की बांदी होगी
  •  
  • काश! मुअब्बिर बतला देता पहले ही ताबीर
  • खुशहाली के ख़्वाब में इतनी बर्बादी होगी

  • सच लिक्खा था एक मुबस्सिर ने बरसों पहले
  • सच्चाई बातिल के दर पर फर्यादी होगी

  • इस ने तो सरतान की सूरत जाल बिछाए हैं
  • खाम ख्याली थी ये नफ़रत मीयादी होगी

  • इक झोंके से हिल जाती है क्यों घर की बुनियाद
  • इस की जड़ में चूक यक़ीनन बुनियादी होगी

  • इतने सारे लोग कहाँ ग़ायब हो जाते हैं
  • धरती के नीचे भी शायद आबादी होगी




  • दरवाज़े पर दस्तक देते डर लगता है
  • सहमा-सहमा-सा अब मेरा घर लगता है

  • साज़िश होती रहती है दीवार ओ दर में
  • घर से अच्छा अब मुझको बाहर लगता है

  • झुक कर चलने की आदत पड़ जाए शायद
  • सर जो उठाऊँ दरवाज़े में सर लगता है

  • क्यों हर बार निशाना मैं ही बन जाता हूँ
  • क्यों हर पत्थर मेरे ही सर पर लगता है

  • ज़िक्र करूँ क्या उस की ज़ुल्म ओ तशद्दुद का मैं
  • फूल भी जिसके हाथों में पत्थर लगता है

  • लौट के आया हूँ मैं तपते सहराओं से
  • शबनम का क़तरा मुझको सागर लगता है

  • ठीक नहीं है इतना अच्छा बन जाना भी
  • जिस को देखूँ वो मुझ से बेहतर लगता है

  • इक मुद्दत पर आलम बाग़ में आया हूँ मैं
  • बदला-बदला-सा हर इक मंज़र लगता है





  • लुत्फ़ हम को आता है अब फ़रेब खाने में 
  • आज़माए लोगों को !रोज़ आज़माने में

  • दो घड़ी के साथी को हमसफ़र समझते हैं 
  • किस क़दर पुराने हैं , हम नए ज़माने में

  • एहतियात रखने की! कोई हद भी होती है 
  • भेद हम ने खोले हैं , भेद को छुपाने में 

  • तेरे पास आने में आधी उम्र गुजरी है 
  • आधी उम्र गुज़रेगी तुझ से दूर जाने में 

  • ज़िन्दगी तमाशा है और इस तमाशे में 
  • खेल हम बिगाड़ेंगे , खेल को बनाने में 

  • कारवां को उनका भी कुछ ख्याल आता है 
  • जो सफ़र में पिछड़े हैं , रास्ता बनाने में





  • बीच भँवर में पहले उतारा जाता है
  • फिर साहिल से हमें पुकारा जाता है

  • ख़ुश हैं यार हमारी सादालौही पर
  • हम ख़ुश हैं क्या इसमें हमारा जाता है

  • पहले भी वो चाँद हमारा साथी था
  • देखें! कितनी दूर सितारा जाता है

  • कब तक अपनी पलकें बंद रखोगे तुम
  • क्या आँखों से कोई नज़ारा जाता है

  • दुनिया की आदत है इसमें हैरत क्या
  • काँच के घर पर पत्थर मारा जाता है

  • कब आएगा तेरा सुनहरा कल आलम
  • इस चक्कर में आज हमारा जाता है





  • * जिस कि दूरी वज्हे-ग़म हो जाती है *
  • जिस कि दूरी वज्हे-ग़म हो जाती है
  • पास आकर वो ग़ैर अहम हो जाती है 
  •  
  • मैं शबनम का क़िस्सा लिखता रहता हूँ 
  • और काग़ज़ पर धूप रक़म हो जाती है 
  •  
  • आन बसा है सेहरा मेरी आँखों में
  • दिल की मिट्टी कैसे नम हो जाती है 
  •  
  • जिसने इस को ठुकराने की जुर्रत की
  • दुनिया उसके आगे ख़म हो जाती है
  •  
  • ऊँचे सुर में हम भी गाया करते थे
  • रफ़्ता रफ़्ता लय मद्धम हो जाती है 
  •  
  • मैं जितनी रफ़्तार बढ़ाता हूँ आलम 
  • मंज़िल उतनी तेज़ क़दम हो जाती है



  • क्या अँधेरों से वही हाथ मिलाए हुए हैं
  • जो हथेली पे चिरा!ग़ों को सजाए हुए हैं
  •  
  • रात के खौफ़ से किस दर्जा परीशाँ हैं हम
  • शाम से पहले चिराग़ों को सजाए हुए हैं
  •  
  • कोई सैलाब न आ जाए इसी खौफ़ से हम
  • अपनी पलकों से समुन्दर! को दबाए हुए हैं
  •  
  • कैसे दीवार-ओ- दर-ओ बाम की इज्ज़त होगी
  • अपने ही घर में अगर लोग पराए हुए हैं
  •  
  • यूँ मेरी गोशानशीनी से शिकायत है उन्हें
  • जैसे वो मेरे लिए पलकें बिछाए हुए हैं
  •  
  • एक होने नहीं देती है सियासत लेकिन
  • हम भी दीवार प दीवार उठाए हुए हैं
  •  
  • बस यही जुर्म हमारा है कि हम भी आलम
  • अपनी आँखों में हसीं ख़्वाब सजाए हुए हैं




  • याद आता हूँ तुम्हें सूरज निकल जाने के बाद 
  • इक सितारे ने ये पूछा रात ढल जाने के बाद 

  • मैं ज़मीं पर हूँ तो फिर क्यों देखता हूँ आसमां 
  • यह ख्याल आया मुझे अक्सर फिसल जाने के बाद 

  • दोस्तों के साथ चलने में भी हैं खतरे हज़ार 
  • भूल जाता हूँ हमेशा मैं सं!भल जाने के बाद 

  • फासला भी कुछ ज़रूरी है चरागाँ करते वक्त 
  • तजरबा ये हाथ आया ,! हाथ जल जाने के बाद 

  • एक ही मंज़िल पे जाते हैं यहाँ रस्ते तमाम 
  • यह खुला मुझ पर मगर रस्ता बदल जाने के बाद

  • वहशते-दिल को बयाबां से ताल्लुक है अजीब 
  • कोई घर लौटा नहीं घर से निकल जाने के बाद 

  • आगही ने हम पे नाज़िल कर दिया कैसा अज़ाब
  • हैरती कोई नहीं मंज़र बदल जाने के बाद 

  • अब हवा ने हुक्म जारी कर दिया बादल के नाम 
  • खूब बरसेंगी घटायें शहर जल जाने के बाद 

  • तोड़ दो 'आलम' कमां या अब क़लम कर लो ये हाथ 
  • लौट कर आते नहीं हैं तीर चल जाने के बाद 




  • हमेशा दिल में रहता है, कभी गोया नहीं जाता 
  • जिसे पाया नहीं जाता, उसे खोया नहीं जाता 
  •  
  • कुछ ऐसे ज़ख्म हैं जिनको सभी शादाब रखते हैं 
  • कुछ ऐसे दाग़ हैं जि!नको कभी धोया नहीं जाता 
  •  
  • बहुत हँसने कि आदत का यही अंजाम होता है 
  • कि हम रोना भी! चाहें तो कभी रोया नहीं जाता 
  •  
  • अजब सी गूँज उठती है दरो-दीवार से हरदम 
  • ये उजड़े ख़्वाब का घर है यहाँ सोया नहीं जाता 
  •  
  • ज़रा सोचो ये दुनिया किस क़दर बेरंग हो जाती
  • अगर आँखों में कोई ख़्वाब ही बोया नहीं जाता 
  •  
  • न जाने अब मुहब्बत पर मुसीबत क्या पड़ी आलम 
  • कि अहले दिल से दिल का बोझ भी ढोया नहीं जाता





  • तोड़ के इसको वर्षो रोना होता है
  • दिल शीशे का एक खिलौना होता है 
  •  
  • महफ़िल में सब हँसते-गाते रहते है
  • तन्हाई में रोना-धोना होता है 
  •  
  • कोई जहाँ से रोज़ पुकारा करता है 
  • हर दिल में इक ऐसा कोना होता है 
  •  
  • बेमतलब कि चालाकी हम करते हैं 
  • हो जाता है जो भी होना होता है 
  •  
  • दुनिया हासिल क!रने वालों से पूछो 
  • इस चक्कर में क्या-क्या खोना होता है 
  •  
  • सुनता हूँ उनको भी नींद नहीं आती 
  • जिनके घर! में चांदी-सोना होता है 
  •  
  • खुद ही अपनी शाखें काट रहे हैं हम 
  • क्या बस्ती में जादू-टोना होता है 
  •  
  • काँटे-वाँटे चुभते रहते हैं आलम
  • लेकिन हम को फूल पिरोना होता है




  • क्यों आँखें बंद कर के रस्ते में चल रहा हूँ 
  • क्या मैं भी रफ्ता रफ्ता पत्थर में ढल रहा हूँ 

  • चारों तरफ हैं शोले हमसाये जल रहे हैं 
  • मैं घर में बैठा बैठा बस हाथ मल रहा हूँ 

  • मेरे धुएं से मेरी हर साँस घुट रही है 
  • मैं राह का दिया हूँ और घर में जल रहा हूँ

  • आँखों पे छा गया है जादू ही कोई शायद
  • पलकें झपक रहा हूँ , मंज़र बदल रहा हूँ

  • तब्दीलियों का न!श्शा मुझ पर चढ़ा हुआ है
  • कपड़े बदल रहा हूँ , चेहरा बदल रहा हूँ

  • इस फैसले से खुश हैं , अफ़राद घर के सारे
  • अपनी खुशी से !कब मैं घर से निकल रहा हूँ

  • इन पत्थरों पे चलना आ जायेगा मुझे भी
  • ठोकर तो खा रहा हूँ , लेकिन संभल रहा हूँ

  • काँटों पे ज!ब चलूँगा , रफ़्तार तेज़ होगी 
  • फूलों भरी रविश है,बच बच के चल रहा हूँ

  • चश्मे की तरह 'आलम' अशआर फूटते हैं
  • कोहे-गिरां की सूरत , मैं भी उबल रहा हूँ





  • हर घर में कोई तहख़ाना होता है
  • तहख़ाने में इक अफ़साना होता है 
  •  
  • किसी पूरानी अलमारी के ख़ानों में 
  • यादों का अनमोल ख़ज़ाना होता है 
  •  
  • रात गए अक्सर दिल के वीराने में 
  • इक साए का आना-जाना होता है 
  •  
  • दिल रोता है, चेहरा हँसता रहता है
  • कैसा-कैसा फ़र्ज़ निभाना होता है 
  •  
  • बढती जाती है बेचैनी नाख़ून की
  • जैस- जैसे ज़ख्म पुराना होता है 
  •  
  • ज़िंदा रहने की ख़ातिर इन आँखों में 
  • कोई न कोई ख़्वाब सजाना होता है
  •  
  • तन्हाई का ज़हर तो वो भी पीते हैं 
  • हर पल जिनके साथ ज़माना होता है 
  •  
  • क्यों लोगों को याद नहीं रहता आलम 
  • इस दुनिया से वापस जाना होता है





  • हर इक दीवार में अब दर बनाना चाहता हूँ 
  • खुदा जाने मैं कैसा घर बनाना चाहता हूँ

  • ज़मीं पर एक मिट!टी का मकां बनता नहीं है 
  • मगर हर दिल में अपना घर बनाना चाहता हूँ 

  • नज़र के सा!मने जो है, उसे सब देखते हैं 
  • मैं पसमंज़र का हर मंज़र बनाना चाहता हूँ 

  • धनक रंगों! से भी बनती नहीं तस्वीर उसकी 
  • मैं कैसे शख्स का पैकर बनाना चाहता हूँ 

  • मेरे ख्वाबों में है दुनिया की जो तस्वीर 'आलम '
  • नहीं बनती मगर अक्सर बनाना चाहता हूँ 






  • हमारे सर प ही वक़्त की तलवार गिरती है
  • कभी छत बैठ जाती है, कभी दीवार गिरती है

  • पसन्द आई नहीं बिजली को भी तक़सीम आँगन की
  • कभी इस पार गिरती है , कभी उस पार गिरती है

  • क़लम होने का ख़तरा है अगर मैं सर उठता हूँ
  • जो गर्दन को झुकाऊँ तो मेरी दस्तार गिरती है

  • मैं अपने दस्त ओ बाज़ू पर भरोसा क्यों नहीं करता
  • हमेशा नाख़ुदा के हाथ से पतवार गिरती है

  • शराफ़त को ठिकाना ही कहीं मिलता नहीं है क्या
  • मेरी दहलीज़ पर आकर वो क्यों हर बार गिरती है

  • वो अमृत के जो झरने थे हुए हैं खुश्क क्यों आलम
  • अब उस पर्वत की छोटी से लहू की धार गिरती है






  • हथेली की लकीरों में इशारा और है कोई 
  • मगर मेरे त!आकुब में सितारा और है कोई 

  • किसी साहिल पे जाऊं एक ही आवाज़ आती है 
  • तुझे रुकना जहाँ है वो किनारा और है कोई 

  • न गुंबद इस ईमारत का, न फाटक उस हवेली का 
  • कबूतर ढूँढता है जो मिनारा और है कोई 

  • तमाज़त है वही बाक़ी अगरचे अब्र भी बरसे 
  • हमारी राख में शायद शरारा और है कोई 

  • अभी तक तो वही शिद्दत हवाओं के जुनूँ में है
  • अभी तक झील में शायद शिकारा और है कोई 

  • मैं बाहर के मनाज़िर से अलग हूँ इसलिए'आलम'
  • मेरे अंदर की दुनिया में नज़ारा और है कोई




  • मिल के रहने की ज़रूरत ही भुला दी गई क्या
  • याँ मुहब्बत !की रिवायत थी मिटा दी गई क्या

  • बेनिशाँ कब के हुए सारे पुराने नक़शे
  • और बेहतर कोई तस्वीर बना दी गई क्या

  • अब के दरिया में नज़र आती है सुर्ख़ी कैसी
  • बहते पानी में !कोई चीज़ मिला दी गई क्या

  • एक बन्दे की हुकूमत है खुदाई सारी
  • सारी दुनिया में मुनादी ये करा दी गई क्या

  • मुँह उठाए चले आते हैं अन्धेरों के सफ़ीर
  • वो जो इक रस्म ए चिरागाँ थी उठा दी गई क्या

  • मैं अन्धेरों में भटकता हूँ तो हैरत कैसी
  • मेरे रस्ते में कोई शम्मा जला दी गई क्या




  • नींद पलकों में धरी रहती थी 
  • जब ख़यालों में परी रहती थी 
  •  
  • ख़्वाब जब तक थे मेरी आंखों में
  • शाख़े- उम्मीद हरी रहती थी 
  •  
  • एक दरिया था तेरी यादों का 
  • दिल के सेहरा में तरी रहती थी 
  •  
  • कोई चिड़िया थी मेरे अंदर भी 
  • जो हर इक! ग़म से बरी रहती थी 
  •  
  • हैरती अब हैं सभी पैमाने 
  • ये सुराही तो भरी रहती थी 
  •  
  • कितने पैबन्द नज़र आते हैं 
  • जिन लि!बासों में ज़री रहती थी 
  •  
  • एक आलम था मेरे क़दमों में 
  • पास जादू की दरी रहती थी




  • क़ुर्बतो के बीच जैसे फ़ासला रहने लगे 
  • यूँ किसी के साथ रहकर हम जुदा रहने लगे 
  •  
  • किस भरोसे पर किसी से आश्नाई कीजिये 
  • आशना चेहरे भी तो नाआशना रहने लगे 
  •  
  • हर सदा ख़ाली मकानों से पलट आने लगी 
  • क्या पता अब किस जगह अहलेवफ़ा रहने लगे 
  •  
  • रंग ओ रौगन बाम ओ दर के उड़ ही जाते हैं जनाब 
  • जब किसी के घर में कोई दूसरा रहने लगे 
  •  
  • हिज्र कि लज़्ज़त जरा उस के मकीं से पूछिये 
  • हर घड़ी जिस घर का दरवाज़ा खुला रहने लगे 
  •  
  • इश्क़ में तहजीब! के हैं और ही कुछ सिलसिले 
  • तुझ से हो कर हम खफ़ा, खुद से खफ़ा रहने लगे 
  •  
  • फिर पुरानी याद को!ई दिल में यूँ रहने लगी 
  • इक खंडहर में जिस तरह जलता दिया रहने लगे 
  •  
  • आसमाँ से चाँद उतरेगा भला क्यों ख़ाक पर 
  • तुम भी आलम !वाहमों में मुब्तला रहने लगे




  • उम्र सफर में गुजरी लेकिन शौके-सियाह्त बाकी है 
  • कोई मुसाफत खत्म हुई है ,कोई मुसाफत बाकी है 

  • ऐसे बहुत से रस्ते हैं जो रोज पुकारा करते हैं 
  • कई मनाज़िल सर करने की अब तक चाहत बाकी है 

  • एक सितारा हाथ पकड़ कर, दूर कहीं ले जाता है 
  • रोज़ गगन में खो जाने की अबतक आदत बाकी है 

  • चश्मे -बसीरत कुछ तो बता दे कब वो लम्हे आयेंगे 
  • जिन की खातिर इन आँखों में इतनी बसारत बाकी है 

  • खत्म कहानी हो जाती तो नींद मुझे भी आ जाती 
  • कोई फ़साना भूल गया हूँ , कोई हिकायत बाकी है 

  • दुनिया के गम फुर्सत दें तो दिल के तकाजे पूरे हों 
  • कूचा-ए-जानां ! !तेरी भी तो सैर ओ सियाहत बाकी है 

  • शहरे-तमन्ना ! बाज़ आया मैं तेरे नाज़ उठाने से 
  • एक शिकायत दूर करूँ तो एक शिकायत बाक़ी है 

  • एक जरा सी उम्र! में 'आलम ' कहाँ कहाँ की सैर करूँ 
  • जाने मेरे हिस्से में अब कितनी मुहलत बाकी है




  • हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ मैं
  • भीड़ बहुत है, !इस मेले में खो सकता हूँ मैं
  •  
  • पीछे छूटे साथी मुझको याद आ जाते हैं
  • वरना दौड़ में सबसे आगे हो सकता हूँ मैं 
  •  
  • कब समझेंगे जिनकी ख़ातिर फूल बिछाता हूँ
  • इन रस्तों पर कांटे भी तो बो सकता हूँ मैं
  •  
  • इक छोटा-सा बच्चा मुझ में अब तक ज़िंदा है
  • छोटी छोटी बात पे अब भी रो सकता हूँ मैं 
  •  
  • सन्नाटे में दहशत हर पल गूँजा करत्ती है
  • इस जंगल में चैन से कैसे सो सकता हूँ मैं
  •  
  • सोच-समझ कर चट्टानों से उलझा हूँ वरना 
  • बहती गंगा में हाथों को धो सकता हूँ मैं





  • दरियाओं पर अ!ब्र बरसते रहते हैं
  • और हमारे खेत तरसते रहते हैं

  • अपना ही वीरानी से कुछ रिश्ता है
  • वरना दिल भी! उजड़ते बसते रहते हैं

  • उनको भी पहचान बनानी है अपनी
  • औरों पर आवाज़ें कसते रहते हैं

  • बच्चे कैसे उछलें, कूदें, जस्त भरें
  • उन की पीठ पे भारी बसते रहते हैं

  • उनके दिल में झाँकें इक दिन हम आलम
  • जिन के हाथों में गुलदस्ते रहते हैं





  • थपक-थपक के जिन्हें हम सुलाते रहते हैं 
  • वो ख्वाब हम को हमेशा जगाते रहते हैं 
  •  
  • उम्मीदें जागती रहती हैं, सोती रहती हैं 
  • दरीचे शम्मा जलाते-बुझाते रहते हैं 
  •  
  • न जाने किस का हमें इन्तिज़ार रहता है 
  • कि बाम ओ दर !को हमेशा सजाते रहते हैं 
  •  
  • किसी को खोजते हैं ह!म किसी के पैकर में 
  • किसी का चेहरा किसी से मिलाते रहते हैं 
  •  
  • वो नक़्शे ख्वा!ब मुकम्मल कभी नहीं होता 
  • तमाम उम्र जिसे हम बनाते रहते हैं 
  •  
  • उसी का अ!क्स हर इक रंग में झळकता है 
  • वो एक दर्द जिसे हम छुपाते रहते हैं 
  •  
  • हमें खबर है दोबारा कभी न आएंगे 
  • गए दिनों को मगर हम बुलाते रहते हैं 
  •  
  • ये खेल सिर्फ तुम्हीं खेलते नहीं आलम 
  • सभी हवा में लकीरे बनाते रहते हैं





  • जब मिटटी खून से गीली हो जाती है
  • कोई न कोई तह पथरीली हो जाती है

  • वक़्त बदन के ज़ख्म तो भर देता है लेकिन
  • दिल के अन्दर कुछ तब्दीली हो जाती है

  • पी लेता हूँ अमृत जब मैं ज़ह्र के बदले
  • काया रंगत और! भी नीली हो जाती है

  • मुद्दत में उल्फ़त के फूल खिला करते हैं
  • पल में नफरत छैल-छबीली हो जाती है

  • पूछ रहे हैं मुझ से पेड़ों के सौदागर
  • आब ओ हवा कै!से ज़हरीली हो जाती है

  • मूरख! उसके मायाजाल से बच के रहना
  • जब तब उसकी रस्सी ढीली हो जाती है

  • गूंध रहा हूँ शब्दों को नरमी से लेकिन
  • जाने कैसे बात नुकीली हो जाती है

  • दर्द की लहरों को सुर में तो ढालो आलम
  • बंसी की हर तान सुरीली हो जाती है





  • कोई मौक़ा नहीं मिलता हमें अब मुस्कुराने का
  • बला का शौक़ था हम को कभी हँसने-हँसाने का
  •  
  • हमें भी टीस की !लज्ज़त पसंद आने लगी है क्या
  • ख़याल आता नहीं ज़ख्मों प अब मरहम लगाने का
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  • मेरी दीवानगी क्यों! मुन्तज़िर है रुत बदलने की 
  • कोई मौसम भी होता है जुनूँ को आज़माने का
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  • उन्हें मालूम है! फिर लौट आएंगे असीर उनके 
  • खुला रहता है दरवाज़ा हमेशा क़ैदखाने का
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  • चटानों को! मिली है छूट रस्ता रोक लेने की
  • मेरी लहरों को हक़ हासिल नहीं है सर उठाने का
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  • अकड़ती जा रही हैं रोज़ गर्दन की रगें आलम
  • हमें ए काश! आ जाए हुनर भी सर झुकाने का




  • अपने घर में ख़ुद ही आग लगा लेते हैं
  • पागल हैं हम अपनी नींद उड़ा लेते हैं

  • जीवन अमृत कब हमको अच्छा लगता है
  • ज़हर हमें अच्छा लगता है, खा लेते हैं

  • क़त्ल किया करते हैं कितनी चालाकी से
  • हम ख़ंजर पर नाम अपना लिखवा लेते हैं

  • रास नहीं! आता है हमको उजला दामन 
  • रुसवाई के गुल-बूटे बनवा लेते हैं

  • पंछी हैं लेकिन उड़ने से डर लगता है
  • अक्सर अ!पने बाल ओ पर कटवा लेते हैं

  • सत्ता की लालच ने धरती बाँटी लेकिन
  • अपने सीने पर तमगा लटका लेते हैं

  • याद नहीं है मुझको भी अब दीन का रस्ता 
  • नाम मुहम्म!द का लेकिन अपना लेते हैं

  • औरों को मुजरिम ठहरा कर अब हम आलम
  • अपने गु!नाहों से छुटकारा पा लेते हैं






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