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shayari sad gum hindi font 2017


  1. दिल के टूटने से नही होती है आवाज़!
  2. आंसू के बहने ~का नही होता है अंदाज़!
  3. गम का कभी भी हो सकता है आगाज़!
  4. और दर्द के होने का तो बस होता है एहसास । ...
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  6. मेरे दिल की ~दुनिया पे तेरा ही राज था।
  7. कभी तेरे सीर पर भी वफाओ का ताज था।
  8. तूने मेरा दिल तोडा पर पता न चला तुझको।
  9. क्योंकि टुटा दिल दीवाने का बे आवाज था। ...
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  11. जख्म बन जाने की आदत है उसकी,
  12. रूला कर मुस्कुराने की आदत है उसकी,
  13. मिलेगें कभी तो खूब रूलाएगें उसको,
  14. सुना है रोते हुए लिपट जाने की आदत है उसकी..!! ...
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  17. जो जले थे हमारे लिऐ,
  18. बुझ रहे है ~वो सारे दिये,
  19. कुछ अंधेरों की थी साजिशें,
  20. कुछ उजालों ने धोखे दिऐ.. ...
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  22. किस्मत ने जैसा चाहा वैसे ढल गए हम ,
  23. बहुत संभल के~ चले फिर भी फिसल गए हम ,
  24. किसी ने विश्वास तोडा तो किसी ने दिल ,
  25. और लोगो को लगा की बदल गए हम ... ...
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  28. उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं,
  29. वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
  30. सोचते हैं ~तुम्हें इतना याद न करें,
  31. लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते ...
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  33. जमीन जल चुकी है आसमान बाकी है,
  34. दरख्तों तुम्हारा इम्तहान बाकी है,
  35. वो जो खेतों की मेढ़ों पर उदास बैठे हैं,
  36. उन्ही की आखों में अब तक ईमान बाकी है,
  37. बादलों अब तो बरस जाओ सूखी जमीनों पर,
  38. मकान गिरवी है और लगान बाकी है..
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  40. उठ-उठ के बैठते हैं रातों का हाल है,
  41. दिन एक गुजरता है~न मेरी आँखों से पूछ लो,
  42. जब से गए हो आज तक गीला रुमाल है ।। ...
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  44. कदम दो चार चलता हूँ, मुकद्दर रूठ जाता है,
  45. हर इक उम्मीद से रि~श्ता हमारा टूट जाता है,
  46. जमाने को सम्भालूँ गर तो तुमसे दूर होता हूँ,
  47. तेरा दामन सम्भालूँ तो, जमाना छूट जाता है..।। ...
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  49. वो मुहब्बत भी उसकी थी वो नफरत भी उसकी थी ,
  50. वो अपनाने और ठुकराने की अदा भी उसकी थी !
  51. मैं अपनी व~फा का इन्साफ किस से मांगता ,
  52. वो शहर भी उसका था वो अदालत भी उसकी थी ! ...
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  55. मुहब्बत की क़िसमत बनाने से पहले,
  56. ज़माने के मालिक तू रोया तो होगा,
  57. मुहब्बत पे ये ज़ुल्म ढाने से पहले,
  58. ज़माने के मालिक तू रोया तो होगा..

  59. .............................................................
  60. टूटे हुए प्याले में जाम नहीं आता...
  61. इश्क़ में मरीज को आराम नहीं आता...
  62. ऐ मालिक बारिश करने से पहले
  63. ये सोच तो लिया होता,
  64. कि भीगा हुआ गेहूँ किसी काम नहीं आता... ...
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  66.   

  67. जब भी होगी पहली बारिश,
  68. तुमको सामने~ पायेंग़े..
  69. वो बुंदो से भरा चेहरा,
  70. तुम्हारा हम कैसे देख पायेंगे..
  71. बहेगी जब भी सर्द हवाये,
  72. हम खुद को त~न्हा पायेंगे..
  73. ... एहसास तुम्हारे साथ का,
  74. हम कैसे महसूस कर पायेंगे..
  75. इस डुबती हुई ज़िन्दगी मे,
  76. तो हम बिल्कुल ही रुक जायेंगे..
  77. थाम लो हमे गिरने से पहल...


  78. .............................................................
  79. ये बेवफा वफा की कीमत क्या जाने !!
  80. है बेवफा गम-ऐ मोहब्बत क्या जाने !!
  81. जिन्हे मिलता है हर मोड पर नया हमसफर !!
  82. वो भला प्यार की कीमत क्या जाने !! ...
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  84.   

  85. बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है,
  86. यह साँस भी जैसे~ मुझ से ख़फ़ा लगती है,
  87. तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ...
  88. .............................................................

  89. वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मुँह मोड कर रोए,
  90. कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड कर रोए,
  91. मेरे सामने कर दि~ए मेरे तस्वीर के टुकड़े,
  92. पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड कर रोए.. ...
  93. .............................................................

  94. कुछ खवाब सुहाने टुट गऐ,
  95. कुछ यार ~पुराने रूठ गऐ..
  96. कुछ जख्म लगे थे चहरे पर,
  97. कुछ अन्दर से हम टुट गऐ..
  98. .............................................................

  99. हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे,
  100. वो भी पल पल हमे आजमाते रहे,
  101. जब ~मोहब्बत मे मरने का वक्त आया,
  102. हम मर गए और वो मूस्कूराते रहे.. ...
  103. .............................................................

  104. तेरी डोली उठी, मेरी मैय्‍यत उठी;
  105. फूल तुझ पर भी बरसे, फूल मुझ पर भी बरसे;
  106. फर्क सिर्फ इतना सा था, तू सज गई, मुझे सजाया गया;
  107. तू भी घर को चली, मैं भी घर को चला;
  108. फर्क सिर्फ इतना सा था, तू उठ के गई, मुझे उठाया गया;
  109. महफि‍ल वहां भी थी, लोग यहां भी थे;
  110. फर्क सिर्फ इतना सा था, उनका हंसना वहां, इनका रोना...
  111. .............................................................
  112.   

  113. ये हम भी गंवारा करते हैं,
  114. ये तुम भी गंवारा कर लेना।।
  115. रो रो के गु~जारी है हमने,
  116. तुम हँस के गुजारा कर लेना।।
  117. बेताबी हद से बढ़ जाऐ,
  118. और नींद आऐ रातों को।।
  119. तो डूब के मेरी यादों में,
  120. दुनियाँ से किनारा कर लेना।।
  121. जिस वक्त जना~जा गुजरेगा,
  122. उस शकस का तेरे कूचे से।।
  123. ज्जबात पे काबू कर लेना,
  124. खिडकी से नज़ारा कर लेना


  125. .............................................................
  126. तुम्हारी यादों में बीती हर बात अलग है,
  127. तुम्हारे साथ हुई हर मुलाकात अलग है,
  128. हर शख़्स मेरी ज़िन्दगी छूकर गया,
  129. मगर तुम्हारी दोसती की बात अलग है... ...
  130. .............................................................

  131. मेरे अरमानों की खातिर, मुझ से दूर चले जाओगे
  132. मेरी ज़िद ऐसी है क्या कि हो मजबूर चले जाओगे
  133. प्यार किया था न तुम~ने तो अब इतनी जल्दी क्या
  134. अपना पागलपन छोडो, तुम क्या दूर चले जाओगे.... ...
  135. .............................................................
  136.   

  137. महक होती तो ति~तलियाँ जरूर आती,
  138. कोई रोता तो सिसकियाँ जरूर आती,
  139. कहने को तो लोग मुझे बुहत याद करते है,
  140. मगर याद करते तो हिचकियाँ जरूर आती..!! ...
  141. .............................................................
  142.   

  143. कभी आंसू तो कभी ख़ुशी देखी,
  144. हमने अ~क्सर मजबूरी और बेकसी देखी..
  145. उनकी नाराज़गी को हम क्या समझें,
  146. हमने तो खुद अपनी तकदीर की बेबसी देखी.. ...
  147. .............................................................

  148. महफील भी रोयेगी, हर दिल भी रोयेगा,
  149. डुबी जो मेरी कस्ती तो साहील भी रोयेगा,
  150. हम इतना प्यार बीखेर देगे इस दुनीयाँ में के,
  151. मेरी मौत पे मेरा कातील भी रोयेगा.. ...
  152. .............................................................

  153. इतनी बदसलूकी ना कर ऐ जिदंगी .....
  154. हम कौन सा यहाँ बार बार आने वाले है ...
  155. सुना है जिदंगी इम्तहान लेती है .....
  156. यहाँ तो इम्तहानों ने जिदंगी ले रखी है ... ...
  157. .............................................................
  158.   

  159. बड़ी मुश्किल से बना हूँ टूट जाने के बाद,
  160. मैं आज भी रो देता हूँ मुस्कुराने के बाद,
  161. तुझ से मोहब्बत थी मुझे बेइन्तहा लेकिन,
  162. अक्सर ये महसूस हुआ तेरे जाने के बाद। ...

  163. ..................................................................
  164. आजकल कहाँ वफा का सिला देते है लोग,
  165. अब तो मोहब्बत की स़जा देते है लोग,
  166. पहले सजाते है दिलों~ मे चाहतों का ख्वाब,
  167. फिर एतबार को आग लगा देते है लोग.. ...
  168. .............................................................

  169. एक दिन जब हुआ प्यार का अहसास उन्हें,
  170. वो सारा दिन आक~र हमारे पास रोते रहे,
  171. और हम भी इतने खुद गर्ज़ निकले यारों कि,
  172. आँखे बंद कर के कफ़न में सोते रहे। ...
  173. .............................................................

  174. प्यार तो जिन्दगी को सजाने के लिए है,
  175. पर जिन्दगी बस दर्द बहाने के लिए है,
  176. मेरे अन्दर की उदासी काश कोई पढे,
  177. ये हसता हुआ चेहरा तो जमाने के लिए है.. 
  178. .............................................................
  179. एक शख्स दगा कर रहा है हर किसी के साथ,
  180. नजरों से जमानें के मुकम्मल उतर गया।
  181. इजहारे मोहब्बत का जुनूँ गौर से देखो,
  182. पहली ही मुलाकात में परवाना मर गया। ...
  183. .............................................................

  184. कहां से लाऊं हुनर उसे मनाने का ,
  185. कोई जबाब नही था उसके रूठ जानेका ,
  186. मोहब्बत मे सजा मुझे ही मिलती है क्योकि,
  187. जुर्म मैने किया था उससे दिल लगाने का.. ...
  188. .............................................................

  189. कितना अजीब अपनी जिन्दगी का सफर निकला,
  190. सारे जहाँ का दर्द अपना मुकद्दर निकला,
  191. जिस के नाम अपनी~ जिन्दगी का हर लम्हा कर दिया,
  192. अफसोस वही हमारी चाहत से बेखबर निकला..!! 
  193. .............................................................

  194. कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते,
  195. हर एक ने धोखा दिया, कि~स-किस को भुला देते,
  196. अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा,
  197. बयां करते तो महफ़िल को रुला देते। ...
  198. .............................................................
  199. फुर्सत किसे है ज़ख्मों को सरहाने की;
  200. निगाहें बदल जाती हैं~ अपने बेगानों की;
  201. तुम भी छोड़कर चले गए हमें;
  202. अब तम्मना न रही किसी से दिल लगाने की। ...
  203. .............................................................

  204.  
  205. कुछ खवाब सुहाने टुट गऐ,
  206. कुछ यार पुराने रूठ गऐ..
  207. कुछ जख्म लगे थे चहरे पर,
  208. कुछ ~अन्दर से हम टुट गऐ..
  209. कुछ हम थे तबीयत के सादे,
  210. कुछ लोग बेगाने लुट गऐ..
  211. कुछ अपनो ने बदनाम किया,
  212. कुछ बन अफसाने झूठ गऐ..
  213. कुछ अपनी शिकस्ता नाव थी,
  214. कुछ हमसे किनारे छुट गऐ.. 
  215. .............................................................
  216.   

  217. टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी,
  218. मेरी साँसों ने हर पर ~उसकी ख़ुशी मांगी..
  219. न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से,
  220. के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी.. ...
  221. .............................................................

  222. वो पानी की ल~हरों पे क्या लिख रहा था,
  223. खुदा जाने हरफ-ऐ-दुआ लिख रहा था,
  224. महोब्बत में नफरत मिली थी उसे भी,
  225. जो हर शकस को बेवफा लिख रहा था.. 
  226. .............................................................

  227. तरसते थे जो हमसे मिलने को कभी,
  228. ना जाने क्युँ आज मेरे साऐ से भी वो कतराते है,
  229. हम भी वो ही है और दिल भी वही है,
  230. ना जाने क्युँ लोग बदल जाते है... 
  231. .............................................................

  232. मानते हैं सारा जहाँ तेरे साथ होगा,
  233. खुशी का हर ल~म्हा तेरे पास होगा,
  234. जिस दिन टूट जाऐगी साँसे हमारी,
  235. उस दिन तुझे हमारी कमी का एहसास होगा.. 
  236. .............................................................

  237. एक नजर भी देखना गंवारा नहीं उसे,
  238. जरा भी ऐह~सास हमारा नहीं उसे,
  239. वो साहिल से देखते रहे डुबना हमारा,
  240. हम भी खुदार थे पुकारा नहीं उसे.. 
  241. .............................................................................
  242. सब कुछ मिला सुकून की दौलत न मिली;
  243. एक तुझको भूल~ जाने की मोहलत न मिली;
  244. करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर;
  245. हमको तेरे ख्याल से कभी फुर्सत न मिली। ...
  246. .............................................................
  247.   

  248. दर्द होता है मगर शिकवा नहीं करते ,
  249. कौन कहता है की हम वफा नहीं करते ,
  250. आखिर क्‍यूं नहीं बदलती तक़दीर ‘आशिक़’ की ,
  251. क्या मुझको चाहने वाले मेरे लिये दुआ नहीं करते !! ...
  252. .............................................................

  253. वो पास आते तो हम बात कर लेते,
  254. वो साथ रहते तो~ हम प्यार कर लेते,
  255. क्या मजबूरी रही जो वो चले गऐ,
  256. वजह तो बताते हम इन्तजार कर लेते.. 
  257. .............................................................

  258. मुझे उससे ~कोई शिकायत ही नहीं,
  259. शायद हमारी किसमत में चाहत ही नहीं,
  260. मेरी तकदीर को लिखकर खुदा भी मुकर गया,
  261. पूछा तो बोला ये मेरी लिखावट ही नही.. 
  262. .............................................................

  263. कभी आंसू तो कभी ख़ुशी देखी,
  264. हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी..
  265. उनकी नाराज़गी को हम क्या समझें,
  266. हमने तो खुद अपनी तकदीर की बेबसी देखी. ...
  267. .............................................................

  268. रात क्या ढली सितारे चले गए,
  269. गैरों से क्या शिकायत जब हमारे चले गए,
  270. जीत सकते थे हम भी इश्क की बाजी,
  271. पर उनको जिताने की धुन मे हम हारे चले गए.. ...
  272. .............................................................

  273. मुहब्बत में किसी का इंतजार मत करना,
  274. हो सके तो किसी से प्यार मत करना,
  275. कुछ नहीं मिलता मुहब्बत कर के,
  276. खुद कि ज़िन्दगी बेकार मत करना.. ...
  277. .............................................................
  278. गमों की मुझ पर कुछ ऐसी नजर हो गई,
  279. जब भी हम हँसे~ ये आँखे नम हो गई,
  280. हम रोऐ भी तो वो जान ना सके..
  281. और वो उदास भी हुऐ तो हमें खबर हो गई.. 
  282. .............................................................
  283.   

  284. आज हम उन्हें बेवफ़ा बताकर आये हैं,
  285. उनके खतों को ~पानी में बहाकर आये हैं,
  286. कोई निकालकर पढ़ ना ले खतों को,
  287. इसलिए पानी में भी आग लगाकर आये हैं.. ...
  288. .............................................................

  289. महोब्बत मुक्कदर है कोई खवाब नहीं,
  290. ये वो अदा है जिसमें सब कामयाब नहीं,
  291. जिन्हें प~नाह मिली उन्हें उंगलियों पे गिनो,
  292. जो बर्बाद हुऐ उनका हिसाब नहीं... 
  293. .............................................................

  294. शायद ज़िंदगी में हम उनको पहेले से ही जान लेते,
  295. उनके कदमो कि आहत पहेले से ही पहेचान जाते.
  296. तो शायद हमारे दिल का ये हाल ना होता,
  297. और ज़िंदगी में आज उस बेवफ़ा का नाम ना होता. ...
  298. .............................................................
  299. आँसू न होते तो,
  300. आँखेँ इतनी सुंदर न होती,
  301. दर्द न होता तो,
  302. खुशी की कोई कीमत न होती,
  303. अगर मिल~ जाता कोई चाहने,
  304. तो दुनिया मेँ ऊपर वाले जरुरत न हो.. ...
  305. .............................................................
  306.   

  307. बदलना आता नहीं हमको मौसम की तरह !
  308. हर एक रूप में तेरा इंतज़ार करते हैं......!!
  309. न तुम समेट स~कोगी जिसे क़यामत तक !
  310. कसम तुम्हारी तुम्हे इतना प्यार करते हैं !! ...
  311. .............................................................
  312. छोड़िये हमारी परवाह न कीजिये ,
  313. गलतियों पर हमारी वाह-वाह न कीजिये,
  314. जो करना है हमेशा दिल खोल कर करो,
  315. बस गलती से ~भी कोई गुन्हा न कीजिये,
  316. इतनी भी अब हमें वफ़ादारी न दिखाओ,
  317. सर्द रातों में हमारी यु हवा न कीजिये,
  318. दोस्ती में किसी का दिल न दुखाना,
  319. हो सके तो किसी के साथ दगा न कीजिये,
  320. मुहब्बत में खुद को बर्बाद न

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