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  •  आज गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती है. गोस्वामी तुलसीदास भक्ति रस के कवि थे। कवि सम्राट कहे जाने वाले गोस्वामी तुलसीदास ने सनातन धर्म को न सिर्फ अनमोल ग्रंथों का खजाना दिया बल्कि सनातन धर्म के प्रति विश्वास जगाने का काम भी किया। गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस, बरवै रामायण, विनय पत्रिका, राम लला महछू आदि प्रमुख ग्रंथों के रचयिता हैं। राम भक्त हनुमान को गोस्वामी तुलसीदास का अध्यात्मिक गुरू कहा जाता है। महाबलि हनुमान की उपासना के लिए भी तुलसी दास ने विभिन्न रचनाएं लिखी हैं। जिनमें हनुमान चालिसा और बजरंग बाण आदि प्रमुख हैं।


  • ऐसी मान्यता है कि तुलसीदास को अपनी सुंदर पत्नी रत्नावली से अत्यंत लगाव था। एक बार तुलसीदास ने अपनी पत्नी से मिलने के लिए उफनती नदी को भी पार कर लिया था। तब उनकी पत्नी ने उन्हें उपदेश देते हुए कहा- ” जितना प्रेम मेरे इस हाड-मांस के बने शरीर से कर रहे हो, उतना स्नेह यदि प्रभु राम से करते, तो तुम्हें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती।” यह सुनते ही तुलसीदास की चेतना जागी और उसी समय से वह प्रभु राम की वंदना में जुट गए।

  • श्रीराम के अनन्य भक्त और रामचरित मानस जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ के रचयिता संत तुलसी दास की 516वीं जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन.


  • राम नाम मनि दीप धरू जीह देहरी द्वार।
  • तुलसी भीतर बाहरौ जौ चाहसि उजियार।।

  • Tulsidas-JAyanti
  • तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुँ ओर।
  • बसीकरन एक मंत्र है परिहरू बचन कठोर।।

  • काम क्रोध मद लोभ की जौ लौं मन में खान।
  • तौ लौं पण्डित मूरखौं तुलसी एक समान।।

  • सुरनर मुनि कोऊ नहीं, जेहि न मोह माया प्रबल।
  • अस विचारी मन माहीं, भजिय महा मायापतिहीं॥

  • आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह।
  • तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह।।

  • देव दनुज मुनि नाग मनुज सब माया विवश बिचारे।
  • तिनके हाथ दास तुलसी प्रभु कहा अपनपो हारे॥

  • तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुँ ओर।
  • बसीकरन एक मंत्र है परिहरू बचन कठोर।।

  • दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
  • तुलसी दया न छांड़िए, जब लग घट में प्राण॥

  • बिना तेज के पुरुष की अवशि अवज्ञा होय।
  • आगि बुझे ज्यों राख की आप छुवै सब कोय।।

  • तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक
  • साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसे एक






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