zindagi quotes in hindi life


  • ज़िन्दगी एक आलू का परांठा है,
  • जो वक्त के तवे पर सेका जाता है,
  • ठीक पके तो स्वाद है भैया,
  • वरना कच्चा भी रह जाता है।

  • ज़िन्दगी एक भरा हुआ पैमाना है,
  • आहिस्ते-आहिस्ते पिया जाता है,
  • पर होश भी रखना होता है,
  • वरना जाम छलक ये जाता है।

  • ज़िन्दगी एक थैली नमक है,
  • जो चुटकी से डाला जाता है,
  • ठीक पड़े तो ज़ायका,नहीं तो,
  • कम-ज्यादा हो जाता है।

  • ज़िन्दगी एक गर्म कम्बल है,
  • जो जाड़ों में सबको भाता है,
  • और गर्मी के आ जाने पर,
  • बंद सन्दूक में ही सुहाता है।

  • जिंदगी एक चाय की दुकान है,
  • जहाँ हर कोई आता जाता है,
  • कुछ कहता है कुछ सुनता है,
  • फिर अपनी राह को जाता है।
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  • पहली दफ़ा जब आपको देखा और मिला था मैं,
  • आपको शायद ठीक से समझ न सका था मैं,
  • यूँ तो भांप जाता हूँ हर तूफ़ान के खतरों को,
  • पर इस सुनामी को सूंघ भी ना सका था मैं।

  • हाँ सुनामी, मगर उसके किताबी अर्थ से उलट,
  • प्रवाह हो अपने आप में सकारात्मक ऊर्जा का,
  • रचनाशीलता का, हास्य-व्यंग्य का, विनोद का,
  • और केंद्रबिंदु मेरी इस हास्य-कविता का।

  • लेकिन आज आपका जन्मदिन है इसलिए,
  • आपको बेवजह नाराज़ करने से क्या फ़ायदा,
  • चलिए एक जादू की झप्पी और ढ़ेरों बधाइयां,
  • दे देना ठीक होगा, यही कहता है क़ायदा।

  • अब उपहारों का चलन भी है इस अवसर पर,
  • तो पेश है एकदम ताज़ी भाजी सी ये कविता,
  • सुनिए-सुनाइये, पढ़िए, झूमिये और गाइए,
  • जो कुछ भी करें इसके साथ,है आपकी इच्छा।

  • वैसे और कितनी तारीफ़ करूँ मैं आपकी,
  • क्योंकि मेरे लफ्ज़ जवाब देने लग पड़े हैं,
  • आपके इस विराट व्यक्तित्व के सामने,
  • मेरे वाक्य छोटे, बहुत छोटे लगने लगे हैं।

  • पर लोग जो भी कहें आप सच में महान हो,
  • गुणवान ही नहीं गुणों की पूरी खदान हो,
  • बलवान हो, पहलवान हो, शक्तिमान हो,
  • पर सच्ची-मुच्ची सर, आप हमारी जान हो।
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  • कभी-कभी
  • जब मैं सोचता हूँ,
  • अकेले में,
  • उदासी में,
  • तो ना जाने क्यूँ
  • एक चिंगारी
  • भड़क जाती है जहन में,
  • एक धुआं सा उठता है,
  • एक आग जो
  • दबी पड़ी थी किसी कोने में,
  • या लगभग बुझ चुकी थी
  • सुलगने लगती है।

  • मेरा अन्तर्मन
  • शायद कुछ कहने की
  • कोशिश करता है
  • मुझ जैसे से,
  • जिसने अपने कानों को
  • सिर्फ़ बाहर की दुनिया के लिए
  • खोल रखा है,
  • और ना चाहते हुए भी
  • अन्दर की आवाज़ को
  • दबा रखा है।

  • जो अनजान है
  • अपने भीतर के सच से,
  • अपनी असली पहचान से,
  • नाम तो याद है जिसे
  • अपना मगर,
  • नाम के मक़सद से है
  • नावाकिफ़,
  • खो गया है जो
  • दुनिया की भीड़ में,
  • भटक गया है
  • सफ़र में कहीं,
  • भूल गया है
  • मंजिल का ठिकाना।

  • ज़िन्दगी जिंदादिली का नाम है,
  • मगर जी रहा है
  • मुर्दादिल बनकर,
  • खुश नज़र आता है सभी को,
  • लेकिन खुशी से कोसों दूर,
  • डूब चुका है जो
  • स्याह रातों में,
  • हताशा-निराशा के भंवर में।

  • तभी ख़याल आता है
  • ज़िन्दगी के उन हसीं लम्हातों का,
  • वो पल जो यादगार गुज़रे,
  • वो यादें वो बातें,
  • तमन्नाओं के रेले,
  • बहारों के मेले,
  • और एक पल में ही
  • निराशा के बादल छंट जाते हैं,
  • जगमगाता है आशा का सूरज,
  • ख़त्म हो जाती है
  • नकारात्मक चिंतन के पत्थर से
  • मन के तालाब में
  • पैदा हुई हलचल,
  • आ जाती है स्थिरता,
  • मिलती है एक नई प्रेरणा
  • जीने की,
  • जिंदादिली की।

  • एहसास होता है
  • इंसान की इस फ़ितरत का
  • जो ज़रा सा ग़म मिलने पर
  • उसे मायूस कर देती है,
  • राई जितने ग़म को
  • पहाड़ कर देती है,
  • लगता है तब अपना ही ग़म
  • उसे दुनिया में सबसे बड़ा,
  • जबकि जहाँ में है कहीं ज्यादा दर्द
  • कहीं ज्यादा पीड़ा,
  • और सुनाई देती है अंदर की आवाज़,
  • जो कह रही है
  • तुम अपने आप में
  • पूरे हो
  • पक्के हो।
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